November 25, 2016

इमोजी

शब्दों की जगह लेते भावचित्र 
 - संध्या राय चौधरी
 शब्दों और भाषा की दुनिया में ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी को काफी मान्यता और प्रतिष्ठा हासिल है। दुनिया में सबसे ज़्यादा प्रचलित और इस्तेमाल होने वाले कुछ नए-नए शब्द इस डिक्शनरी में हर साल जोड़े जाते हैं, फिर चाहे वे विश्व की किसी भी भाषा के क्यों न हों। डिक्शनरी में जोड़े जाने वाले शब्द की चर्चा भी बहुत होती है, लेकिन वर्ष 2015 में डिक्शनरी में किसी नए शब्द को शामिल न करके जब एक इमोजी को स्थान दिया गया, तो तहलका मच गया था। ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में स्थान पाने वाला यह इमोजी है 'फेस विथ टियर्स ऑफ जॉय
और अब खबर यह है कि यह प्रतिष्ठित डिक्शनरी शायद इस साल भी कोई शब्द न चुनकर किसी ग्राफिक या अन्य किसी माध्यम को चुन सकती है। वैज्ञानिकों के अध्ययन के मुताबिक लोगों को शब्द से ज़्यादा लगाव किसी संकेत, भाव या चित्र से होता है।

