Saturday, August 30, 2008

सेवा / स्‍वर्ण जयंती वर्ष

सृजन का पर्याय: भिलाई महिला समाज एक पेट्रोल पंप जिसे महिलाएं महिलाएं चलाती हैं

- ललित कुमार

समाज के नवनिर्माण में शिक्षा की महती भूमिका को ध्यान में रखते हुये भिलाई इस्पात संयंत्र के सहयोग से भिलाई महिला समाज ने महिलाओं और बच्चों की उन्नति तथा समाज के जरूरतमंद लोगों के विकास में अनेक कार्य किए हैं, जो भिलाई महिला समाज के समर्पण, जु़डाव तथा उनके द्वारा किये गये कार्यों का जीवंत प्रमाण है।

वर्ष 1957 में समाज सेवा और जरूरतमंद लोगों की सेवा के जज़्बे के साथ आरंभ भिलाई महिला समाज आज लगातार पुष्पित और पल्लवित होते हुये महिलाओं के सृजनशीलता की मिसाल बन गई है। इस संस्था द्वारा अंचल की महिलाओं को स्वावलंबी तथा आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से नियमित आय के साधन उपलब्ध करवाये जाते हैं ताकि वे पूरे आत्मसम्मान के साथ अपना आर्थिक स्तर सुधारते हुये, अपने परिवार की समुचित देखभाल करने में सक्षम होते हुये अंचल और देश के विकास में अपना योगदान दे सकें । दूसरी ओर भिलाई महिला समाज इस वास्तविकता से वाकिफ हैं कि समाज सेवा के कार्य अनुदान या सहायता के बल पर बहुत लंबे समय तक नहीं चलाये जा सकते। इसी दृष्टि से आर्थिक उपार्जन हेतु उसने अपने स्वयं के उत्पादन केन्द्रों की स्थापना की।

दिसंबर 2004 में तटीय क्षेत्रों में सुनामी लहरों के रूप में आये प्राकृतिक आपदा से हुये भीषण विनाश ने पूरे विश्व के साथ ही भिलाई महिला समाज को भी दहला दिया। इनके प्रभावितों की मदद और पुनर्वास के लिये उसने स्वैच्छिक अंशदान से एक लाख रूपये एकत्रित कर रेड क्रास सोसायटी को प्रदान किये।

संस्था के आर्थिक उपार्जन केन्द्रों के तहत इस्पात नगरी के सेटर-4 में स्थित मुख्यालय में उद्योग केन्द्र का संचालन किया जाता है। यहाँ चलाई जाने वाली सिलाई कक्षा में महिलाओं द्वारा शालेय बच्चों तथा भिलाई इस्पात संयंत्र के विभिन्न विभागों के चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों के लिये यूनिफार्म तैयार किये जाते हैं। समाज के मुख्यालय में और सेटर-१ में कढ़ाई अनुभाग संचालित किया जाता है, जहाँ महिला समाज कढ़ाई के प्रशिक्षण देने के साथ ही आपूर्ति-आदेश प्राप्त करती है।

सेटर-1 तथा सेटर-6 स्थित दस्ताना केन्द्र में संयंत्र के उपयोग के लिये प्रति माह लगभग 40 हजार जोडी दस्ताने बनाये जाते हैं। साबुन इकाई में संयंत्र में खपत होने वाले संपूर्ण साबुन का निर्माण किया जाता है। मसाला केन्द्र से इस्पात नगरी के निवासियों को स्वास्थ्यवर्धक शुद्घ मसाले उपलब्ध कराये जाते हैं। सहकारी जलपान गृह, लबों और मुख्य चिकित्सालय के साथ ही अन्य चिकित्सालयों में भी इन मसालों का उपयोग किया जाता है। स्टेशनरी और चॉक इकाई भिलाई तथा समीपवर्ती क्षेत्रों के शैक्षिक संस्थाओं की आवश्यकता के अनुरूप स्टेशनरी सामग्री तथा चॉक उपलब्ध कराती है।

एक अभिनव अभियान के रूप में भिलाई महिला समाज द्वारा आर्थिक उपार्जन की दृष्टि से सेक्‍टर-6 में एक पेट्रोल पंप का भी संचालन किया जाता है। समृद्धि फ्यूल नाम से यह पेट्रोल पंप प्रबंधन से लेकर पेट्रोल देने तक, मात्र महिलाओं द्वारा संचालित पूरे प्रदेश का एकमात्र पेट्रोल पम्प है।


