March 24, 2018

प्रेरक

शतरंज और दोस्ती
मैं कभी-कभार शतरंज खेल लेता हूँ। पत्नी के साथ, और कभी-कभी जीत भी जाता हूँ।
शतरंज को केंद्र में रखकर रचे गए किस्से-कहानियाँ और रणनीतियों के बारे में पढऩा मुझे अच्छा लगता है। कई महान और प्रसिद्ध फिल्मों में शतरंज की बिसात के इर्द-गिर्द बहुत रोचक सीन्स क्रिएट किए गए हैं। शतरंज के बारे में मेरा पसंदीदा किस्सा भूतपूर्व विश्व चैंपियन बोरिस स्पास्की (Boris Spassky) और बॉबी फ़िशर (Bobby Fischer) से संबंधित है। वर्ष 2014 में आई फिल्म पॉन सैक्रिफ़ाइस (Pawn Sacrifice) इन दोनों के बीच 1972 में हुए प्रसिद्ध मैच पर केंद्रित थी। यह इतिहास का सबसे प्रसिद्ध शतरंज मैच था जिसे सोवियत बौद्धिक श्रेष्ठता को अमेरिकी चुनौती मिलने के कारण असंख्य लोगों ने देखा था।
अधिकांश लोग जानते हैं कि बॉबी फ़िशर ने वह मैच जीत लिया था और जीतने के बाद वह बहुत-बहुत वर्षों के लिए दृष्टि से ओझल हो गया था। 1992 में वह स्पास्की के साथ प्रतिबंधित देश सर्बिया में एक अनऑफीशियल मैच खेलने के लिए सामने आया। फ़िशर की इस हरकत के लिए अमेरिकी सरकार ने उसके पीछे खुफ़िया विभाग को लगा दिया था।
फ़िशर के साथ जो कुछ हुआ उसे पढक़र उसपर तरस आता है लेकिन मैं उसकी और स्पास्की की अद्वितीय प्रतिद्वंदिता के कारण उसका बहुत सम्मान करता हूँ। इनकी कहानी का मेरा पसंदीदा भाग वह है जब स्पास्की ने वर्ष 2004 में जापान में फ़िशर की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया दी। स्पास्की ने राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को लिखा कि वे फ़िशर को माफ़ कर दें।
 पूरा पत्र यह रहा-
मैं जानता हूँ क देश का कानून अपनी जगह पर है, लेकिन फ़िशर का प्रकरण सामान्य नहीं है। मैं और बॉबी 1960 से ही दोस्त हैं जब हमने मार-डेल-प्लाज़ा में शतरंज खेला और पहले और दूसरे स्थान पर रहे। बॉबी का व्यक्तित्व त्रासदीपूर्ण है। मैं यह इतने वर्षों बाद समझ पाया हूँ। वह ईमानदार और भले दिल वाला व्यक्ति है। वह बिल्कुल भी सोशल नहीं है। वह हम लोगों के तौर-तरीकों से ज़िन्दगी बिताने में सक्षम नहीं है। वह न्यायप्रिय है और किसी भी परिस्थिति में स्वयं से या उसके आसपास स्थित लोगों से समझौते नहीं करता। वह उस प्रकार के व्यक्तियों में है जो अपनी पूरी ज़िन्दगी खुद से ही लड़ते हुए बिता देते हैं।
मैं यहाँ उसकी किन्हीं हरकतों तो जायका नहीं ठहरा रहा और उसका बचाव नहीं कर रहा हूँ। वह जैसा है, सो है। मैं बस यही चाहता हूँ कि उसके प्रति उदारता बरती जाए, उसे क्षमा कर दिया जाए।
यदि ऐसा करना किन्ही कारणों से संभव न हो तो मैं चाहूँगा कि आप कृपया राष्ट्रपति फ्रांस्वा मितरां द्वारा 1992 में की गई गलती को सुधार दीजिए। बॉबी और मैंने एक ही प्रकार का अपराध किया था। उस मैच में भाग लेने की मुझे भी उतनी ही सज़ा मिलनी चाहिए।
मुझे गिरफ्तार कीजिए। और मुझे बॉबी फ़िशर के साथ ही उसकी कोठरी में बंद कर दीजिए। और हमें शतरंज का एक सेट भी दे दीजिए।
बोरिस स्पास्की
दसवां शतरंज विश्व चैंपियन
08- 07- 2004
इस पत्र को पढऩे के बाद क्या यह यकीन होता है कि इसे लिखनेवाला भूतपूर्व विश्व चैंपियन व्यक्ति अपने खेल कैरियर की चोटी पर बॉबी फ़िशर से हार गया था? यह किस्सा हमें यह सीख देता है कि हमें अपने प्रतिद्वंदी के प्रति किस प्रकार का सम्मान भाव अपने मन में रखना चाहिए। (हिन्दी ज़ेन से)

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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