August 15, 2014

दो लघुकथाएँ

दूध दान

मुरलीधर वैष्णव

वह सपत्नी बृजदर्शन के लिए आया हुआ था। गोवर्धन पर्वत पर दान एवं दूध चढ़ाने का उसकी पत्नी का संकल्प उसे जो पूरा करना था। इसके लिए उसकी पत्नी ने पाई-पाई बचाकर इंक्यावन सौ रुपये जमा कर रखे थे।
वृन्दावन के एक यात्री निवास में ठहरने के बाद दूसरे दिन सुबह उन्हें गोवर्धन जाना था। यात्री निवास का बिल चुकाने के लिए वह मैनेजर के कक्ष में गया तो पता चला कि पिछवाड़े चौकीदार के कमरे पर कोई झगड़ा हो रहा है, उसी सिलसिले में मैनेजर वहाँ गया हुआ है। वह भी उधर ही चला गया। वहाँ उसने देखा कि एक मिनी- बस खड़ी थी जिसका फ्रन्ट ग्लास टूटा हुआ था। बस चालक ने चौकीदार की गिरहबाँ पकड़ रखी थी और उससे गाली गलौच कर रहा था। मैनेजर ने उसे बतलाया कि चौकीदार के बच्चे द्वारा पत्थर फेंकने से मिनी बस का फ्रन्ट-ग्लास टूट गया है और बस चालक उससे इस नुकसान के पाँच हजार रुपये वसूलने पर आमादा है।
पन्द्रह सौ रुपये महिना तो इसे पगार मिलती है। तीन बच्चे और इसकी बीमार औरत है। यह गरीब आदमी अब कहाँ से लाएगा पाँच हजार रुपये! मैनेजर चालक से बोला।
तो मैं क्या करू  साब! बस मालिक तो मेरी तनख्वाह से काट लेगा न यह रकम। मेरे भी बाल बच्चे हैं। मेरे साथ भी तो गरीब मार हो रही है साब! चालक गुस्से के साथ रूआँसा भी हो रहा था।
चौकीदार की बिमार बीबी और तीनों बच्चें डरे दूबके एक तरफ  खड़े थे।
यह सब नजारा देख वह करूणा से भर गया। उसे लगा, दुर्भाग्य चौकीदार और चालक दोनों के बच्चों के मुँह से दूध छीन रहा है। उसने अपनी पत्नी की ओर अर्थपूर्ण दृष्टि से देखा। पत्नी ने भी बात समझते हुए आँखों ही आँखों में अपनी सहमति दे दी।
वह मैनेजर तथा चालक को एक तरफ  ले गया। उसने तत्काल मैनेजर को अपना बिल चुकाया और दूधदान के लिए बचाए इक्यावन सौ रुपयों में से पाँच हजार रुपये चालक की हथेली पर रख कर वहाँ से चल दिया।


कुत्ता और कातिल

एम.ए. दर्शन शास्त्र का छात्र कुमार आज अपने कॉलेज की पिकनिक में जा रहा था। उसे चेतक सर्कल से बस पकडऩी थी। फरवरी की उस सुहावनी सुबह में कुमार के मस्ती भरे कदम सड़क के पास खदान में पड़े एक नवजात शिशु को रोते देखकर अचानक ठिठक पड़े। क्षीणकाय शिशु का रुदन भी क्षीण ही था। उसने सोचा, क्या करें। उधर घड़ी की टिकटिक बतला रही थी कि बस छूटने में केवल दस मिनट ही शेष हैं। बच्चे को उठाकर वह पुलिस में ले जाएगा। और कहीं रास्ते में ही बच्चा.....
पुलिस तो फिर पुलिस है। बीसियों सवालों के जवाब देने होंगे। पिकनिक का सारा मूड खराब हो जाएगा। उसने पीछे मुड़कर देखा, एक वृद्ध शायद प्रात: भ्रमण से उधर ही लौट रहा था। उसने सोचा, अपनी पिकनिक की चिन्ता करनी चाहिए। बच्चे की चिंता पीछे आ रहा वृद्ध कर लेगा। आखिर इन बुजुर्गों के पास काम ही क्या है?
एक बार उसने पीछे आ रहे वृद्ध को पुन: देखा। आश्वस्त हो जाने पर कि वह उस ओर ही आ रहा है, कुमार के कदम चेतक सर्कल की ओर तेजी से बढ़ गए ।
दूसरे दिन अखबार में यह खबर पढ़कर उसका दिल धक-से रह गया कि चेतक रोड के पास एक नवजात शिशु का क्षत-विक्षत शव मिला। कुत्ते ने उसका करीब आधा शरीर खा लिया था।
उसके दर्शन शास्त्र ने तर्क दिया- चिंता व्यर्थ है, चिंता अज्ञान है, सब कुछ नश्वर है यहाँ, लेकिन तभी ग्लानि और क्षोभ ने उसे तमाचा मारा- जिसने उस शिशु को मारा वह कुत्ता तू है और कातिल भी!

सम्पर्क:  'गोकुल’ ए-77, रामेश्वर नगर, बासनी, प्रथम फेज, जोधपुर

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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