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Jan 15, 2020

माँ स्वरात्मिके

1. चोका
माँ स्वरात्मिके
-ज्योत्स्ना प्रदीप

माँ स्वरात्मिके !
हे बोधस्वरूपिणी !
तेरा ही नाद ,
बिन्दु से ब्रह्माण्ड में।
पाता आह्लाद,
कण भी संगीत से ,
सुर- ताल को -
बाँधतीं हो गीत से।
अधिष्ठात्री हो
विद्या ,ज्ञान बुद्धि की
आत्म -शुद्धि की ,
तुम ही माँ धात्री हो।
ढाल देती हो
शोक को भी श्लोक में ,
तेरे ही स्वर
गूँजें हर लोक में।
ये उपनिषद्  ,
वेद और पुराण
तेरी ही गति
तेरे ही देह -प्राण।
करो उच्छेद
सम्पूर्ण अज्ञान का
रहे न भेद
जाति ,धर्म नाम का
हे महावाणी !
जग कुटुम्ब बने
ऐसा वर दो
पुण्य -ज्योति भर दो ,
रवि - मन कर दो ।

2. माहिया
कुछ ऐसे नाते हैं

1
यूँ न कभी रोना है
देखो शबनम को
काँटे भी धोना है ।
2
अब बहुत हुआ सहना
नभ पर चमकेगी
बेटी घर का गहना ।
3
सहने का काम नहीं
बनना क्यों सीता
मिलते जब राम नहीं ।
4
कुछ ऐसे नातें हैं
कितनी दूरी हो
मन में बस जातें हैं ।
5
बिन जाने  प्यार किया
बिन देखे पौधा
जड़ नें संसार जिया ।
6
होठों को भान नहीं
कितने दिन बीते
इन पर नव -गान नहीं ।
7
उसने कुछ छीला है
नम ये आँखें हैं
मन  में कुछ गीला है ।
8
आँखों का दोष  यहीं
आँसू छलकाएँ
पीड़ा का कोष यही ।
9
नारी के साथी गम
राधा या  सीता
या हो चाहे मरियम।
10
नारी  जग का मोती
उतरी धरती पर
दुख-शय्या पर सोती ।
11
जीवन में हास नहीं
कौन पथिक ऐसा
जिसको ये प्यास नहीं ।
12
न कभी जो हारी है
पीड़ा की मूरत
केवल वो नारी है ।

सम्पर्कः प्रदीप कुमार शर्मा (CRPF), मकान 32, गली न – 9, न्यू गुरुनानक नगर , गुलाब देवी हॉस्पिटल रोड, जालंधर -पंजाब-144013

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