October 24, 2017

दो कविताएँ:

1. तुम्हारी नाराजगी
- पीहू
 तुम अकसर नाराज रहते हो मुझसे
कारण इसका लगता है जरा बचकाना-सा
करती नहीं क्यों रोज फोन तुम्हें?
जैसा मैं हमेशा से करती आई थी।
मैं जवाब में उलहानों के तीर छोड़ देती हूँ
और पूछ बैठती हूँ एक सवाल
कि तुम क्यों नहीं करते?
और खुद ही दे देती हूँ जवाब भी
ये तुम्हारी आदत नहीं।
सोचती हूँ, गुनती हूँ,
क्या बात है यहाँ आदत की?
मुझे तो लगता है,
बात है वही आदत की।
तुम अपनी आदत बदलते नहीं,
और बदल ली है हमने अपनी आदत ही।
कौन-सी
समझौते की।
जान लो अब
चाहती हूँ बताना तुम्हें
जज्बातों का दामन पकड़े
जो छलती रही खुद को,
ढकेलती रही स्वयं को मान लेनेके गुहवर में
सच कहूँ,
अब और होता नहीं मुझसे
यूँ अपने आप से दगाबाजी करना
घोंटना गला स्वयं का ही।
क्या सुन रहे हो बात मेरी
कानों तक पहुँच रहे हैं मेरे ख्यालात
नहींअगर है तुम्हारा जवाब
तो मुझे माफ ही करना अबकी बार।
2. उन मुस्कराहटों में
 जहन में तुम्हारी सूरत
चिपक जाती है गोंद-सी
कोई तो बात है
तुम्हारी उन मुस्कराहटों में
जो बिखर जाती है तुम्हारे चेहरे पर
और कर जाती है कायल तुम्हारा।
मेरा कसूर ही कहाँ है
सब तुम्हारा किया धरा ठहरा।
वरना लोगों द्वारा खींची गई
मजहब की लकीरें
कर जाती हमारा भी बँटवारा।
तुम ही बताओ चाहतों की कोई सरहद होती है भला।
मुहब्बत के कच्चे बेर,
जज्बातों का मुरब्बा
चखा तो हुआ अहसास
कि चाहतों में कोई नफरत नहीं होती।
और तुम्हारी उन बातों के जरिए
दुआओं-सी उभरी तुम्हारी जिदें
दे जाती है यकीन मुझे
कि तुम तह-ए-रुह से की गई
मेरी किसी इबादत से मिली रहमत हो।
शायद जमाने की जुबान तक न पहुँच पाये कभी
पाक अफसाने इस पाकीज लगाव के
पर वक्तनामा में
अमर हो जायेंगी
तुम्हारी जिदें,
तुम्हारी मुस्कराहटें।
 सम्प्रति: डॉ. बी.आर. अम्बेबेडकर रोड, श्रीपल्ली, पलता, पो.ऑ. बंगाल एनामल, जिला - 24 परगना, पिन- 743122, Email- papiapandey@gmail.com 

0 Comments:

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष