July 10, 2020

आलेख

प्रयास
 हम रोज जीते हैं हम रोज मरते हैं
-सुमन परमार
कहते हैं अपने दोस्तों की लिस्ट में एक डॉक्टर और एक वकील जरूर होना चाहिए। पता नहीं कब कहाँ इनकी सलाह की जरूरत महसूस हो। बीमारियों को लेकर हमारे मन में तरह-तरह की धारणाएँ हैं। लेकिन जब आप डॉक्टर अबरार मुल्तानी से मिलेंगे तो इनमें से ज्यादातर धारणाएं बिलकुल उलट-पुलट जाती हैं। उनके अनुसार दर्द हमारे हमदर्द होते हैं।
अबरार मुल्तानी का कहना है, दर्द शरीर का मैसेज है। अगर हमें दर्द नहीं होगा तो हम जीवित नहीं रह पायेंगे। दर्द बताता है कि देखों यहाँ परेशानी है इसका इलाज़ करो। पेनकिलर खाकर हम हमारे हमदर्द' का मुँह बंद कर देते हैं। ज्यादा दर्द, मतलब परेशानी ज्यादा बड़ी है डॉक्टर के पास जल्दी जाना जरूरी है।
पेशे से आयुर्वेदिक एवं यूनानी डॉक्टर अबरार मुल्तानी लेखक भी हैं। 5 पिल्स डिप्रेशन स्ट्रेस से मुक्ति के लिए एवं क्यों अलग है स्त्री-पुरूष का प्रेमराजकमल प्रकाशन से प्रकाशित इनकी चर्चित किताबों में शामिल है।
भारत में 1 जुलाई नेशनल डॉक्टर्स डे के रूप में मनाया जाता है। इसी अवसर पर राजकमल प्रकाशन समूह द्वारा #CelebrateDoctorsDayWithRajkamal कार्यक्रम के अंतर्गत लेखक-डाक्टर से मुलाक़ात एवं स्वास्थ चर्चोओं का सिलसिला शुरू किया गया है। फेसबुक लाइव के जरिए डॉ.अबरार मुल्तानी, डॉ.यतीश अग्रवाल और डॉ.विनय कुमार समूह के फेसबुक पेज से लाइव आकर अपने अनुभव एवं अच्छे स्वास्थ के लिए महत्वपूर्ण बातें लोगों से साझा कर रहे हैं।
हमें क्यों स्वस्थ रहना चाहिए
वैज्ञानिक अर्थ में हमारे अंदर बहुत सारे अणु रोज़ नष्ट होते हैं और रोज नए अणु बनते भी हैं। यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जो शरीर के भीतर चलती रहती है। इसलिए डॉक्टर कहते हैं कि शरीर के भीतर नए बनने वाले अणु जितने स्वस्थ होंगे उतना ही युवा हमारा शरीर होगा।
राजकमल प्रकाशन समूह के फेसबुक पेज से लाइव बातचीत में अबरार मुल्तानी ने कहा, बीमारियां हमारी शत्रु नहीं हैं और हर रोग दवाओं से ठीक नहीं किया जा सकता। ये दो बातें ऐसी हैं जो बीमारी के प्रति हमारी धारणा को उलट कर रख देती है। लेकिन, जरूरी है कि शरीर की भाषा को, उसकी जरूरतों को समझना। हमारे भीतर जो विचार पनपते हैं वो हमारे स्वास्य्थ पर सीधा असर करते हैं। निगेटिव सोच शरीर पर प्रतिकूल असर पैदा करते हैं।
कोविड 19 के इस समय में हमारे डॉक्टर्स एवं स्वास्थ कर्मी लगातार डटकर मुक़ाबला कर रहे हैं। वो हर संभव कोशिश कर रहे हैं हम स्वस्थ एवं सुरक्षित रहें। उनके इस प्रयास में हमारी सरकार एवं हम सभी शामिल हैं। लेकिन, असल सम्मान तभी संभव है जब हम उनकी बातों को सुनें और उसे अमल में लाएं।
हमारा शरीर अलग-अलग तरह से हमसे संवाद करता है। खाँसी, बुखार, शरीर दर्द और अन्य लक्ष्ण दरअसल शरीर की अपनी भाषा है जिसके जरिए वो हमसे संवाद करना चाहता है। जरूरी है कि हम इसे सुनें और समझें।
लॉकडाउन के दौरान और अनलॉक की प्रक्रिया में भी राजकमल प्रकाशन समूह द्वारा कई महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। हर एक पाठक से संवाद बनाए रखने की प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण पहल 'पाठपुनःपाठ' पुस्तिका 67 दिनों से दैनिक वितरित की जा रही थी। 1 जुलाई से इसके साप्ताहिक अंक वाट्सएप्प के जरिए साझा किए जा रहे हैं। इन 67 अंकों में कई विशेष और विषय-केंद्रित अंक भी निकाले गए। नई रचनाओं के दो विशेष अंक रचना-चयन की ताजगी के कारण पाठकों द्वारा बहुत पसंद किए गए।
राजकमल प्रकाशन समूह, फोन - 9540851294

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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