March 15, 2016

प्रेरक

अपनी खुशी

एक सेमिनार में लगभग 50 व्यक्ति भाग ले रहे थे। सहसा वक्ता ने लोगों से एकग्रुप-एक्टिविटी में भाग लेने के लिए कहा। उसने हर व्यक्ति को एक गुब्बारा दे दिया और मार्कर पेन से उसपर व्यक्ति का नाम लिखने के लिए कहा। फिर सारे गुब्बारे एकत्र करके दूसरे कमरे में रख दिए गए।
फिर वक्ता ने सभी को कमरे में जाकर दो मिनट के भीतर अपना नाम लिखा गुब्बारा खोजकर लाने के लिए कहा। यह सुनते ही सभी लोग एक दूसरे में गुत्थमगुत्था होकर अपना गुब्बारा खोज लाने के लिए दौड़ पड़े। उस कमरे में घोर अव्यवस्था फैल गई। वे सभी एक-दूसरे से टकरा रहे थे, एक-दूसरे के ऊपर गिर रहे थे।
किसी भी व्यक्ति को दो मिनटों के भीतर अपना नाम लिखा गुब्बारा नहीं मिला।
फिर वक्ता ने उनसे कहा कि वे एक-एक करके कमरे में जाएँ और कोई भी एक गुब्बारा उठाकर ले आएँ और उसे उस व्यक्ति को दे दें जिसका नाम गुब्बारे पर लिखा हो। ऐसा करने पर दो मिनटों के भीतर हर व्यक्ति को उसका नाम लिखा गुब्बारा मिल गया।
वक्ता ने कहा, जीवन में भी यही नज़र आता है कि लोग पागलों की तरह अपने इर्द-गिर्द खुशियों की तलाश कर रहे हैं लेकिन वह उन्हें नहीं मिल रही। असल में दूसरों की खुशी में ही हमारी खुशी है। आप उन्हें उनकी खुशियाँ सौंप दें, फिर आपको अपनी खुशी मिल जाएगी। 

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