May 10, 2011

पिछले दिनों

आठवां फेरा
ठेठ ग्रामीण माहौल में पली-बढ़ी मोनिका के हौसले ने बदलाव की नई इबारत लिख डाली। आत्मविश्वास से सराबोर वह पगड़ी पहन घोड़ी पर बैठकर गांव की गलियों में निकली तो सदियों के तमाम बंधन एक झटके में टूट गए। मोनिका ने 4 मई को शादी से पूर्व दूल्हे की तरह गांव में घुड़चढ़ी की रस्म अदा की। बेटी के इस हौसले को मां-बाप व भावी पति का भी भरपूर समर्थन मिला। इसके बाद उसने 5 मई को अग्नि को साक्षी मानकर हिंदू रीति-रिवाज में बताए गए सात फेरे और कसमें पूरी करने के बाद तांबे के पवित्र लोटे में गंगाजल डाल एक फेरा और लेते हुए संकल्प लिया कि वे जीवन पर्यन्त कन्या भ्रूण हत्या नहीं होने देंगे। उन्हें ईश्वर चाहे लड़का दे या लड़की, वे उसे स्वीकार करेंगे।

महिलाओं ने फिर मारी बाजी

पिछले साल की तरह इस वर्ष भी पूरे देश में सिविल सेवा परीक्षा में पहला व दूसरा स्थान स्थान महिलाओं के नाम ही रहा है। प्रथम स्थान हासिल करने वाली एस दिव्यदर्शिनी का कहना है कि 'मैं समाज का भला करना चाहती हूं और भ्रष्टाचार से लडऩा चाहती हूं,'। भारतीय स्टेट बैंक में सहायक के पद कार्यरत विधि स्नातक दिव्यदर्शिनी ने दूसरे प्रयास में यह कमाल कर दिखाया। इसी तरह दूसरा स्थान पाने वाली श्वेता मोहंती ने अपनी खुशी का इजहार करते हुए कहा कि उसकी बचपन की ख्वाहिश आज पूरी हो गई। हैदराबाद से कम्प्यूटर साइंस में बीटेक की पढ़ाई के बाद अपने दूसरे ही प्रयास में वह 2007 में इंडियन रेवेन्यू सर्विसेज के लिए चुन ली गई थी। श्वेता फिलहाल अस्सिटेंट कमिश्नर सिलीगुड़ी में पदस्थ हैं। महिला शक्ति को सलाम।

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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