July 18, 2016

तीन कविताएँ


 - अनुपमा त्रिपाठी
1 छाया है अब बसंत
मन ने उमंग भरी, तूलिका ने भरे रंग,
कोयलिया कूक रही, बाजे है मन मृदंग !!




फूलों की चिटकन है, रंगों की छिटकन है,
भँवरे की गुंजन है, छाया जो रंजन है !!

धूप में निखार आया रंग की बहार छाई ,
अमुआ की मंजरिया देखो कैसी बौराई !!
 
पीत वसना धरती है, धाती जो पीत वसन ,
धरती से अम्बर तक आया है अब बसंत !!

कंचन -सी धूप खिली छाया है अब बसंत !!
सतरंगी चूनर, लहराया है अब बसंत

 राग है बहार संग मनवा है यूँ मगन !
छेड़ो अब तान कोई ,लागी कैसी लगन,

प्रकृति में बिखरा चहुँ ओर उन्माद है ,
हरस रही सरसों है प्रीति का आह्लाद है,

रंग है बहार है रूप का शृंगार है ,
खिलती हुई कलियों पर आया जो निखार है...!!

सतरंगी...पुष्पों  पर छाया है अब बसंत
मदमाती सुरभि लहराया  है अब बसंत...!!

रोम रोम पुलकित, मदमाया है अब बसंत
छाया है अब बसंत!! छाया है अब बसंत...!!

2 मणि -सी कविता ...!!

किसलय का डोलता अंचल ,
नदी पर गहरी स्थिर लहरें चंचल
झींगुर का रुनक- झुनक- सा नाद ...
करता  हैं कैसा संवाद
पग  धरती विभावरी ,
धरती श्यामल आशा -भरी,
कोलाहल से दूर का कलरव ,
मन शांत प्रशांत नीरव
अनृत से प्रस्थान करते ,
नीड़ की ओर उड़ते पखेरू ,
मणिकार की मणि- सा ...
स्निग्द्ध धवल मार्ग दर्शाता विधु
शब्द बुनते भाव इस तरह
फिर लरजती लाजवन्ती ज्यों ,
उतरती है मन में.
जैसे...,
कोई मणि -सी कविता ...!!
3 अभिनन्दन
नीलम नभ से ,
किरणों की पावस सरिता  ,
दिक् उज्ज्वल,
विचरण करती
अम्बर से धरणी तक,
नव छंदों में,
झर झर झर झर
स्वर्णिम अनिमेष अनश्वर
अंजुरी से शब्दों की ,
अभिनव,
चपल दिवस का नंदन ,
नव संवत्सर अभिनन्दन ,
मैं करती
नूतन भावों से
निज चेतन संवेदन ...!! 

mo. 09350210808, tripathi_anupama@yahoo.com

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही साथी समाज सेवी संस्थाद्वारा संचालित स्कूलसाथी राऊंड टेबल गुरूकुल में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है।
शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से साथी राऊंड टेबल गुरूकुलके बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है।
अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर,तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में),क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर,पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर,जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ।
सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी,रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबाइल नं.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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