November 19, 2017

विकास:

 तरक्की के नए रास्ते पर
 छत्तीसगढ़ के किसान
-स्वराज कुमार

सिर्फ सोलह साल के किशोर छत्तीसगढ़ राज्य के किसान अपनी मेहनत से आज तरक्की के नए रास्ते बनाकर समृद्धि और खुशहाली की नई मंजिलों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। राज्य में धान का उत्पादन सिर्फ दस साल के भीतर दोगुने से भी ज्यादा हो गया, वहीं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर राज्य में किसानों की आमदनी वर्ष 2022 तक दोगुनी करने के लिए भी मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने योजनाबद्ध रणनीति के साथ एक व्यापक रोड मैप बनाकर काम शुरू कर दिया है। खेती को अधिक से अधिक लाभदायक बनाने के लिए इसमें कृषि उत्पादन, रेशम उत्पादन, उद्यानिकी फसलों की खेती, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मछलीपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई उपाय और कई लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। रोड मैप में बाजार व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, कृषि वानिकी के तहत बांस और अन्य लघु वनोपजों के उत्पादन और विपणन तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए भी इसमें कई महत्वपूर्ण उपायों की घोषणा की गई है। खेती-किसानी की दशा और दिशा में लगातार एक सकारात्मक बदलाव आ रहा है। इससे छत्तीसगढ़ के किसान समृद्धि और खुशहाली के नए रास्ते पर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।
रमन सरकार ने विगत तेरह साल में प्रदेश के किसानों की बेहतरी के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। ब्याज मुक्त ऋण सुविधा, कृषक जीवन ज्योति योजना के तहत तीन हॉर्स पावर से पांच हार्स पावर तक सिंचाई पम्पों के लिए सलाना 6000 यूनिट से 7500 यूनिट तक मुफ्त बिजली, सौर सुजला योजना के तहत अत्यंत किफायती मूल्य पर सोलर सिंचाई पंप, विद्युत कनेक्शन वाले सिंचाई पंपों की संख्या 94 हजार से बढ़ाकर तीन लाख 70 हजार तक पहुंचाना, सिंचाई योजनाओं का विकास और विस्तार, समर्थन मूल्य नीति के तहत सहकारी समितियों में वर्ष 2003-04 से 2015-16 तक छह करोड़ 22 लाख मीटरिक टन धान की खरीदी और किसानों को लगभग 65 हजार करोड़ रुपये  का भुगतान, इनमें विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के अनुसार किसानों की समृद्धि उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। वर्ष 2007 की तुलना में 2016-17 में राज्य में एक करोड़ 20 लाख टन फसलों की पैदावार मिली है, जो वर्ष 2007 की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है। 
ब्याज मुक्त ऋण सुविधा से किसानों में नए उत्साह का संचार
किसानों की बेहतरी के लिए राज्य शासन द्वारा तैयार रोड मैप के अनुसार एकीकृत कार्ययोजना में किसानों के लिए ब्याज मुक्त अल्पकालीन कृषि ऋणों की वर्तमान राशि 3800 करोड़ रुपये  से बढ़ाकर पाँच वर्ष में 5772 करोड़ रुपये  तक ले जाने का लक्ष्य है। हमें इस बात को भी याद करना चाहिए कि राज्य-निर्माण के प्रारंभिक तीन वर्षो में किसानों को सहकारी बैंकों के जरिए से सहकारी समितियों में 13 से 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर ऋण मिलता था। डॉ. रमन सिंह की सरकार ने इन