February 25, 2009

सकारात्मक पक्ष

सकारात्मक पक्ष
भाई जयराम दास जी ने जिम्मेदार मीडिया का गढ़ छत्तीसगढ़ नामक आलेख में राजधानी में पत्रकारिता के सकारात्मक पक्ष को बखूबी प्रस्तुत किया है। कई वर्ष नागपुर में पत्रकारिता करने के बाद जब मैं रायपुर आया था तो कई मुद्दों पर स्थानीय मीडिया से मेरा विरोध रहा। इसी क्रम में नक्सलवाद के मुद्दे पर भी मेरा पत्रकारिता का मन सदैव उद्वेलित रहा है।
मुझे अच्छी तरह याद है कि राजधानी के कुछ प्रमुख समाचार पत्र हर उस खबर को प्रमुखता देते थे जिसे अंग्रेजी में प्रो-नक्सली कहा जा सकता है। इस अफवाह युद्ध के साथ हम लोगों ने संघर्ष का बिगुल फूंका और कुछ ही दिनों में समूची मीडिया का स्वर बदल गया। उस समय ऐसा लगा था कि हर सही कार्य के लिए ईश्वर मदद करता है। खैर, सलवा जुडूम और नक्सलवाद के मुद्दे पर राजधानी की मीडिया जगत का न्यायपरक नजरिया वाकई काबिले- तारीफ है। अब यह बात अलग है कि इस मानसिक समर्थन के बाद सरकार इस समस्या के समूल उच्चाटन के लिए क्या कदम उठाती है।
-अंजीव पांडेय, रायपुर से
मीडिया का स्वरूप
सुरुचिपूर्ण पत्रिका
उदंती पांचवां अंक सुरुचिपूर्ण है। मृत्युंजय के चित्रों से सुसज्जित अंक ने पत्रिका को दर्शनीय भी बना दिया है। उदय प्रकाश से विनोद साव की बातचीत सारगर्भित है। शताब्दी वर्ष पर क्रांतिकारी महिला दुर्गा भाभी को याद करने व उनके बारे में जानकारी देने के लिए धन्यवाद। आज की पीढ़ी को हमारे देश के लिए कुर्बानी देने वालों के बारे में समय- समय पर बताते रहने की जरुरत है।
-रवीन्द्र शर्मा, दिल्ली से
हिमाचल में भी एलोरा
इतनी अच्छी पत्रिका प्रकाशित करने के लिए मैं आपको बधाई देना चाहती हूं। पत्रिका में अभियान के तहत गुस्सा कॉलम की शुरुआत से हम जैसे पाठकों को अपनी बात कहने का मौका मिलेगा। खुशियों का मेला, हिमचल में एलोरा... पर लेख जानकारी प्रधान है। पढ़ कर वहां जाने की इच्छा बलवती हो गई। मीडिया का गढ़ छत्तीसगढ़ ने बहुत कुछ सोचने को मजबूर कर दिया। वाकई, आज मीडिया की परिभाषा बदल गई है। पर्यावरण, समाज, और पुरातन पर पठनीय सामग्री दी गई है।
-रचना कश्यप, इंदौर से
वृक्ष में देवत्व
उदंती का दिसंबर अंक पठनीय था। यूं तो सभी लेख व रचनाएं अच्छी लगीं पर हमारे लोक देवता वृक्ष के माध्यम से हमारे देश में वृक्षों में देवत्व की अवधारणा और उसकी पूजा परंपरा को उदाहरण सहित बताया गया है। आज की पीढी को समझना होगा कि हमारे पर्यावरण में वृक्ष क्यों महत्वपूर्ण है। लेखक को बधाई।
-सुशांत, नागपुर से

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