August 12, 2015

ग़ज़लें

- गिरीश पंकज 

1. अंगार लिखता है

कोई तकरार लिखता है कोई इनकार लिखता है
हमारा मन बड़ा पागल हमेशा प्यार लिखता है

वे अपनी खोल में खुश हैं कभी बाहर नहीं आते
मगर ये बावरा दुनिया, जगत, व्यवहार लिखता है

ये जीवन राख है गर प्यार का हिस्सा नहीं कोई
ये ऐसी बात है जिसको सही फनकार लिखता है

कोई तो एक चेहरा हो जिसे दिल से लगा लूँ मैं
यहाँ तो हर कोई आता है कारोबार लिखता है

तुम्हारे पास आ जाऊँ  पढ़ूँ कुछ गीत सपनों के
तुम्हारे नैन का काजल गजब श्रृंगार लिखता है

अगर हारे नहीं टूटे नहीं तो देख लेना तुम
वो तेरी जीत लिक्खेगा अभी जो हार लिखता है

यहाँ छोटा-बड़ा कोई नहीं सब जन बराबर हैं
मेरा मन जि़न्दगी को इस तरह तैयार लिखता है

हमारी दोस्ती उससे भला होगी कहो कैसे
मैं हूँ पानी मगर वो हर घड़ी अंगार लिखता है

उधर हिंसा हुई, कुछ रेप, घपले, हादसे ढेरों
ये कैसी सूरते दुनिया यहाँ अखबार लिखता है

वो खा-पीकर अघाया सेठ कल बोला के सुन पंकज
जऱा दौलत कमा ले तू तो बस बेकार लिखता है

2. कह कर चले आए

पेड़ था फलदार तो पत्थर चले आए
क्या करें हम चोट बस खा कर चले आए

लोग जलते हैं यहाँ क्यों फल रहे हैं हम
झेल कर इस दर्द को हँस कर चले आए

शातिरों के हाथ में है अब अदब की डोर
जब दिखा यह दृश्य हम कट कर चले ले आए

राग कुरसी जब सुनाया जा रहा था तब
मन दु:खी होने लगा उठ कर चल आए

दर्द में डूबी निशा को भूल बैठे हम
तुम अचानक दूत-से बन कर चले आए

आँसुओं की इक नदी बहने लगी जब भी
रोकने उनको सभी अक्षर चले आए

एक मेला-सा लगे बर्बादियों का अब
थी बड़ी किस्मत कि जो बच कर चले आए

लूटते थे लोग पहले जो विदेशी थे
अब तो है ये हाल कि रहबर चले आए

प्यार से जिसने पुकारा हम गए उस ओर
इक नदी की धार से बहकर चले आए

देख कर हमको खुशी जाहिर न की उसने
अब न पंकज आएगा कह कर चले आए

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दस व्यंग्य संग्रह और पांच उपन्यासों के लेखक गिरीश पंकज वैसे तो मूलत: व्यंग्यकार के रूप मे ही पहचाने जाते है लेकिन बहुत कम लोग इस तथ्य से परिचित है कि वे गज़़ले भी कहते है। गत वर्ष उनका दूसरा  गज़़ल संग्रह प्रकाशित हुआ था- यादों में रहता है कोई

सम्पर्क: जी- 31, नया पंचशील नगर, रायपुर (छ. ग.) 
मो.94252 12720Email- girishpankaj1@gmail.com

1 Comment:

सहज साहित्य said...

पंकज जी व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर हैं ही , साथ ही धारदार ग़ज़लों से भी पाठको के मन को छू जाते हैं।

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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