दरअसल, 2015 में ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने शब्द के स्थान पर एक चित्र (चित्र समूह) को जगह दी थी और उसे वर्ड ऑफ द ईयरभी घोषित किया था। यह चित्र एक इमोजी था। इमोजी वास्तव में जापान में प्रचलित हँसते हुए स्माइली में से एक है। ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने ऐसे इमोजी का उल्लेख किया है, जिसमें हँसते हुए स्माइली की आँखों से आँसू निकल रहे हैं। इस इमोजी को वर्ड ऑफ द ईयरघोषित करते हुए डिक्शनरी के प्रकाशकों ने कहा था कि यह इमोजी वर्ष 2015 में दुनिया के लोगों के मूड को बेहतर ढंग से व्यक्त करता है, इसीलिए इसे डिक्शनरी में शामिल किया गया है। एक इमोजी को विश्व की सबसे लोकप्रिय डिक्शनरी में शामिल करने पर लोग अचम्भित हुए थे। ऑक्सफोर्ड ने 2014 में अंग्रेजी के चार अक्षरों से बने शब्द वेप’ (VAPE) को चुना था।
शब्दचित्र की नई कड़ी
कहने को तो इमोजी एक जापानी शब्दचित्र है। यह मनुष्य की भावनाओं को व्यक्त करने वाले इमोटिकॉन्स की तरह का ही एक चित्र है। जिस तरह स्माइली का ज़्यादातर इस्तेमाल मोबाइल फोन और इंटरनेट पर किया जाता है, उसी तरह इमोजी जापानी फोन से निकल कर अब पूरी दुनिया में छा गए हैं। इमोजी का एक शाब्दिक अर्थ भी है। इस में प्रयुक्त का मतलब है इमेज यानी चित्र और मोजीका मतलब है लिपि-संकेत। इस प्रकार इमोजी वास्तव में एक चित्रलिपि है।
जिस दौर में दुनिया में स्माइली का प्रचलन शुरू हो रहा था, लगभग उसी दौर में एक जापानी इंजीनियर शिगेताका कुरीता ने कई लोगों की भावनाओं को व्यक्त करते हुए करीब 180 अलग-अलग इमोजी बनाए थे। वर्ष 1998-99 की बात है जब कुरीता और उनकी टीम ने एक दूरसंचार कंपनी एनटीटी डोकोमो की मोबाइल व इंटरनेट सेवाओं के लिए खास तरह के संकेतों के आविष्कार का काम हाथ में लिया था। इमोजी को ईजाद करते समय उनकी टीम ने मौसम की भविष्यवाणी करने वाले संकेतों और शेयर बाज़ार के भावों को प्रकट करने वाले संकेतों पर विचार किया। जैसे मौसम की भविष्यवाणी करते समय बादलों, बारिश, बर्फबारी या सूर्य का चित्र बनाया जाता है, उसी तरह उन्होंने इंसान के मूड यानी हंसी, खुशी, क्रोध आदि भावों को व्यक्त करने वाले इमोजी बनाए।
नए किस्म के इमोटिकॉन्स
जिस प्रकार इमोजी दो शब्दों और मोजीसे मिल कर बना है, उसी प्रकार इमोटिकॉन्स भी इमोशन (भावना) और आइकन (चित्र-संकेत) से मिल कर बना है। इमोटिकॉन्स की तरह इमोजी भी भाव संकेत हैं। वैसे इमोटिकॉन्स दुनिया में डेढ़ सदी से प्रयोग में आ रहे हैं। बताते हैं कि पहली बार न्यूयार्क टाइम्स ने वर्ष 1862 में अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का भाषण छापते समय स्माइली का प्रयोग किया था। इसके बाद पत्र-पत्रिकाओं में स्माइली का इस्तेमाल होने लगा। कंप्यूटर के साथ स्माइली ज़्यादा प्रचलन में आए।
कंप्यूटरों पर स्माइली लाने का श्रेय अमेरिका की कार्नेगी मिलान युनिवर्सिटी के प्रोफेसर स्कॉट फालमैन को जाता है। 1982 में उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक संकेतों के रूप में कुछ स्माइली बनाए थे। इसके बाद सैकड़ों स्माइली बनाए गए - चिढ़ाते, मुस्कराते, गुदगुदाते, रोते चेहरों वाले स्माइली का आज पूरी दुनिया में स्मार्टफोन्स और कंप्यूटर पर इंटरनेट के ज़रिए इस्तेमाल हो रहा है।
फैलता जापानी इमोजी
इमोजी को 1997 में जापानी शब्दकोशों में पहली बार जगह दी गई थी। पर ये तब ज़्यादा मशहूर हुए ,जब जापान की डोकोमो कंपनी ने इमोजी को टेक्स्ट मेसेज में इस्तेमाल करने की सहूलियत दी थी।
हाल ही में एपल द्वारा किए गए एक सर्वे के मुताबिक एपल के आईफोन में ही दो करोड़ बार ये इमोजीस डाउनलोड किए गए। अन्य कई स्मार्टफोन्स में तकरीबन 720 स्माइली आईकॉन उपलब्ध हैं। इनमें स्वीट स्माइली फेस वाले सिंबल से लेकर डरावने और चुलबुले फेस सिंबल तक मौजूद हैं। ऐसे ही इमोजी को स्कैन करने वाली साइट emoji-scanner-wird हर ट्वीट का इमोजी स्कैन करती है। इसके मुताबिक रेड हार्ट यानी लाल दिल वाला सिंबल पहले पायदान पर है जिसका इस्तेमाल ट्वीट्स के दौरान 24 करोड़ 20 लाख बार हुआ है। दूसरे स्थान पर हैप्पी क्राइंग सिंबल यानी खुशी के आँसुओं वाला सिंबल (15 करोड़ 30 लाख बार) और तीसरे स्थान पर माईलिंगस सिंबल है (8 करोड़ 60 लाख बार)।
1998 तक स्माइली वेब जगत में शामिल हो चुके थे। फिर इन्हें फ्री में डाउनलोड करने की सुविधा भी वर्ष 2000 में शुरू कर दी गई और इन पर एक पुस्तक भी प्रकाशित हुई। लगभग 1000 इमोजी ऐसे हैं; जिन्हें लगभग सभी डिजिटल माध्यमों में इस्तेमाल किया जा सकता है। वैसे यह पता नहीं है कि कुल कितने इमोजीस हैं; क्योंकि हर दिन नए-नए इमोजीस जुड़ते रहते हैं। पहले इमोजी किसी वाक्य में 1-2 जगह पर इस्तेमाल होता था पर धीरे-धीरे अलग-अलग इमोजी जोड़ कर पूरे-पूरे वाक्य बनाए जाने लगे। जापान में तो इमोजी का प्रयोग कई रूपों में हो रहा है। जापानी नूडल्स, डैंगो, ओनिगिरि, जापानी करी या खुशी को व्यक्त करने वाले इमोजी भी वहाँ प्रचलित हैं।
इमोजी उपन्यास और फिल्में

