March 24, 2018

लघुकथा

सीख - नीतू शर्मा
 -नमस्ते सपना जी, कैसी हैं आप।
-ओ हो रमा बहन आप... आइए आइए
-अब आपके तो दर्शन ही दुर्लभ हो गए है तो सोचा हम ही जाकर मिल आते हैं।
-ये तो आपने बहुत अच्छा किया रमा बहन।
-बहू के राज में कैसी कट रहीं हैं।
-अरे क्या बताए जब से आई है जीना मुश्किल कर रखा है, अब तो बेटा भी मेरा नहीं रहा, जानें क्या घोंटकर पिलाती है ऐसा, जो उसीकी जुबान बोलता हैं।
रमा आश्चर्य से- ऐसा क्या हो गया ?
-क्या बताएँ अब आपको। बस सबका खाना बनाकर ऑफिस चली जाती हैं, ना बर्तन साफ करती है ना हमारे किसी के कपड़े धोती हैं।
रमा- आजकल की बहुओं को काम का तो नाम ही नहीं सुहाता। पता नहीं माँ के घर से कुछ सीखकर भी नहीं आती।
-हाँ सही कहा रमा। अच्छा चलो ये बताओ अपनी पूजा कैसी है, कैसा चल रहा है उसका ससुराल में जीवन। 
-हमारी पूजा तो बहुत अच्छी है ससुराल में। दामाद जी तो हैदराबाद में नौकरी करते हैं। पूजा की सरकारी नौकरी है तो वो यहीं रहती है सास-ससुर के साथ। 
रमा- चलो ये तो अच्छा है छोटा परिवार हैं।
सपना- हाँ, मैंने तो पूजा को समझा दिया कि नौकरी और घर का काम दोनों एक साथ कैसे करोगी। जब दामाद जी आ जाएँ तब अपना किचन अलग कर लेना, जिससे खुद का ही खाना बनाना पड़ें। वरना सबके कपड़े, बर्तन और ऊपर से नौकरी सारे काम एक साथ थोड़ी- ना होते हैं।
रमा- हाँ सही बात कही एकदम, फिर सास भी तो है सारा दिन घर में ही तो रहती है, कुछ काम वो भी कर ही सकती हैं। जरूरी है क्या सारा काम बहू ही करे।
सपना-चिंता की कोई बात नहीं, अपनी पूजा को अच्छे से सिखाया है मैने घर चलाना।
सम्पर्क: 1916, खेजड़ो का रास्ता, चांदपोल, जयपुर, 919694546875,

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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