August 15, 2014

हाइकु

लहरों की ताल पे

डॉ. कुँवर दिनेश सिंह

1
ये अम्बरी है
नारी सावन नीर
कादम्बरी है।
2
धुँध हर सू
अपने ही ख्यालों में
गुमसुम भू।
3
बुंदियाँ झरें
समेटती जा रहीं
प्यासी लहरें।
4
सावन झरी
लहरों की ताल पे
बने घुमरी।
5
अल्हड़ बूँदें
रिमझिम ताल पे
नाचती बूँदें।
6
चाँदनी रात
ओस बना रही है
चाँदी के पात।
7
सावन तारी
बादलों से उलझी
धूप बेचारी।
8
नाचे सारंग
बादलों को कीलते
पंखों के रंग।
9
धँधेरी उठी
धरा के हृदय में
है धुकधुकी।
10
तनाव भंग
सूरज-मेघा सन्धि
वर्णाली रंग।
11
चीड़ों के बीच
पगडण्डी अकेली
लेती है खींच।
12
राह एकान्त
पथिक को जोहती
हुई अशान्त।
13
समता- भरी
आकाश की आँखें  हैं
ममता-भरी।
14
रंग बदले
आसमान रँगीला
ढंग बदले।
15
खड्ड में पानी
अश्मों से टकराता
गाए रागिनी।
16
सलिल जीता
सिल से जो भी भिड़ा
आया न जीता।
17
जल-प्रवाह
परकोटे में रूँधा
खोजता राह।
18
आती है पौन
दर को खटकाती
रहती मौन।
19
डगर सूनी
जी बहलाने आई
हवा बातूनी।
20
वन-अनल
चिल्लाते रहे वृथा
मृगों के दल।
21
चीड़ जलते
जंगल की आग में
चुप्प बलते।
22
किरने ढोएँ
थका -माँदा सूरज
पूछे न कोए।
23
मेघों का राग
भर रहा है देखो
पानी में आग।
24
पावस-रात
खेले आँख-मिचौली
जुगनू साथ।

लेखक के बारे में: डॉ. कुँवर दिनेश सिंह शिमला, हिमाचल प्रदेश के निवासी हैं। ये हिन्दी व अंग्रेज़ी के जाने माने कवि, कहानीकार, लेखक, आलोचक एवं अनुवादक हैं। अब तक इनके अंग्रेजी में 15 काव्य संग्रह, हिन्दी में 7 काव्य संग्रह एवं अंग्रेजी में 5 आलोचना ग्रन्थ प्रकाशित हो चुके हैं। इन्हें कई साहित्य सम्मान प्राप्त हैं। हिमाचल प्रदेश साहित्य अकादमी पुरस्कार से अलंकृत हो चुके हैं। सम्प्रति महाविद्यालय में अंग्रेजी भाषा एवं साहित्य के एसोसिएट प्रोफेसर के रुप में कार्यरत हैं।

सम्पर्क- संपादकः हाइफन, 3 सिसिल क्वार्टज़, चौड़ा मैदान, शिमला-171004, हि.प्र.,              मो. 09418626090, Email- kanwardineshsingh@gmail.com

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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