May 14, 2020

लघुकथा

धुँधली-सी तस्वीर
पवन शर्मा  
‘‘लो, चाय पीयो।“चाय लाते हुए मैंने कहा।
‘‘अरे!...मैं बना देती।आपने क्यों तकलीफ की।“वह चाय का कप हाथ में लेते हुए बोली।
बमुश्किल इक्कीस-बाईस की उम्र होगी उसकी। अभी-अभी बी.एस-सी. पास करके एम.एस-सी. में दाखिला लिया हैं। पढ़ाई के नाम पर पूछने के लिए आती रहती है। पर मैं उसकी आँखों में एक चमक महसूस करता हूँ, जब तक वो यहाँ रहती है।
‘‘जानते हैं आप...“ चाय पीते हुए वह बोली।
‘‘क्या?“
‘‘जीवन में मैं भी कुछ बनना चाहती हूँ...कुछ करना चाहती हूँ।“
‘‘बिलकुल... बनना है...कुछ करना है।“
वह चुप रही, पर थोड़ी देर बाद बोली, उसकी आँखों में वही चमक थी ‘‘आप साथ दोगे, तब।“
उसकी बात सुनकर मैं मुस्कराया, ‘‘दे तो रहा हूँ। रोज तुम्हें नोट्स लाकर देता हूँ।“
मैं जानता हूँ कि इन्हीं नोट्स को लेने वह रोज आती है... घंटों बैठी रहती है... वो अपना काम करती है और मैं अपना... काम करते-करते वह तिरछी निगाहों से मुझे देख लेती है...
‘‘एम.एस-सी. अच्छे नम्बरों से पास करो, फिर सिविल सर्विसेज की तैयारी करो... निकल जाओगी।“मैंने कहा। चाय का आखिरी घूँट भरा और चाय का कप टेबिल पर रख दिया।
‘‘आप साथ दोगे तब न!“कहती हुई वह खिलखिलाकर हँस पड़ी।
‘‘दे तो रहा हूँ।“ उसकी हँसी में मैं भी शामिल हो गया।
बाहर चाँदनी बिखर गई।
‘‘आपके सिर के बाल सफेद होने लगे हैं!“उसकी आँखों में फिर वही चमक उभर आई।
‘‘चालीस की उम्र भी तो हो गई है। बाल तो सफेद होंगे ही।“ कहता हुआ मैं हँसा।
‘‘... पर अच्छे लगते हैं!“उसके होंठ फड़फड़ाये।
वह कुछ और कहना चाह रही थी, पर कह न पाई... नोट्स उठाये और चली गई।
मैं बैठा रहा... उसकी चमक को अपने भीतर महसूस करने लगा... वर्षों पूर्व एक धुँधली-धुँधली तस्वीर मेरी आँखों में तैरने लगी...

सम्पर्कः विद्या भवन, सुकरी चर्चजुन्नारदेव,जिला- छिन्दवाड़ा (म.प्र.)

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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