ब्याज दरों को वर्ष 2004-05 में 9 प्रतिशत, वर्ष 2006-07 में 7 प्रतिशत, वर्ष 2007-08 में 6 प्रतिशत, वर्ष 2008-09 में 9 प्रतिशत और 2012-13 में 1 प्रतिशत कर दिया। रमन सरकार ने किसानों के लिए ब्याज दर को वर्ष 2013-14 से शून्य प्रतिशत कर दिया। कृषि ऋणों की ब्याज दरों में भारी कमी होने और बाद में ब्याज मुक्त ऋण सुविधा मिलने पर किसानों में नए उत्साह का संचार हुआ है और सहकारी समितियों से ऋण लेने वाले किसानों की संख्या भी लगातार बढ़ने लगी है। वर्ष 2001-02 में जब यह ब्याज दर 13 से 15 प्रतिशत थी, उस समय सिर्फ तीन लाख 96 हजार किसानों ने इस सुविधा का लाभ लिया था, जबकि वर्ष 2012-13 में ब्याज दर एक प्रतिशत होने पर ऋण लेने वाले किसानों की संख्या बढ़कर 9 लाख 45 हजार से ज्यादा हो गई और आज की स्थिति दस लाख से अधिक किसानों को ब्याज मुक्त ऋण सुविधा का लाभ मिल रहा है।
रमन सरकार ने इस वर्ष एक हजार 333 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के जरिए खरीफ़ मौसम में 3200 करोड़ रुपये  और रबी मौसम में 600 करोड़ रुपये  का ब्याज मुक्त ऋण वितरण का लक्ष्य है। इस बार खरीफ में अब तक इस लक्ष्य के विरूद्ध 1500 करोड़ रुपये  से ज्यादा ऋण वितरित किया जा चुका है। यह राशि उन्हें 60 प्रतिशत वस्तु (खाद और बीज) तथा 40 प्रतिशत नगद के रूप में दी जा रही है। पिछले साल 2016 में खरीफ मौसम के दौरान किसानों को 2800 करोड़ रुपये  के लक्ष्य के विरुद्ध 2855 करोड़ 26 लाख रुपये  का ऋण दिया गया था। वर्तमान में ब्याज मुक्त ऋण सुविधा का लाभ ले रहे लगभग दस लाख से ज्यादा किसानों के अलावा समितियों में अगले पांच साल में कम से कम पांच लाख नए किसानों को भी सदस्य के रूप में जोड़ने का लक्ष्य है, जिन्हें नए किसान क्रेडिट कार्ड दिए जाएँगे। यह रोड मैप कृषि और जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा तैयार किया गया है। कृषि मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने अधिकारियों को इस रोड मैप के सभी प्रावधानों पर अमल के लिए तत्परता से कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं। श्री अग्रवाल ने समय-समय पर स्वयं इसकी विस्तृत समीक्षा भी कर रहे हैं।
किसानों के लिए अलग से कृषि बजट
छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जिसने वर्ष 2012-13 से राज्य के मुख्य बजट के साथ किसानों के लिए अलग से कृषि बजट की शुरूआत की है। उसमें कृषि और सम्बद्ध क्षेत्रों में किसानों की सुविधा के लिए छह हजार 244करोड़ रुपये  का प्रावधान किया गया था, जो वर्ष 2015-16 में बढ़कर 10 हजार 676 करोड़ रुपये  तक पहुंच गया। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2017-18 में भी राज्य सरकार ने कृषि बजट में दस हजार करोड़ रुपये  से ज्यादा राशि का प्रावधान किया है। इसमें सिंचाई सुविधाओं के लिए 5242 करोड़ रुपये , कृषि विकास योजनाओं के लिए 2279 करोड़ रुपये , पशुपालन के लिए 517 करोड़ रुपये , सहकारिता के लिए 298 करोड़ रुपये  और मछलीपालन के लिए 100 करोड़ रुपये  की धन राशि निर्धारित की गई है। इस वर्ष के कृषि बजट के अनुसार 32 लाख से ज्यादा किसानों के लिए प्रति किसान लगभग 28 हजार रुपये  का औसत बजट प्रावधान है।
प्रदेश को अब तक चार कृषि कर्मण पुरस्कार
