June 19, 2012

ब्लॉग बुलेटिन से


उदंती में हमने जो नयी श्रृंखला की शुरूआत की है उसके अंतर्गत निरंतर हम किसी एक ब्लॉग के बारे में आपको जानकारी दे रहे हैं। इस 'एकल ब्लॉग चर्चा' में ब्लॉग की शुरुआत से लेकर अब तक की सभी पोस्टों के आधार पर उस ब्लॉग और ब्लॉगर का परिचय रश्मि प्रभा जी अपने ही अंदाज दे रही हैं। आशा है आपको हमारा यह प्रयास पसंद आएगा। तो आज मिलिए... रचना जी के ब्लॉग पोयम्स से।                     - संपादक

एहसासों के हर कतरे संजोती

भावों की अभिव्यक्ति कविता कहलाती है.... यह कहना है रचना जी का। ब्लॉग तो यूँ कई हैं, पर मैंने भावों की गगरी उठाई है, जिसमें सृष्टि में बसी सारी खुशबू है- mypoemsmyemotions.blogspot.com मुझे इस ब्लॉग से दूर रहने का दु:ख है, क्योंकि मैं ब्लॉगों की परिक्रमा करती हूँ, दिल से जीए एहसासों के हर कतरे संजोती हूँ और एहसासों के शानदार रंगमंच पर आपके आगे रख देती हूँ।
10 जनवरी 2006 से रचना जी ने पश्मीने की तरह अपने ख्यालों को बुना है। एक बुनकर ही जानता है बुनने की कला। कविता हो या कहानी, गीत या गजल...जीकर ही तराशे जा सकते हैं और यह ब्लॉग तराशा हुआ है।  इसे पढ़ते हुए मैंने जाना और माना कि आग के अन्दर समंदर है- डुबकी लगाओ, जलोगे नहीं, बल्कि मोती पाओगे।
याद है आपको मुगलेआजम? संगतराश ने जीवंत मूर्ति रख दी थी अकबर के आगे... उसी संगतराश की याद आई है, जिसकी मूर्ति में प्राण थे!
http://mypoemsmyemotions.blogspot.com/2006/10/woh-cheekh-cheekh-kar-khati-hae-mae.html इसमें उस नारी का रूप मिलता है, जो सब कुछ जानती है, अपमान का गरल आत्मसात करती है, पर अपने वजूद को भी बताती है। स्वयं के चक्रव्यूह से निकलने का अदम्य प्रयास!
जिन्दगी की आड़ी तिरछी राहें, वक्र रेखाओं में उलझे सरल ख्वाब यही कहते हैं -
काश जिन्दगी भी एक स्लेट होती
जब चाहती लिखा हुआ पोछती
और नया लिख लेती
चलो जिन्दगी ना सही
मन ही स्लेट होता
पोछ सकती, मिटा सकती
उन जज्बातों को
जो पुराने हो गये हैं
पर जिन्दगी की चाक तो
भगवान के पास है
और मन पर पड़ी लकीरें हों
या सेलेट पर पड़ी खुंरसटे हों
धोने या पोछने से
नहीं हटती नहीं मिटती
पुरानी पड़ गयी स्लेट को
बदलना पड़ता है
विवश मन को
भुलाना होता है... यही सार क्यूँ रह जाता है जीवन में? तकदीरें बदलती हैं या नहीं, नहीं जानती- पर तद्बीर से बिगड़ी हुई तकदीर को बदलने के क्रम में यही ख्याल रह जाते हैं पन्नों पर -
कुछ साल ही सही
तुम्हारा साथ था
अब फिर वही दूरियां होगी
वही वक्त की कमी
वही परिवार के जिम्मेदारी
और मेरी जिन्दगी
एक बार फिर रुख बदलेगी
शायद ये ही आखरी मोड़ हो
विलीन होने से पहले
....जिन्दगी के हर पड़ाव को हर कोई जीना चाहता है, हथेलियों में बटोरना चाहता है एक घर, एक मीठी मुस्कान, एक मान- सम्मान, लेकिन.... आह! यही कथा शेष रह जाती है-
रिश्तों की जमा पूंजी से
जिन्दगी का खाता तो
हमेशा ही खाली था
पर
सुना था कि
प्यार रिश्तों का
मुहताज नहीं होता
फिर क्यों मैं
प्यार के सहारे
जिन्दगी की वैतरणी को
पार नहीं कर पायी
...यह सवाल ही पन्ने ढूंढता है। और भ्रम के पर्दों में ख़ुशी ढूंढता है...कुछ इस तरह-
रुकी हुई घड़ी को चलाने के लिये
हम डाल देते है घड़ी में बैटरी
और खुश होते है कि
हमने समय को चला दिया...
आँखों पर चश्मा चढ़ा लेने से, किस्म- किस्म के मुखौटों में छुप जाने से जीवन का सच कहाँ बदलता है... बगावत करके भी सलीम को अनारकली नहीं मिली। उसने भी सोचा होगा, तुमने भी सोचा होगा, कवयित्री की कलम भी यही कहती है-
कभी- कभी जिन्दगी में
ऐसा समय आता है
हर प्रश्न बेमानी हो जाता है
जिन्दगी खुद बन जाती है
एक प्रश्न बेमानी सा 
...कटु सत्य!
सत्य है इस भाव में भी
http://mypoemsmyemotions.com/2011/12/    blog-post.html
2012 की दहलीज भी एक मन के साथ है ...
तुम्हारे बिना मेरी जिन्दगी
ना पूरी हैं ना अधूरी हैं
क्या कहीं कोई कमी है
नहीं, आखों में बस
एक नमी हैं...
किसी को जानने समझने के लिए, उसके एहसासों के कमरे में एक पूरा दिन बिताइए। एक कमरा और है-
http://rachnapoemsjustlikethat.blogspot.com/
मैंने जिन्दगी को हमेशा करीब से देखना चाहा- कभी डूबते उतरते पार निकल गई, कभी चोट लगी, कभी जली भी, पर बिना गहरे उतरे समंदर की अमीरी कहाँ दिखती है।

प्रस्तुति- रश्मि प्रभा, संपर्क: निको एन एक्स,  फ्लैट नम्बर- 42,
         दत्त मंदिर, विमान नगर, पुणे- 14, मो. 09371022446
     http://lifeteacheseverything.blogspot.in

4 Comments:

At 19 June , Blogger  डॉ. मोनिका शर्मा said...

रचना जी की काव्य रचनाओं से जुड़े ब्लॉग के बारे में अच्छी जानकारी मिली , सुंदर परिचय दिया आपने.....

 
At 22 June , Blogger सुरेश यादव said...

उदंती के द्वारा किया gaya यह कार्य सराहनीय है ,रश्मिप्रभा जी को बधाई

 
At 23 June , Blogger सुधाकल्प said...

भावनाओं की अभिव्यक्ति की अनूठी श्रंखला |

 
At 11 July , Blogger सदा said...

आदरणीय रश्मि जी का यह प्रयास सराहनीय है ... जिसे प्रकाशित कर उदंती बधाई की पात्र है

 

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home