January 20, 2009

जनता की आशाओं का कमल फिर खिला


पिछले माह सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ की जनता ने डॉ. रमन सिंह को पुन: सत्ता सौंपकर यह जता दिया है कि जो सरकार काम करेगी वही राज भी करेगी। दरअसल छत्तीसगढ़ में कमल के पुन: खिलने का पूरा श्रेय अकेले डॉ. रमन सिंह ले जाते हैं कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। यह जीत उनकी सरल, सौम्य और स्वच्छ छवि का नतीजा है। पिछले सालों में उन्होंने अपनी साफ सुथरी छवि की बदौलत भाजपा की स्थिति को मजबूत तो किया ही है साथ ही उनके प्रति जनता का विश्वास भी बढ़ा है।

इन सबके बावजूद जब लोकप्रिय नेता सत्तासीन होता है तो जनता की आकांक्षाओं के बादल बहुत घने छाते हैं, ऐसे में सरकार का भी यह दायित्व बनता है कि वह जनता की उन आकांक्षाओं को समझे और उन्हें पूरा करने की दिशा में उचित कदम उठाए, तभी उनका पुन: सत्ता में वापस आना सार्थक होगा और तब कहीं जाकर वे आगामी पारी में बिना किसी झिझक के वापस आने की दावेदारी प्रस्तुत कर सकेंगे। इसलिए अनिवार्य हो जाता है कि नेता अपनी राजनैतिक इच्छा शक्ति से इन आकांक्षाओं के बादलों से लोक कल्याण के कार्यों की वर्षा करें।

आम जनता की प्राथमिक जरुरतों के बारे में यदि बात करें तो कुछ बुनियादी बातों की ओर सर्वप्रथम ध्यान दिया जाना चाहिए जैसे बिजली, पानी, सडक़, स्वास्थ्य सुविधाएं, रोजगार के साधन और प्राथमिक शिक्षा। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ने शपथ लेने के बाद अपने पहले संबोधन में कहा भी है कि राज्य में गांव के अंतिम कोने तक बिजली जाएगी। तो इस संदर्भ में हमारा निवेदन है कि बिजली अंतिम कोने तक जाए यह तो बड़ी खुशी की बात है, पर वह बिजली जले भी इसका भी ध्यान रखा जाना बेहद जरुरी है।

पिछले दशक की ओर नजर डालें तो यह छत्तीसगढ़ का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि प्राकृतिक और खनिज सम्पदा के मामले में सम्पन्न होते हुए भी छत्तीसगढ़ बनने के बाद और उससे पहले भी इस प्रदेश की उपेक्षा ही हुई है। जब हम मध्यप्रदेश में समाहित थे तो हम पर पिछड़ेपन का ठप्पा ही लगा रहा। स्वतंत्र राज्य बनने के बाद भी इसकी खुशहाली की दिशा में बहुत अधिक प्रयास किया गया हो ऐसा भी नहीं है। ऐसी स्थिति में रमन सरकार को अब कुछ मूल मुद्दों पर काम करने हेतु सख्ती बरतनी होगी।

यह तो हम सभी जानते हैं कि किसी भी प्रदेश की सम्पन्नता का पैमाना वहां की शिक्षा का प्रतिशत होता है और वह भी प्राथमिक शिक्षा का अत: प्राथमिक शिक्षा को जब तक प्राथमिकता की श्रेणी में नहीं लाया जाएगा प्रदेश के विकास की बात करना बेमानी ही होगा। दूसरी महत्वपूर्ण बात है छत्तीसगढ़ जो कभी 'धान का कटोरा' कहलाता था के किसानों की अड़चनों को जमीनी स्तर पर समझना, उनकी समस्याओं के निराकरण के बगैर हम छत्तीसगढ़ की उन्नति की बात कर ही नहीं सकते, यह खुशी की बात है कि मुख्यमंत्री ने जीत के तुरंत बाद किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिए जाने की घोषणा करके उनकी महत्ता को स्वीकार किया है। तीसरी महत्वपूर्ण बात जो सीधे राज्य के विकास से जुड़ी है वह है इस धरती की भरपूर प्राकृतिक व खनिज सम्पदा को क्षेत्र के विकास से जोडऩा तथा नए उद्योग धंधों से रोजगार के अवसर पैदा करके जनता की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के साथ क्षेत्रीय धन-धान्य और कला संस्कृति से भरपूर इस धरती की प्राकृतिक सुषमा को बचाकर रखना और उसे संरक्षित संवर्धित करने की दिशा में जरुरी कदम उठाना। जिस प्रदेश में चित्रकुट जैसा जलप्रपात हो जहां सिरपुर जैसी प्राचीन संस्कृति को रेखांकित करने वाली, विश्व विरासत की श्रेणी में रखे जाने लायक पुरातत्वीय धरोहर हो ऐसी खूबसूरत धरती को यदि पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा तो प्रदेश में बाहरी पर्यटकों के आवागमन से छत्तीसगढ़ की धरती के स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत तो होगी ही बेरोजगारी की समस्या से भी मुक्ति मिलेगी और विश्व के नक्शे पर पर्यटन की दृष्टि से यह अग्रणी प्रदेश भी बनेगा।

रमन सिंह के सामने एक चुनौती नक्सलवाद की समस्या से नक्सल प्रभावित जनता को राहत दिलाना भी है। क्योंकि चुनाव नतीजों से भी यह साफ है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र की जनता ने उनपर सबसे ज्यादा विश्वास व्यक्त किया है अत: उनके जीवन में शांति लाना उनका प्राथमिक कत्र्तव्य होना चाहिए।
जनता ने रमन सिंह पर विश्वास जताकर कमल को फिर से खिलने का जो मौका दिया है उस विश्वास को कायम रखते हुए वे अपनी दूसरी पारी को बखूबी निभाएंगे, हमारी यही सुभेच्छा है।



पाठकों को नव- वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।


-डॉ. रत्ना वर्मा

1 Comment:

अजय साहू said...

उदंती से जुडे प्रकाशन मंडल के सभी सदस्‍यों को नववर्ष की बधाई, रमन सरकार के दोबारा आने का सबसे बडा कारण मेरे विचार से शिक्षाकर्मियों की इमानदारी से की गई भर्ती है, साथ ही उनको दिया जाने वाला वेतनमान भी स्‍वागत योग्‍य कदम है,बेरोजगारों को रोजगार देने वाली सरकार ही सत्‍ता पाने की हकदार होगी, यह संदेश जनता ने दे दिया है, जोगी जी जैसे प्रतिभाशाली प्रशासक ने मुख्‍यमंञी रहकर रोजगार जैसे संवेदनशील मुददे को गंभीरता से न लेकर गलती की और पद से बाहर हो गए,,,

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