राज्य को वर्ष 2011 से 2016 की अवधि में भारत सरकार की ओर से चार बार कृषि कर्मण पुरस्कारों से नवाजा गया है। इनमें से तीन कृषि कर्मण पुरस्कार सर्वाधिक चावल उत्पादन के लिए और एक पुरस्कार दलहन के क्षेत्र में दिया गया है। राज्य में विगत 12 साल में चावल उत्पादन में 39 प्रतिशत, गेहूँ के उत्पादन में 24 प्रतिशत और दलहन-तिलहन के उत्पादन में लगभग 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
खेती-किसानी की शिक्षा पर भी विशेष जोर
 प्रदेश की नयी पीढ़ी को आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए कृषि शिक्षा पर भी विशेष रूप से जोर दिया जा रहा है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर केे अंतर्गत वर्ष 2003-04 में जहाँ  सिर्फ चार सरकारी कृषि महाविद्यालय थे, वहीं इनकी संख्या वर्ष 2016-17 तक बढ़कर 12 हो गई । इस अवधि में शासकीय उद्यानिकी कॉलेजों की संख्या शून्य से बढ़कर दो और शासकीय कृषि इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या भी शून्य से बढ़कर दो हो गई । पशुधन खेती का मुख्य आधार हैं। इसे ध्यान में रखकर प्रदेश के युवाओं को पशुपालन और पशु चिकित्सा के क्षेत्र में उच्च शिक्षा की सुविधा दिलाने के लिए रमन सरकार द्वारा वर्ष 2012 में दुर्ग जिले के ग्राम अंजोरा में कामधेनु विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है, जिसका संचालन सफलतापूर्वक हो रहा है। खेती के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में 20 कृषि विज्ञान केन्द्र भी संचालित हो रहे हैं।
राज्य तीन जलवायु क्षेत्रों में सीमांकित
 किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए राज्य सरकार के रोड मैप में सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ प्रदेश को तीन अलग-अलग कृषि जलवायु क्षेत्रों में सीमांकित करते हुए स्थानीय जलवायु विविधता के अनुरूप फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की मंशा प्रकट की गई है। उत्तरी छत्तीसगढ़ पहाड़ी इलाकों में फैला हुआ है।  कृषि विशेषज्ञों के अनुसार वहाँ  की भौगोलिक परिस्थितियाँ  और शीतल जलवायु गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों के लिए काफी अनुकूल है। इसी तरह राजनांदगांव से मुंगेली तक काली मिट्टी वाले क्षेत्रों को रबी मौसम में चना और खरीफ मौसम में सोयाबीन उत्पादन क्षेत्र के रूप में चिह्नांकित किया गया। बस्तर और सरगुजा के सूदूरवर्ती इलाके परपंरागत रूप से जैविक खेती के लिए पहचाने जाते हैं। दंतेवाड़ा जिले में जैविक खेती के लिए शुरू की गई मोचोबाड़ीपरियोजना को अच्छी सफलता मिल रही है। राज्य में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की सर्वोत्तम व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और प्रशंसा मिली है। किसानों की आमदनी दोगुनी करने के रोड मैप में इन बातों को ध्यान में रखकर रणनीति तय की गई है। इसमें यह भी ध्यान रखा गया है कि राज्य में धान को छोड़कर अन्य फसलों के लिए पर्याप्त प्रसंस्करण उद्योगों की कमी है। दलहनी और तिलहनी फसलों के लिए समर्थन मूल्य पर उपार्जन की व्यवस्था को भी व्यापक बनाने की जरूरत है। प्रदेश के दो तिहाई से ज्यादा इलाकों में वर्षा आधारित खेती को भी रोड मैप में एक चुनौती के रूप में लेकर सिंचाई संसाधनों में वृद्धि पर भी जोर दिया गया है। रोड मैप में कहा गया है कि राज्य के प्रत्येक गांव के नजदीक से छोटे अथवा मँझोले बरसाती नाले गुजरे हैं, जो खेती के लिए वरदान साबित हो सकते हैं।
साढ़े तीन लाख से ज्यादा वन अधिकार
मान्यता पत्र धारकों को भी मिलेगा फायदा
अधिकारियों ने बताया कि राज्य में वन अधिकार मान्यता पत्र धारक तीन लाख 57 हजार से ज्यादा वनवासी परिवारों को तीन लाख 14 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्रों में खेती के लिए व्यक्तिगत पट्टे दिए गए हैं, वहीं आठ हजार 866 सामुदायिक पट्टे एक लाख 52 हजार हेक्टेयर रकबे में दिए गए हैं। वन अधिकार मान्यता पत्र धारक इन वनवासियों को खेती के लिए खाद और बीज, भूमि समतलीकरण तथा कृषि उपकरणों के लिए सहायता दी गई है। रोड मैप में उनकी आमदनी को भी दोगुनी करने के लिए विशेष प्रयासों पर बल दिया गया है और कहा गया है कि उन्हें उन्नत खेती से जोड़कर उद्यानिकी, कृषि वानिकी, पशुपालन और मुर्गीपालन योजनाओं का भी लाभ दिलाया जाएगा।
लगभग 37.46 लाख किसानों के खेतों में हो रहा मिट्टी परीक्षण
 राज्य के लगभग 37 लाख 46 हजार किसानों के खेतों में ग्रिड आधार पर मिट्टी परीक्षण भी किया जा रहा है। इस वर्ष 2017 तक सभी किसानों को मिट्टी स्वास्थ्य पत्रक (स्वायल हेल्थकार्ड) देने का अभियान भी चलाया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिट्टी परीक्षण कार्डो में की गई अनुशंसाओं के अनुसार खाद के उपयोग में दस प्रतिशत की बचत होगी और पैदावार में पाँच प्रतिशत की वृद्धि होगी।
कतार बोनी को बढ़ावा
रोड मैप में बताया गया है कि राज्य में वर्तमान में सिर्फ दो लाख 60 हजार हेक्टेयर में कतार बोनी से धान की बोआई की जाती है। अगले पांच साल में इसे पाँच लाख हेक्टेयर तक पहुँचाने के लिए विशेष अभियान चलाने का लक्ष्य है। इससे 60 हजार क्विंटल बीजों की बचत होगी। जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश के सभी बीस हजार गांवों में एक-एक चिमनी खाद गढ्ढों का निर्माण किया जाएगा। इससे लगभग दो लाख मीटरिक टन कम्पोस्ट खाद मिलेगी। जैविक खाद तैयार करने के लिए प्रदेश भर में ग्राम पंचायतों के स्तर पर पांच लाख वर्मी कम्पोस्ट टांके/नाडेप टांके बनवाए जाएँगे, जिनमें कम से कम 15 लाख मीट्रिक टन जैविक खाद का उत्पादन हो सकेगा। प्रदेश में इस समय खेतों की मेड़ों पर अरहर, तिल, अरण्डी और रामतिल जैसी फसलों का वर्तमान रकबा सिर्फ दो लाख 02 हजार हेक्टेयर है, जिसे अगले पांच साल में पांच लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य है।
करीब 3.60 लाख हेक्टेयर में होगी स्प्रिंकलर-ड्रिप सिंचाईरोड मैप के अनुसार अगले पांच साल में किसानों को लघु सिंचाई सुविधा देने के लिए तीन लाख 60 हजार हेक्टेयर में स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा देने का लक्ष्य है। किसानों को सरकारी अनुदान पर स्प्रिंकलर सेट दिए जाएँगे।
साढ़े चार लाख सिंचाई नलकूपों की होगी रिचार्जिंग
इसके अलावा राज्य में स्थापित चार लाख 50 हजार सिंचाई नलकूपों की रिर्चाजिंग पर भी इसमें जोर दिया गया है। इस उद्देश्य से बारिश के पानी को एकत्रित करने के लिए मनरेगा के तहत स्थानीय बरसाती नालों और छोटी नदियों में अगले पांच साल में दस हजार भूमिगत बंधारा बनवाए जाएँगे। इससे भूजल स्तर बढ़ेगा।
