August 15, 2014

अनकही


उदंती... के छहः बरस का सफर...

 - डॉ. रत्ना वर्मा 


अगले माह सितम्बर 2014 को उदंती के सफर को छह वर्ष पूरे हो जाएँगे... 2008 अगस्त से उदंती. com  के नाम से  शुरू हुए इस सफर को जारी रखने में उंदती से निरंतर जुड़े रहने वाले सम्माननीय रचनाकारों की मैं हृदय से आभारी हूँ, जिनके सहयोग के बगैर यह सफर असंभव था। साथ ही उन असंख्य पाठकों का भी आभार जिनके सहयोग और प्रोत्साहन से ही उदंती लगातार प्रकाशित हो पा रही है।  विदेशों में बसे उन असंख्य हिन्दी- प्रेमी लेखकों और पाठकों का भी आभार जिनकी वजह से उदंती की पहचान एक अंतरराष्ट्रीय वेब पत्रिका www.udanti.com के रूप में उभर कर सामने आई है।

सामाजिक सरोकारों और जीवन की मूलभूत समस्याओं तथा आवश्यकताओं को लेकर प्रारंभ की गई इस पत्रिका के प्रत्येक अंक में आपने हर बार अलग- अलग रंग देखे हैं।  इन छह वर्षोँ में उदंती ने विभिन्न सामाजिक विषयों पर कई महत्त्वपूर्ण विशेष अंक भी प्रकाशित किए हैं जैसे- लोककला, पर्व- संस्कृति, पर्यावरण, प्रकृति, पर्यटन, धरोहर, छत्तीसगढ़ी फिल्म कही देबे संदेश, कृषि, आपदा, बाल साहित्य, आदि आदि... जिन्हें पाठकों से भरपूर सराहना मिली है।

मुझे खुशी है कि पिछले छह वर्ष से मैं सफलता पूर्वक इसका संपादन कर रही हूँ। यही नहीं अपने आरंभिक काल 2008 अगस्त से वेब पेज www.udanti.com के रूप में भी यह अब तक सफलता पूर्वक संचालित हो रही है। यद्यपि कई बार आर्थिक कठिनाईयों के चलते  पत्रिका के संयुक्तांक निकालने पड़े हैं। छोटी पत्रिकाओं के इस संकट को आप भलि-भाँति समझ सकते हैं।  यह बताते हुए मुझे दुःख हो रहा है कि उदंती में रचनात्मक रूप से सहयोग करने वाले अपने सम्माननीय लेखकों को मैं मानदेय नहीं दे पाती, फिर भी बगैर किसी शिकायत के मुझे देश ही नहीं विदेशों में बसे हिन्दीभाषी लेखकों का भरपूर सहयोग मिलता रहा है।

मैं छत्तीसगढ़ शासन की भी शुक्रगुजार हूँ जिन्होंने पत्रिका जारी रखने में निरंतर अपना सहयोग प्रदान किया है। उम्मीद ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि सामाजिक सरोकारों और जनजगरण के लिए निरंतर काम कर रही इस पत्रिका को इसी प्रकार आगे भी उनका प्रोत्साहन तथा सहयोग मिलता रहेगा।

उदंती से जुड़े उन समस्त पाठकों, लेखकों का शुक्रिया अदा करना चाहती हूँ जिन्होंने पत्रिका को इन ऊँचाइयों तक पँहुचाने में मेरा साथ दिया। आगे भी यह साथ बना रहे, यही मंगल कामना है।
             

                                  

4 Comments:

Harihar Vaishnav said...

Utanti ki nirantarta bani rahe, yahi kamna hai.
Harihar Vaishnav

Kailash Sharma said...

एक सर्वांगीण साहित्यिक पत्रिका के रूप में 'उदंती' हमेशा आकर्षित करती रही है...हार्दिक शुभकामनायें!

Unknown said...

हार्दिक बधाई। उदन्ती की निरंतरता और साथ ही स्तरीयता प्रशंसा-योग्य है। निजी प्रयासों से निकलने वाली हिन्दी पत्रिकाओं के मामले में निरंतरता के साथ स्तरीयता बनाए रखने का योग दुर्लभ होता है। आपने आर्थिक माेर्चे पर जूझते हुए भी पत्रिका के मूल विचार को अक्षुण्ण रखा, इसके लिए बधाई की पात्र हैं। इस मौके पर पूरी टीम को बधाई और सहयोगी लेखकों-रचनाकारों का अभिनंदन।
- बालकृष्ण गुप्ता 'गुरु', खैरागढ़

Ashwini Kesharwani said...

उदंती को छ: साल पुरे होने पर हार्दिक बधाई। नित नए और समसामयिक विषयों पर पठनीय सामग्री देने से उदंती का हर अंक संग्रहणीय बना है। मुझे ख़ुशी है की मेरी रचनाएँ इसमें प्रकाशित हुई हैं। ऐसे पत्रिका के सतत प्रकाशन के लिए संपादक डाक्टर रत्ना वर्मा जी को ह्रदय से बधाई और शुभकामनायें।
प्रोफ़ेसर अश्विनी केशरवानी

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष