March 24, 2018

मूल्यांकन

10 आदतें जो आपके जीवन को
 पूरी तरह बदल सकती है
 असंख्य आदतों में से केवल कुछ-एक ही होती हैं जो हीरे की तरह होती हैं और उन्हें अपनाने वालों के जीवन को जगमग कर देती हैं।
हम वही बन जाते हैं जो हम करते रहते हैं। उत्कृष्टता कोई कर्म नहीं बल्कि स्वभाव ही है। - अरस्तू
1. भरपूर विश्राम करें
आजकल हर व्यक्ति तनावप्रद परिस्तिथियों में काम करता है। काम के घंटे नियत नहीं होते, ऊपर से आने-जाने में लगने वाला समय और अव्यवस्था हमें थका देती है। ऐसे में यदि आप पर्याप्त विश्राम न करें तो शरीर निगेटिव संकेत देने लगता है। यदि यह तनाव और थकान शरीर पर हावी हो जाए तो आए-दिन इसके गंभीर परिणाम देखने को मिलते रहते हैं। अच्छे भले स्वस्थ दिखते नवयुवकों के 30-35 की अल्पायु में ही काल-कवलित होने के कई उदाहरण मौजूद हैं।
यही कारण है कि विश्राम को इस लिस्ट में नंबर एक पर रखा गया है। लेकिन यह स्पष्ट कर दिया जाए कि पर्याप्त विश्राम लेने का अर्थ यह नहीं है कि आप 10 घंटे सोने लगें या सुबह 9 बजे उठने लगें। यह पूरी तरह से आपकी शारीरिक व मानसिक दशा पर निर्भर करता है।
यहाँ आप जो काम आसानी से कर सकते हैं वह यह है कि आप अपने सोने और उठने का समय नियत कर लें। यदि आपको ऑफिस से वापस आते 8-9 बज जाते हैं तो खाना खाकर दो-तीन घंटे के भीतर सो जाएँ,ताकि आप सुबह 7 बजे के आसपास उठ सकें। यदि आप रात को 2 बजे सोएँगे तो उठेंगे कब? फिर आप दिनभर थकान से भरे रहेंगे और एनर्जी की कमी महसूस करेंगे।
ठीक समय पर सोइए, ठीक समय पर उठिए। स्वस्थ रहिए और अच्छा फ़ील कीजिए।
2. सुबह जल्दी उठिए
घर से बाहर निकलते ही दुनिया और उसके प्रभाव हमारे ऊपर हावी होने लगते हैं और चीजें अपने पैटर्न पर घटित होने लगती हैं। जब तक हम अपने घर में रहते हैं हम एक नियंत्रित वातावरण में रहते हैं लेकिन घर के बाहर यह नियंत्रण कमज़ोर हो जाता है। उस नियंत्रण को दिन के बाकी बचे हिस्से में फिर से पाना कठिन हो जाता है।
यही कारण है कि मैं लोगों से सुबह जल्दी उठने की अपेक्षा करता हूँ ताकि वे खुद को अधिक समय दे सकें। सुबह के शुरुआती घंटों के दौरान हम अपने शरीर और मनोदशा को नियंत्रण में रख सकते हैं। सुबह के उन दो-तीन घंटों में हम दिन की ऊर्जावान शुरुआत उस तरह से कर सकते हैं जो हमारे लिए सबसे अधिक उपयुक्त हो।
3. स्वास्थ्यकर भोजन लीजिए और व्यायाम कीजिए
ठहरी हुई सुस्त जीवनशैली हमें धीरे-धीरे रोगग्रस्त करती जा रही है और हमें इसका पता तब चलता है जब स्थिति गंभीर हो जाती है।
आपको खुद के साथ यह डील करनी है कि चाहे कुछ भी हो जाए पर आपका स्वास्थ्य आपके लिए हमेशा पहली प्राथमिकता रहेगा। इसका अर्थ यह है कि अन्य किसी भी गतिविधि में लगने के पहले आपको अपने स्वास्थ्य को सुधारना है।
इसके लिए आपको केवल दो बातों पर ध्यान देना है-
स्वास्थ्यप्रद भोजन- यह जानना कठिन नहीं है कि किस प्रकार का और कितना भोजन हमें नुकसान पहुँचा सकता है। मेरा निजी नियम (इसे आप मेरी सनक भी कह सकते हैं) यह है। मैं यह मानता हूं कि बहुत स्वादिष्ट और बहुत शानदार दिखनेवाला भोजन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह होता है। मैं सादा भोजन लेता हूं, समुचित मात्रा में। आयुर्वेद के नियमों के अनुसार।
शारीरिक गतिविधिमैं दिन भर बैठे रहकर काम करता हूं इसलिए मुझे शारीरिक सक्रियता बनाए रखने के लिए अच्छी-खासी एक्सरसाइज़ करनी चाहिए लेकिन समय नहीं मिलने के कारण मैं नहीं कर पाता। लेकिन मैं छोटी दूरियों तक पैदल चलता हूं। लिफ्ट का उपयोग नहीं करता। और दिन भर में कुछ बार खुद को स्ट्रेच कर लेता हूँ। छुट्टियों के दिन थोड़ी लंबी सैर कर लेता हूँ। इतना तो हर व्यक्ति कर ही सकता है।
आप भी थोड़ी-थोड़ी करके अपनी शारीरिक सक्रियता बढ़ाइए। जिस तरह थोड़ा-थोड़ा ब्याज जुडक़र रकम दुगनी-तिगुनी हो जाती है उसी तरह एक्सरसाइज़ या व्यायाम करते रहने से उसका लाभ शरीर को लॉंग-टर्म में मिलता रहता है।
4. ध्यान कीजिए
वर्तमान दुनिया का स्वरूप ऐसा हो गया है कि हमारा ध्यान एक चीज़ पर देर तक नहीं टिकता (इस लेख को भी एक सिटिंग में बिना किसी व्यवधान के लिखना कठिन था। बीच-बीच में टीवी न्यूज़ पर निगाह दौड़ती गई और फ़ोन पर भी धड़ाधड़ नोटिफ़िकेशंस आते रहे)। चैन से कुछ देर के लिए सिर्फ खुद को समय देना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है।
यदि हम अपने मन-मस्तिष्क को स्पष्ट और शांत रखना चाहते हैं तो दिन में कुछ समय के लिए स्थिर बैठना बहुत ज़रूरी है, भले ही हमें किसी तरह की ध्यान-साधना नहीं करनी हो।
इसके लिए शुरुआत में 15 मिनट पर्याप्त होंगे और यह सुबह करना सबसे सही रहेगा। शांत मुद्रा में आँखें बंदकर स्वयं को एकाग्र करने की प्रक्रिया आपको ज़रूरी कामों पर फ़ोकस करने में मदद करेगी। यह आपके चित्त को भटकने से रोकेगी और कई रोगों से भी बचाएगी।
यदि यह करने में कठिनाई हो तो केवल कुछ देर के लिए अपनी साँस पर ध्यान केंद्रित करें और मन को शांत करने का प्रयास करें। यह सुनने में सरल लेकिन करने में कठिन है। लेकिन करने लायक है।
5. योजना बनाइए
बाहर की दुनिया बहुत भागमभाग और आपाधापी वाली है। इतनी तेज दुनिया में ट्रैक छूट जाना कोई कठिन बात नहीं है। दुनिया सबको अपने बहाव में बहाना चाहती है। जो इसके साथ नहीं चलते वे पिछड़ जाते हैं।
यही कारण है कि मौजूदा दुनिया में अपने हर कदम को सोचविचार कर रखना ज़रूरी हो चला है। हमारी पुरानी पीढ़ियों के लोग बहुत आगे का नहीं सोचते थे। हमें सोचना पड़ता है और हमारे पास भविष्य के बारे में सोचने को बहुत कुछ है।
मैं तो जीवन के प्रवाह के साथ बहने में यकीन रखता हूं, फिर भी मैं अपने दिन को और अपने क्रियाकलापों को प्लान करके रखता हूँ, ताकि बाहरी परिवर्तन मुझपर हावी न हो सकें। यह तो आप भी मानेंगे कि जीवन का कोई भरोसा नहीं है, इसीलिए अपने जीवन और कर्मों का नियोजन इस प्रकार से करिए कि आपको जीवन जीने में सहजता हो।
किसी भी योजना का बनाना नहीं बल्कि उसका नियोजन करना महत्त्वपूर्ण होता है। यह नियोजन आपकी योजना पर टिके रहने की क्षमता पर निर्भर करता है। योजनाएँ बनाना कठिन है, उनका कार्यान्वयन कठिन है।
6. हाई लीवरेज गतिविधियों पर फ़ोकस करें
हाई लीवरेज गतिविधियाँ क्या हैं?