इमोजी कितनी तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं, इसकी एक मिसाल यह है कि एक उपन्यास मोबी डिक का तो इमोजी में ही अनुवाद किया गया है। असल में एक-एक इमोजी को जोड़कर पूरा वाक्य बनाया जाता है और जो लोग इमोजी में अपनी बात कहने-सुनने के आदी हैं, वे बड़ी आसानी से इमोजी जोड़ कर बनाए गए वाक्य का अर्थ समझ जाते हैं। सिर्फ उपन्यास ही नहीं, अब तो इस पर पूरी फिल्म बनाने की बात भी हो रही है। हॉलीवुड की कंपनी सोनी पिक्चर्स एनिमेशन ने यह घोषणा की है कि वह इमोजी पर आधारित एक एनिमेशन फिल्म बनाने की योजना पर काम कर रही है।
नया ज़माना, नई भाषा
वैसे तो शब्दों के समर्थक कह रहे हैं कि चित्रों को भाषा का माध्यम बनाना गलत है, पर यह एक सच्चाई है कि जिस तरह से स्मार्टफोन पर शब्दों की बजाय कोई बात चित्रों के ज़रिए कह दी जाती है, उसमें भाषा का खो जाना स्वाभाविक है। कोई बात कहने के लिए अब यह ज़रूरी नहीं रह गया है कि एक लंबा वाक्य ही कहा जाए। जैसे धन्यवाद कहने या आभार प्रकट करने के लिए उठा हुआ अँगूठा बना दिया जाता है या शाबाशी देने के लिए ताली बजाते हाथों का संकेत बना दिया जाता है। अन्य भाव भी चित्रों से आसानी से व्यक्त हो जाते हैं। इसलिए पूरी संभावना है कि निकट भविष्य में स्माइली की तरह इमोजी भी पूरी दुनिया पर छा जाएँगे। जैसे ऑक्सफोर्ड और एक अन्य कंपनी स्विफ्टकी ने अपने सर्वेक्षणों के आधार पर आकलन किया है कि इमोजी का ब्रिटेन में 20 फीसदी और अमेरिका में 17 फीसदी मेसेजिंग में इस्तेमाल हो रहा है। यही नहीं, 2014 के मुकाबले 2015 में इमोजी का तीन गुना ज़्यादा इस्तेमाल हुआ और अनुमान है कि 2016-17 में पूरे विश्व में

लगभग 42 फीसदी मेसेजों में इनका इस्तेमाल होगा। हो सकता है कि जल्द ही इमोजी मनोरंजन की भाषा न रह कर कामकाज की भाषा भी बन जाए। वॉट्सएप, स्नैपचैट, फेसबुक ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर सैकड़ों इमोजीस हर जगह मौजूद हैं। इंटरनेट, नॉर्मल टेक्स्ट मेसेजिंग अथवा चैटएप्स पर चैटिंग के दौरान इन इमोजीस का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जाता है। यहाँ तक कि फेसबुक, ट्विटर पर कमेंट के रूप में भी इनका इस्तेमाल किया जाता है। यानी औपचारिक भाषा के शब्दों के बगैर लोग केवल एक इमोजी पर ही पूरा संदेश लिखने लगे हैं।
टीयर्स ऑफ जॉय का चयन
सैकड़ों इमोजीस में सिर्फ टीयर्स ऑफ जॉय चुनने की वजह बताई गई थी इसका ज़्यादा लोकप्रिय होना। एक रिसर्च के मुताबिक अमेरिका में इस्तेमाल होने वाले सारे इमोजीस में से 20 फीसदी इस इमोजी का प्रयोग किया जाता है। यूके में 17 फीसदी लोग इसका प्रयोग करते हैं। इसी आधार पर इसे वर्ड ऑफ द ईयर का खिताब दिया गया है।
अन्य लोकप्रिय इमोजीस में हैप्पी क्राइंग फेस, बीटिंग हार्ट, किसिंग फेस, झूमता और बंद आंखों वाला चेहरा, स्लीपी फेस, स्माइलिंग फेस विथ ओपन माउथ, परियां, चाँ, हैमबर्गर, केक, कैंडल, और नमस्कार की मुद्रा वाले इमोजीस का भी भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है।
बनाएँ अपना इमोजी
अब आप चाहें, तो अपनी शक्ल को भी इमोजी में चेंज कर सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन सॉफ्टवेयर मौजूद हैं। ऐसी कुछ वेबसाइट्स भी हैं जो आपकी शक्ल को इमोजी में बदल देंगी और आप इन्हें ट्विटर या फेसबुक जैसी सोशल साइट्स पर शेयर भी कर सकते हैं। (स्रोत फीचर्स)

0 Comments:

लेखकों से अनुरोध...

उदंती. com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी,कविता, गीत,गजल, व्यंग्य,निबंध,लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है।आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही साथी समाज सेवी संस्थाद्वारा संचालित स्कूलसाथी राऊंड टेबल गुरूकुल में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है।
शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से साथी राऊंड टेबल गुरूकुलके बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है।
अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर,तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में),क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर,पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर,जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ।
सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी,रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबाइल नं.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष