May 30, 2012

रंग- बिरंगी दुनिया

मौत के बाद भी उन्हें चाहिए आराम

 
दुनिया में अजूबों की कमी नहीं है तभी तो लोगों को मरने के बाद भी चैन नहीं वे मरकर भी सुकून भरी की जिंदगी चाहते हैं। ऐसी ही कुछ चाहत रखने वाले ब्रिटेन की एक दंपती ने मौत के बाद आराम फरमाने के लिए समूचा द्वीप खरीद लिया है। हर्टफोर्डशायर स्थित बीचवुड पार्क बोर्डिंग स्कूल में सूचना प्रसारण प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख पीयर्स कैसीमीर म्रौकजिंस्की (50) ने आइसले टापू के पास मैकेंजी आइलैंड नामक छोटा द्वीप इसलिए खरीद लिया ताकि वह और उनकी पत्नी पाओलिन को मरने के बाद वहां दफ्न किया जा सके। 55 हजार पाउंड यानी 88 हजार डालर से अधिक की रकम देकर उन्होंने यह द्वीप खरीदा है।
म्रौकजिंस्की ने बताया कि उन्हें तीन साल पहले पता चला कि वह अपेंडिक्स के कैंसर की बीमारी से पीडि़त हैं। उसी समय उनके दिमाग में यह विचार आया कि कोई ऐसी जगह होनी चाहिए जहां वह अपनी पत्नी के साथ सुकून से दफ्न हो सकें। यह द्वीप फिलहाल निर्जन है जिसकी वजह से म्रौकजिंस्की दंपती के आराम के लिए काफी मुफीद जगह है। गौरतलब है कि म्रौकजिंस्की ने अब तक इस द्वीप को केवल तस्वीरों और नक्शों में ही देखा है। वह खुद कभी यहां नहीं गए। उन्होंने बताया कि उन्हें समुद्र बेहद पसंद है और यह जगह समुद्र के काफी करीब होने के कारण बहुत खूबसूरत है। मरने की बाद की इस चाहत का भी जवाब नहीं।

अग्नि युद्ध की परंपरा

कर्नाटक के मैंगलोर में देवी को खुश करने के लिए जलती मशालों से जंग लडऩे की एक अजीबो- गरीब परंपरा निभाई जाती है। मैंगलोर के कटील में प्रसिद्ध दुर्गा परमेश्वरी मंदिर में आस्था के नाम पर आग से खेलने का दिल दहला देने वाला खेल परंपरा के नाम पर खेला जाता है। मंदिर के आठ दिन तक चलने वाले सालाना उत्सव के दूसरे दिन मशालों की ये जंग होती है। इलाके के लोगों के मुताबिक ये परंपरा सदियों से चली आ रही है। पिछले दिनों एक बार फिर इस परंपरा को निभाया गया।
'अग्नि केलि' नाम का ये खेल दो गांव के लोगों के बीच खेला जाता है। सबसे पहले देवी की शोभा यात्रा निकाली जाती है इसके बाद पास ही में बने तालाब में डुबकी लगाने के बाद आतुर और कलत्तुर गांव के लोग दो गुटों में बंट जाते हैं। वे अपने- अपने हाथों में नारियल की छाल से बनी मशाल लेकर एक दूसरे के विरोध में खड़े हो जाते हैं। मशालों को जलाया जाता है और फिर शुरू हो जाता है जलती मशालों को एक-दूसरे पर फेंकने का खेल। ये खतरनाक खेल करीब 15 मिनट तक खेला जाता है। इस दौरान एक शख्स को सिर्फ पांच बार जलती मशाल फेंकने की इजाजत होती है।

...और उन्होंने 55वीं मंजिल से छलांग लगा दी

कुछ लोग अपना उल्लू साधने के लिए नित नए कारनामे करते रहते हैं। ऐसा ही एक वाकया मेलबर्न के पांच सितारा होटल में हुआ। चार स्टंटबाजों ने महंगे होटल में खाना खाने की योजना बनाई लेकिन उनके पास खाने का बिल देने के पैसे नहीं थे। सो, मुफ्त में लजीज व्यंजन उड़ाने की चाहत में इन्होंने अपनी करतब बाजी को जरिया बनाया और होटल में पैराशूट भी छुपाकर ले गए। वहां इन्होंने जमकर खाना खाया और महंगी शराब पी। उसके बाद बैरे से इन्होंने बिल मांगा। जब वह बिल लेने गया तो चारों ने पैराशूट की मदद से 55वीं मंजिल से छलांग लगा दी। होटल वाले भौंचक्के रह गए और ये आराम से उतरकर चलते बने।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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