November 23, 2008

किसी को पहल तो करनी होगी

यह तो हुई राह चलते हार्न बजा- बजा कर शोर प्रदूषण फैलाने वालों के प्रति नाराजगी। इसी तरह ऐसे बहुत से अनुभव से हम लगभग रोज ही गुजरते हैं, जिन पर हमारा बस नहीं चलता पर मन ही मन हम सब उसके ऊपर ट्रक नहीं बल्कि बुलडोजर चलाने के बारे में सोचने लगते हैं।


यदि आपको भी आता है गुस्सा तो आइए उस गुस्से को उदंती.ष्शद्व के इस पृष्ठ पर लिख कर उतारने की कोशिश करें। क्योंकि बड़े- बुजुर्ग कहते हैं कि गुस्से को मन में नहीं रखना चाहिए उसे बाहर निकाल देेने से गुस्सा कम हो जाता है, तो यदि हम लिखकर आपस में उसे बांट लें तो गुस्सा कम तो होगा ही साथ ही इसके माध्यम से एक अभियान चला कर इन सबके प्रति कुछ तो जागरुक कर ही सकते हैं।

किसी को पहल
तो करनी होगी

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि आप अपनी गाड़ी से, चाहे वह दुपहिया वाहन हो या चारपहिया, अपने रास्ते चले जा रहे हैं और अचनाक पीछे से आती गाड़ी आपके पीछे आकर इतने जोर से हार्न बजाती है कि आप चौंक पड़ते हैं और सोचने लगते हैं कि इस पीछे वाले सज्जन को जरूर बहुत जरूरी काम से जाना होगा तभी यह इतनी जोर जोर से हार्न बजा रहा है। पर आप उसके लिए कुछ नहीं कर सकते क्योंकि आगे गाडिय़ों की लाईन लगी है और जब तक वह क्लीयर नहीं हो जाती आप उन सज्जन को राहत नहीं पंहुचा सकते।

तब आप विनम्रता से उसे कहते हैं कि धैर्य रखिए जल्दी ही आपके लिए रास्ता बन जाएगा। आपका यह कहना था कि बाईक पर बैठे वे दोनों युवा जोर से हंस पड़ते हैं और हार्न के ऊपर अपनी हथेली रखकर और भी ज्यादा शोर करते हुए लगातार हार्न बजाने लग जाते हैं। आपका मन होता है कि कहें कि पढ़े लिखे लगते हो, अच्छे घर और किसी अच्छे खानदान के भी नजर आते हो, माता- पिता ने जरुर कहीं नौकरी करके या कोई और काम करके तुम्हें बहुत ही प्यार से पाला- पोसा होगा, और अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार भी दिए होंगे ताकि तुम उनका नाम रोशन करो। पर आप यह सब बिल्कुल भी कह नहीं पाते। राह चलते यह सब कहना मुमकिन भी नहीं है।

जिन युवाओं को हम देश का भविष्य कहते हैं, जिनके कंधे पर देश का भार रख देते हैं उनमें से ही कुछ युवाओं को जब इस तरह की हरकत करते देखते है तो जाहिर है गुस्सा आता है और आपकी विनम्रता क्रोध में बदल जाती है। आप झल्ला पड़ते हैं और उन दोनों लडक़ों से कहते हैं कि आपके इस तरह हार्न बजाने से रास्ता तो साफ नहीं हो जाएगा, जब तक कि आगे कि गाडिय़ां आगे नहीं बढ़ेंगी आपको खड़े रहना पड़ेगा? पर उन पर आपकी बातों का बिल्कुल असर नहीं होता वे हार्न बजा- बजा कर आपका कान लगभग फोड़ ही डालना चाहते हैं। और जैसे ही उन्हें अपनी बाईक निकालने लायक जगह मिलती है वे आड़ी तिरछी बाईक करते हुए आगे बढ़ते चले जाते हैं, हम सब खड़े हुए उनका मुंह ताकते रह जाते हैं पर करते कुछ भी नहीं। यह सच है कि युवाओं में जोश होता है और वे इस उम्र में होश खो कर रास्ते पर चलते हैं।

पर हम क्यों कुछ नहीं कर पाते? सामने वाला कुछ भी करता रहे आप चुपचाप क्यों सहने को बाध्य हैं? इस तरह नियम तोडऩे वाले के विरूद्ध हम शिकायत तो कर ही सकते हैं। एक ओर तो हम कहते हैं कि पश्चिम की अंधी दौड़ ने आज के युवाओं को बर्बाद करके रख दिया है। पर पश्चिम की अच्छाईयों को अपनाने के बारे में भी हम क्यों नहीं सोचते। यह तो हम सभी जानते हैं कि पश्चिम में ट्रेफिक नियम बहुत कड़े हैं और उसे तोडऩे वाले पर जुर्माना लगता है। हार्न बजाकर आगे निकलने की कोशिश को वहां बत्तीमीजी मानी जाती है। हार्न तभी बजाया जाता है जब सामने वाला गलती कर रहा हो, हार्न बजाकर सामने वाले को एलर्ट किया जाता है कि जनाब सही तरीके से गाड़ी चलाइए। तकनीकी रुप से सक्षम विकसित देशों में हर जगह कैमरे फिट हैं, आपसे जरा सी चूक हुई नहीं कि नोटिस हाजिर। फिर आप भरिए भारी जुर्माना।

हमारे देश में भले ही हम तकनीकी रूप से इतने सक्षम नहीं हुए हैं कि सडक़ पर चलने वाली सभी गाडिय़ों पर नजर रख सकें पर जो आंखों के सामने हो रहा है उस पर तो निगरानी रख सकते हैं। आप कहेंगे कौन मुसीबत मोल ले। गुंडे मवालियों के साथ क्यों उलझ कर अपना समय खराब करें? फिर हम ही पहल क्यों करें , यहां और भी तो इतने लोग खड़े हैं वे आगे क्यों नहीं आते? कह तो आप बिल्कुल सच रहे हैं क्योंकि समय बहुत खराब है और किसी से उलझ कर शायद हम अपना समय ही बर्बाद करेंगे। फिर सबसे पहले हम ही क्यों?

पर जरा गंभीरता से सोचिए क्या आप जो सोच रहे हैं वह सही है? नहीं ना। क्योंकि किसी न किसी को पहल तो करनी ही होगी चाहे वह ट्रेफ़िक के नियम तोडऩे वाले के खिलाफ हो या रास्ता जाम होने के बाद भी हार्न बजाकर शोर करने वाले के खिलाफ हो। (उदंती फीचर्स )

3 Comments:

दीपक said...

आपने सही कहा किसी को तो पहल करनी होगी !!यह एक अच्छा प्रयास है और ऐसी बत्तमजीया मैने भी देखी है !!आपका गुस्सा जायज है !!

anjeev pandey said...

sahi kaha aapne pahal to karni hi hogi. sabse achchhi pahal vahi hoti hai jo khud se ki jaye. jis vyavhaar se hame taklif hoti hai. vo vyavhaar hamei nahi karna hai. bas ho gayee pahal. traffic rules ka palan karna khud se hi shuru karen.
anjeev

anjeev pandey said...

sahi kaha aapne pahal to karni hi hogi. sabse achchhi pahal vahi hoti hai jo khud se ki jaye. jis vyavhaar se hame taklif hoti hai. vo vyavhaar hamei nahi karna hai. bas ho gayee pahal. traffic rules ka palan karna khud se hi shuru karen.
anjeev

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

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माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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