भिलाई के चिकित्सा सुविधा की पात्रता नहीं रखने वाले अपने सहयु त सदस्याओं के लिये भिलाई महिला समाज सेटर-4 स्थित अपने मुख्यालय में एक नि:शुल्क स्वास्थ्य केन्द्र का संचालन भी करता है। इस स्वास्थ्य केन्द्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवायें उपलब्ध रहती हैं।

जटिल प्रकरणों को यहाँ से सेटर-9 स्थित मुख्य चिकित्सालय भेज दिया जाता है। ऐसी स्थिति में इलाज का पूरा खर्च महिला समाज स्वयं वहन करती है।

संयंत्र के सेटर-1 स्थित चिकित्सालय में संयंत्र के साथ मिलकर नि:शुल्क लैंस प्रत्यारोपण केन्द्र भी आरंभ किया है। इस केन्द्र में आरंभ से ले कर अब तक 2500 से अधिक लैंस सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किये जा चुके हैं।

शिक्षा के बाद महिलाओं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुये स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन भी किये जाते हैं। इसके अलावा से टर-ब् स्थित मुख्यालय में अपने सहयु त सदस्याओं के लिये नि:शुल्क स्वास्थ्य केन्द्र का संचालन भी किया जाता है। इस स्वास्थ्य केन्द्र में दो विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवायें उपलब्ध रहती हैं। जटिल प्रकरणों को यहाँ से सेटर-4 स्थित मुख्य चिकित्सालय भेज दिया जाता है। ऐसी स्थिति में इलाज का पूरा खर्च भी भिलाई महिला समाज स्वयं वहन करती है।

भिलाई के नवस्थापित कैं सर चिकित्सालय में निर्धन व कमजोर वर्ग के दो मरीजों के उपचार का पूरा खर्च भी यह संस्था वहन कर रही है। वह अपने कार्मिकों एवं सहयु त सदस्यों और समाज के कमजोर वर्ग के मेधावी और जरूरतमंद बच्चों को आगे पढ़ाई जारी रखने के लिये छात्रवृत्तियाँ भी प्रदान करती हैं। समाज की सहायता से आज कई बच्चे अभियांत्रिकी और चिकित्सा की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं।

भिलाई महिला समाज अपने सेवा कार्यों में सहयोग दे रहे कार्मिकों के परिजनों और बच्चों का भी पूरा ध्यान रखता है। समाज के उपार्जन केन्द्रों में कार्यरत कार्मिकों के परिजनों और बच्चों के लिये विश्वकर्मा पूजा उत्सव के दौरान पहली बार प्रीति भोज का आयोजन किया गया। मनोरंजन और ज्ञान में वृदि्घ की दृष्टि से कार्मिकों को भिलाई इस्पात संयंत्र का भ्रमण कराया गया तथा दोपहर भोज भी प्रदान किया गया। विश्व महिला दिवस के अवसर पर कार्मिकों के लिये भजन संध्या का आयोजन भी किया गया।

संस्था द्वारा हाल ही में किये गये कार्यों में शहीद भगत सिंह अनाथ आश्रम के बच्चों को खाद्य सामग्री का वितरण, उनका स्वास्थ परीक्षण तथा टीकाकरण कर उन्हें गर्म कपड़े तथा शालेय गणवेश वितरण तथा सभी 45 बच्चों को मध्यान्ह भोजन वितरण, खुर्सीपार स्थित सरस्वती बाल अनाथ आश्रम में म्भ् बच्चों के लिये नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन तथा स्कूल यूनिफार्म, कापियाँ एवं अन्य कपड़े वितरण और सरस्वती बाल अनाथ आश्रम को प्रति सप्ताह 25 किलो अनाज (चॉवल और दाल) वितरण आदि प्रमुख हैं।

जरूरतमंद महिलाओं और बच्चों के साथ ही समाज और मानव मात्र की सेवा करते हुये भिलाई महिला समाज अपनी स्थापना की स्वर्ण जयंती वर्ष तक पहुँच गई है। किसी समाजसेवी संस्था के लिये निरंतर सक्रियता के साथ पचास वर्ष पूरे करना सचमुच एक उपलब्धि है।

बिना किसी सरकारी सहायता या अनुदान के समाज का जरूरत मंद लोगों को अपने पैरों पर खड़ा होने में समर्थ करने का कार्य महज एक संस्था के रूप में सफलतापूर्वक नहीं किया जा सकता। इसके लिये एक भावनात्मक एहसास होना जरूरी है। आज भिलाई महिला समाज एक संस्था से उपर उठ कर इसी एहसास और अनवरत सृजनशीलता का दूसरा नाम बन गया है।

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