दिन भर में आप बहुत सारे काम करते हैं लेकिन सभी कामों का परिणाम एक सा नहीं होता। समय बहुत कीमती है इसलिए इस बात का लेखा-जोखा लेते रहना चाहिए कि हम किन कामों को व्यर्थ में ही कर रहे हैं।
यहाँ पेरेटो का सिद्धांत (The Pareto principle) उपयोग में लाना चाहिए जिसे लोग 80/20 का नियम भी कहते हैं। यह नियम मोटे तौर पर यह कहता है कि हमारी लगभग 80% गतिविधियों से हमें 20% परिणाम मिलते हैं जबकि 20% गतिविधियों से 80% परिणाम मिलते हैं। अर्थात हमें उन गतिविधियों की पहचान करनी है जिन्हें करने में कम समय और कम ऊर्जा लगती है लेकिन अधिक परिणाम और अधिक सफलता मिलती है।
ऐसी गतिविधियों की पहचान कीजिए और उन्हें करने पर अधिक ध्यान दीजिए।
7. नए स्किल्स सीखिए
आने वाले समय में पढ़े-लिखे व्यक्ति से भी अधिक डिमांड उस व्यक्ति की होगी जिसमें कोई स्किल या हुनर है।
आपके द्वारा निर्धारित लक्ष्य ही आपको यह बताएँगे कि आपको खुद में कौन से स्किल्स डेवलप करने की ज़रूरत है।
यदि आप हिन्दी ब्लॉगर हैं तो यह बहुत कारूरी है कि आपको हिन्दी टाइपिंग अच्छे से आती हो। यदि आप प्रोग्रामर या एप्प डेवलपर हैं तो आपको लेटेस्ट टैक्नोलॉजी की जानकारी होना अनिवार्य है।
आपको कोई भी स्किल मनमाने तरीके से नहीं सीखना है। आप जीवन के किसी भी क्षेत्र में हों, उस स्किल को सीखिए जो आपके लिए सबसे अधिक उपयोगी हो। फिलहाल मेरे लिए सबसे उपयोगी स्किल है खाना बनाना सीखना। मैं दुनिया भर का मोटिवेशन लगाकर भी इसे सीखने में जुट नहीं पा रहा हूँ।
स्किल्स डेवलप करने के साथ एक और अच्छी बात यह है कि बहुत सी स्किल्स एक-दूसरे से को-रिलेट करती हैं, पुश करती हैं, जैसे आप पहले साइकिल सीखते हैं, फिर मोटरसाइकिल, फिर कार चलाना सीखते हैं। खाने के मामले में भी पहले चाय बनाना, फिर आमलेट बनाना, फिर कोई बड़ी डिश जैसे बटर पनीर मसाला! एक स्किल दूसरी स्किल के लिए रास्ता खोल देती है।
8. पढ़ना
किसी भी व्यक्ति का अध्ययन जीवनपर्यंत जारी रहना चाहिए। आप भले ही संस्कृत साहित्य पढ़ते हों या सुरेंद्र मोहन पाठक के उपन्यास- किताबें पढ़ने से रचनात्मकता बनी रहती है और कल्पनाशक्ति सुदृढ़ होती है।
इसका कारण यह है कि किताब कैसी भी हो लेकिन इससे मिलनेवाला हर नया विचार हमारे जन्म से लेकर अब तक अर्जित ज्ञान का संवर्धन करता है। जीवन में क्रिएटिविटी और प्रोडक्टिविटी बनाए रखने के लिए मस्तिष्क को वैचारिक खुराक मिलती रहनी चाहिए।
इसीलिए आप जब कभी कुछ पढ़ें तो उस विचार की खोज करें जिसे आप अपने जीवन में उतार सकें, लागू कर सकें।
9. डुअर्स (Doers) के साथ रहें
डुअर्स कौन होते हैं? कुछ लोग हमेशा काम की बातें करते हैं और कुछ लोग काम करते हैं। आपको उनके सम्पर्क में रहना है जो वास्तविक काम करते हैं।
एक अंग्रेजी वन-लाइनर में कहा गया है कि यदि आप कमरे में सबसे एक्टिव व्यक्ति हैं तो आप गलत कमरे में हैं। आप वहाँ किसी से कुछ सीख नहीं सकते।
उन लोगों की खोज कीजिए जिन्होंने शानदार काम करके सफलता अर्जित की है। उनसे उनके जीवन और संघर्ष के बारे में जानकर प्रेरणा लीजिए और उनसे सीखिए। उन्हें अपना मेंटर बनाइए। मेंटर के महत्त्व के बारे में पिछली पोस्ट में भी लिखा था।
बार-बार असफल होने के बाद सफल होनेवाले व्यक्तियों से मिलने पर और उनसे बातचीत करने पर आपमें भी हार माने बिना अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने का संकल्प जगेगा। यह आपको सदैव अपने काम में लगे रहने के लिए प्रेरित करेगा।
10. चिंतन-मनन और मूल्यांकन करना
समय आजकल बड़ी तेजी से बीतता प्रतीत होता है क्योंकि दिन के घंटे तो नियत हैं पर हमें इंगेज रखनेवाले विषयों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो गई है। इसके परिणामस्वरूप हमें दो घड़ी बैठकर अपने किए पर सोच-विचार करने और उसका मूल्यांकन करने का अवसर नहीं मिल पाता।
दिन की समाप्ति होने पर रात को सोने से पहले अपने पूरे दिन का जायज़ा लेना एक अच्छी आदत है। ऐसा नियमित रूप से करते रहने से कामकाज में सुधार होता है।
इसके अलावा कुछ सप्ताह या महीनों के अंतराल पर वैज्ञानिक पद्धति (आंकड़े जुटाकर) का प्रयोग करके आपको अपने सारे प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर निगाह डालनी चाहिए. यदि आपने मार्केट में निवेश किया है तो यह जाँचते रहना चाहिए कि आपको किस स्कीम में से पैसे निकाल लेने चाहिए और किस स्कीम में निवेश बढ़ाना चाहिए। (हिन्दी ज़ेन से)

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