February 21, 2013

दो ग़ज़लें



- गिरीश पंकज
दस व्यंग्य संग्रह और पांच उपन्यासों के लेखक गिरीश पंकज वैसे तो मूलत: व्यंग्यकार के रूप में ही पहचाने जाते हैं लेकिन बहुत कम लोग इस तथ्य से परिचित हैं कि वे ग़ज़लें भी कहते हैं। गत वर्ष उनका दूसरा ग़ज़ल संग्रह यादों में रहता है कोई प्रकाशित हुआ है-
ढाई आखर
1
प्यार की भाषा रहे मनुहार की भाषा,
सच कहें तो है यही संसार की भाषा।

नफ़रतों के वार से दुनिया नहीं बचनी,
चाहिए हमको सदा इक प्यार की भाषा।

जीतने का हौसला लेकर चले हैं हम,
व्यर्थ क्यों बोलें हमेशा हार की भाषा।

प्यार से जिनसे मिलो निकले सयाने वे,
हमसे ही कहने लगे व्यापार की भाषा।

प्यार में इनकार तो पहला कदम-सा है,
बाद में हो जाए वो इकरार की भाषा।

जोड़ दे गर दो दिलों को है सही अलफ़ाज़,
तोड़ दे रिश्ते तो है बेकार की भाषा।

तोड़कर के जो सभी सीमाएँ बढ़ती हैं,
दरअसल है प्यार ही व्यवहार की भाषा।

ग्रंथ कितने ही पढ़े हैं ,डिगरियाँ पाईं,
ढाई आखर में छिपी थी सार की भाषा।

हमको आखिर क्यों मिले सम्मान सरकारी,
बोलता 'पंकजकहाँ सरकार की भाषा।
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प्यार ही जीतेगा
2
हमको वह विश्वास जिताया करता है,
अक्सर जो भीतर से आया करता है।

पत्थर की मूरत तो पत्थर है बिलकुल,
ईश्वर का अहसास बचाया करता है।

मैंने दोनों से यारी अब कर ली है,
दु:ख आता है, सुख भी आया करता है।

जख्म मिले हैं अपनों से मिलते ही हैं,
वक्त हमारे घाव मिटाया करता है।

अहसानों से दबा हुआ है बेचारा,
उफ़ वो कितने बोझ उठाया करता है।

उन पर ज्यादा यकीं नहीं करना अच्छा,
हमको हर सपना भरमाया करता है।

वह मेरा दुश्मन है लेकिन प्यारा है,
मेरे ही गीतों का गाया करता है।

इक दिन इस दुनिया में प्यार ही जीतेगा,
रोज़ मुझे यह स्वप्न लुभाया करता है।

 'पंकजइक राजा है अपनी दुनिया का,
सद्भावों को रोज लुटाया करता है।
संपर्क: 26, सेकेंड फ्लोर, एकात्म परिसर, रायपुर (छ.ग.) 492001, मोबाइल- 9425212720, E-mail: girishpankaj1@gmail.com

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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