March 24, 2018

शून्यता

शून्यता
 - संगीता कुमारी

शून्यता हमें जीने नहीं देती
सुंदर राह की चाह
संतोष करने नहीं देती
शून्य से पहले भी था जीवन
शून्य के बाद भी है जीवन
अस्थिरता शून्य को समझने नहीं देती
आकांक्षाओं से भरा है यह जीवन
इच्छाओं का विशाल दामन
चाह को घटने नहीं देती
सीढिय़ाँ चढ़ते रहे हैं ना जाने कितने
आकाश की ऊँचाइयों की है महानता
सीढ़ी चढ़ने की चाह घटने नहीं देती
पल की घट में
घट रहा है यह जीवन
जीवन की घट कम नहीं होती
कहाँ तक बढ़ेंगे? कब रुकेंगे?
यह चढ़ने रुकने की गति
क्यों नहीं रुकती?
शून्यता हमें जीने नहीं देती
सुंदर राह की चाह
संतोष करने नहीं देती।

लेखक के बारे में: काव्य संग्रह- ह्रदय के झरोखे (यश पब्लिकेशन दिल्ली, शाहादरा)कहानी संग्रह- अंतराल (हिंदी साहित्य निकेतन, बिजनौर उत्तर प्रदेश), काव्य संग्रह... संगीता की कविताएँ (विंध्य न्यूज़ नेटवर्क, लखनऊ) सम्पर्क:  सी-72/4 नरोरा एटॉमिक पावर स्टेशन, टाउन शिप, नरोरा, बुलंदशहर उत्तर प्रदेश, पिन- 203389, मो. 08954590566/ 9457017582

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