December 06, 2020

क्षणिकाएँ- स्मृतियाँ

- रश्मि शर्मा

जंगल में खिला है पलाश

स्मृतियाँ हैं तुम्हारी

है बैंजनी आकाश

और

सूखे पत्तों से घिरा मधुमास।

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स्मृतियों में है

कोई सुगन्ध, कुछ रंग

गुजऱ कर भी कहाँ

गुजरता है सब कुछ जीवन से..।

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स्मृतियों में बसी होती है

गोधूली बेला

और

गोधूली बेला में

स्मृतियों के सिवा कुछ नहीं बचता....। 

 

सम्पर्क: राँची, झारखंड

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