छोटे-बड़े नालों में हर एक किलोमीटर पर बनेगा चेकडेम
रोड मैप के अनुसार राज्य के छोटे-बड़े नालों में शृंखलाबद्ध तरीके से चेकडेम भी बनवाए जाएँगे। हर साल ऐसे नालों के किनारे 700 किलोमीटर की लंबाई में 700 से 725 चेकडेमों के निर्माण का लक्ष्य है। अर्थात हर एक किलोमीटर एक चेकडेम बनेगा। इनका निर्माण प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और राज्य पोषित योजना के जरिए किया जाएगा। जल संसाधन विभाग द्वारा राज्य में 495 एनीकट और स्टॉप डेम बनवाए गए हैं। अगले पाँच साल में इनके किनारों पर बिजली लाईन विस्तार करते हुए 44 हजार हेक्टेयर में उदवहन सिंचाई को बढ़ावा दिया जाएगा। शाकम्भरी योजना के तहत एक लाख दस हजार किसानों को सिंचाई पंप 75 प्रतिशत अनुदान पर देने का भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
बाजार व्यवस्था को मजबूत बनाने कई बड़े निर्णय
किसानों को फसलों का उचित मूल्य दिलाने के लिए राज्य सरकार के रोड मैप में कृषि विपणन व्यवस्था को मजबूत बनाने की दृष्टि से भी कई बड़े निर्णय लिए गए हैं। इसके अंतर्गत प्रदेश की चिन्हांकित 14 कृषि उपज मंडियों को राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ने, फल और सब्जी उपमंडियों की स्थापना, किसान उपभोक्ता बाजारों की स्थापना जैसे कई कदम उठाए जा रहे हैं। वनौषधियों और हर्बल प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जा रहा है। लाख कृमि पालन और लाख उत्पादन की दृष्टि से छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर है। वर्ष 2022 तक प्रदेश के 54 हजार से ज्यादा किसानों को लाख की खेती से जोड़ने का लक्ष्य है। इसकी खेती 12 लाख से अधिक कुसुम, पलाश और बेर के वृक्षों में की जाएगी। राज्य के वनो में 19 प्रतिशत बांस के जंगल हैं। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में 50 हजार नोशनल टन बांस का उत्पादन होता है, जबकि मांग 60 हजार नोशनल टन की है। रोड मैप में इसकी पूर्ति के लिए वनो के साथ-साथ किसानों की नीजि भूमि पर भी बांस रोपण को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य घोषित किया गया है। तेंदूपत्ता, साल बीज, हर्रा, महुआ, बहेड़ा, जैसी लघु वनोपजों के उत्पादन में वृद्धि करने के लिए भी रोड मैप में रणनीति तय की गई है।
लगभग 12 लाख हेक्टेयर तक पहुंचेगा उद्यानिकी फसलों का रकबा
 राज्य में उद्यानिकी फसलों का वर्तमान रकबा सात लाख 41 हजार हेक्टेयर है। इसे वर्ष 2021-22 तक बढ़ाकर 11 लाख 93 हजार हेक्टेयर तक पहुँचाने का लक्ष्य है। रणनीति में फलों की खेती को दो लाख 25 हजार हेक्टेयर से बढ़ाकर 6 लाख 62 हजार हेक्टेयर, सब्जियों की खेती को चार लाख 14 हेक्टेयर से बढ़ाकर चार लाख 14 हजार हेक्टेयर, मसालों की खेती को 51 हजार हेक्टेयर से बढ़ाकर एक लाख 46 हजार हेक्टेयर और फूलों की खेती को 11 हजार हेक्टेयर से बढ़ाकर 18 हजार हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। रोड मैप में उद्यानिकी किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और नर्सरियों के आधुनिकीकरण का भी लाभ दिलाने की रणनीति घोषित की गई है।

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