July 10, 2020

अब तो घर लौटना है

अब तो घर लौटना है

- शशि पाधा

न छत बची न छप्परी
घोर विपदा की घड़ी
मीलों तक दौड़ना है
अब तो घर लौटना है ।

बहुत दूर मंजिलें
राहें  सुनसान है 
धूप के दंश हैं
देह परेशान है
फिर भी कुछ सुकून है
कि घर को लौटना है ।

अंग अंग भेदती
भूख की बर्छिया
रीत गई बूँद- बूँद
हाँडियाँ कल्छियाँ

बचा न तेल नून अब
अब तो घर लौटना है।

रोक न सकें हमें
पैर की बिवाइयाँ
आस  देह घसीटती
काँपती परछाइयाँ

अभी तो गर्म खून है
चलो तो, घर लौटना है

पता नहीं गाँव में
द्वार कोई खोलेगा
या बंद किवाड़ से
हाथ कोई जोड़ेगा
वहाँ का क्या क़ानून है
फिर भी घर लौटना है।
हमें तो घर लौटना है।

6 Comments:

शिवजी श्रीवास्तव said...

कोरोना के कारण अपने येन केन प्रकारेण घर लौटने का विचार ही मजदूरों को ऊर्जा देता रहा,फिर भी पीड़ा एवम द्वंद्व स्वाभाविक है,इसी मनःस्थिति को चित्रित करता प्रभावी गीत।बधाई शशि पाधा जज

Shashi Padha said...

आभार शिव जी | बहुत कष्ट हो रहा था उनकी असहाय स्थिति देख कर | और यह भी मन में था कि गाँव में स्वागत होगा कि नहीं | बस यही भाव हैं इस रचना में |

प्रीति अग्रवाल said...

बहुत मर्मस्पर्शी और भावपूर्ण रचना, आपको बधाई शशि जी!💐

Sudershan Ratnakar said...

मज़दूरों के घर लौटने के जज़्बे का भावपूर्ण ,मर्मस्पर्शी चित्रण करती सुंदर कविता।

प्रगति गुप्ता said...
This comment has been removed by the author.
प्रगति गुप्ता said...

मार्मिक भावों का चित्रण करता हुआ सृजन 👍

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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