August 13, 2020

शक

शक
-नंदा पाण्डेय
 कहानी खत्म होते ही अचानक नीचेलेखक के नाम पर मदन की दृष्टि रुक गई।
ऐसा लगा मानो किसी ने ठंडे पानी के छीटें डालकर उसकी निंद्रा भंग कर दी हो। मन ही मन इस कहानी की लेखिका पर आलोचना- प्रत्यालोचना करता चला गया।
.....क्या यह सब सच है?
तो क्या! आज तक मैं भ्रमजाल में फँसा रहा?
यदि इसको सच मान लिया जाए तो इसमें तनिक भी संदेह नहीं कि, आज तक मैंने जितना भी जीवन इसके साथ जिया वह सब व्यर्थ था... एक धोखा था।
अपने ही उलझन में उलझा मदन,  बेमन से नाश्ता किेए बगैर ही दफ्तर के लिए निकल गया।
वहाँ भी मन ही मन में खुद से सवाल करता रहा... क्या कहूँगा निशा से... कैसे पूछूँगा,... 25 वर्षों का साथ है  हमारा...
नहीं ... नहीं पूछूँगा, ...पर उसका मन कह रहा था कि आज तो उसे सच का पता लगना ही चाहिए।
अंतर्द्वंद्व में घिरा मदन,अपने आपको सहज रखते हुए रात में खाने की मेज पर पूछ ही बैठा.....एक बात पूछूँ, निशासच बताना....
हाँ पूछो न ! अब क्या परमिशन लेकर पूछोगे....कहो न क्या पूछना है....
क्या तुम मुझे बता सकती हो निशाकि मुझसे पहले तुम्हारी जिंदगी में कौन था और किसकी प्रेरणा ने तुम्हें इतना प्रतिभाशाली लेखिका बना दिया?
मदनमेरा लेखन सही मायने में आज सार्थक हुआ।
इसी पल का तो बरसों से इंतजार था मुझे....यही तो चाहती थी मैं कि बस तुम पढ़ो मेरी लिखी कहानियाँ: पर तुमने हमेशा नज़रअंदाज किया मेरे लेखन को......
नम आँखों से निशा मदन से लिपट गई ।
लेखक के बारे में- स्वतंत्र लेखन, प्रकाशन- एकल कविता संग्रह ‘बस कह देना कि आऊंगा’ साहित्यिक पत्रिका- कादम्बिनीकथादेश, पाखी, आजकल, माटीविभोम-स्वर, आधुनिक-साहित्य, विश्वगाथा, ककसाड़, किस्सा-कोताहप्रणाम पर्यटनसृजन सरोकार, उड़ान (झारखंड विधान सभा की पत्रिका)हिंदी चेतना (कनाडा हिंदी प्रचारिणी सभा) में लगातार कविताएँ प्रकाशित।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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