January 15, 2020

कविता

1. इंतजार
- डॉ. सुषमा गुप्ता
यूँ तो इंतजार
एक छोटा-सा शब्द है
और याद
उससे भी छोटा
पर कभी कर के देखिएगा।
एक एक पल की गहराई
समंदर-सी हो जाती है।
हर एक आती-जाती
साँस पर्वत-सा थकाती है ।
और घड़ी की बढ़ती
सुइयों के साथ ......
नब्ज़ डूबती-सी जाती है।
जी हाँ ।
कभी करके देखिएगा।
ये वह बला है ...
जितना झटकोगे
उतना चिमटती जाती है।
चित भी अपनी ...
पट भी अपनी
विक्रमादित्य के वेताल-सी
सर पर चढ़ जाती है।
बस फिर और रस्ता
दिखाई नहीं देता ...
और आप की हालत
उस राही-सी
हो जाती है ।
जो बैठा तो है ठंडी
छाँव में प्यार की ।
घने बरगद के नीचे ...
पर दिल की आग
कतरा-कतरा कर
झुलसाती है
जलाती है
और लील ही जाती है।

2. तेरे हिस्से, मेरे हिस्से

मैं रख लेती हूँ
तुम्हारी यादों से
कुछ माँगे हुए किस्से
हिसाब फिर कभी कर लेंगें
इस रिश्ते में क्या आया
तेरे हिस्से
मेरे हिस्से ।
मैंने नाराजगी रख ली
तुम भी इल्जाम
कुछ रख लो
मुकम्मल हो गया रिश्ता
मगर इक साथ न आया
तेरे हिस्से
मेरे हिस्से ...
वो लम्हों की थी
जागीरें जो मिल-जुलकर
बनाई थी
हड़प गई ज़िन्दगी ऐसे
बचा कुछ भी न बाकी अब
तेरे हिस्से
मेरे हिस्से ।
टूटा तो ज़रूर है
कुछ मेरा वजूद
कुछ तेरा गुरूर भी
हिसाब फिर कभी कर लेंगें
किस के हुए ज्यादा
तेरे हिस्से या......
मेरे हिस्से ।

लेखक के बारे में - जन्म: 21 जुलाई 1976, दिल्ली, शिक्षा: एम कॉम (दिल्ली यूनिवर्सिटी) , एम बी ए (आई एम टी गाजियाबाद) , एल-एल बीपी-एच. डी., कार्य-अनुभव: कानून एवं मानव संस्थान की व्याख्याता-2007-2014 (आई एम टी गाजियाबाद), सम्मान: हिन्दी सागर सम्मान–2017, प्रकाशन: समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में कुछ रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं।, प्रकाश्य-साझा संग्रह (जे एम डी प्रकाशन) *नारी काव्य सागर,*भारत के श्रेष्ठ युवा रचनाकार, ई मेल: suumi@rediffmail. com


0 Comments:

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

-0-

लेखकों सेः उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष