April 20, 2017

लघुकथा

 निर्णय 
- ललित कुमार
पूरी कंपनी में बॉस के निर्णय लेने की क्षमता और कुशलता की धाक थी। बॉस भी अपनी इस दक्षता पर फूले नहीं समाते। उस ऑफिस में भी बॉस के अनेक मुँहलगे थे। अन्य बॉस की तरह वे भी इन्ही मुँहलगों से मिली सूचना के आधार पर निर्णय लेते और वाहवाही बटोरते।
   आज बॉस अपने एक कर्मी से खासे नाराज थे। वे उसे सजा देने पर तुले थे ;लेकिन क्या सजा दें ,यह उनकी समझ में नहीं आ रहा था। तुरंत ही उन्होंने अपने मुँहलगों  की मीटिंग बुलाई और इस बारे में उनकी राय जाननी चाही। मुँहलगे भी उस कर्मी की दक्षता और क्षमता से ईर्ष्या करते। आज उन्हें उस कर्मी को नीचा दिखाने का अच्छा मौका मिला था। उन मुँहलगो ने तुरंत ही उस कर्मी के एप्रेजल रेटिंग को न्यूनतम करने की सलाह दी ताकि कई वर्षों तक उस कर्मी की पदोन्नति न हो सके। बॉस को यह अच्छा लगा और उन्होंने उस कर्मी के एप्रेजल रेटिंग को न्यूनतम कर दिया।
  ऑफिस में बास के ठीक नीचे वाला अधिकारी उस कर्मी का रिपोर्टिंग अधिकारी था। उसे जब अपने अधीनस्थ कर्मी के एप्रेजल रेटिंग के बारे में पताचला,तो बहुत बुरा लगा, क्योंकि वह कर्मी अपने काम में माहिर और ऊर्जावान व्यक्ति था। वह तत्काल बॉस के पास गया और उस कर्मी के एप्रेजल रेटिंग को न्यूनतम करने का कारण जानना चाहा। बॉस पहले तो कारण बताने से बचते रहे ; लेकिन बहुत ज़ोर देने पर उन्होंने बताया कि पिछली बार जब उनकी पदोन्नति नहीं हुई थी, तब वह कर्मी ज़ोर-ज़ोर से हँसते हुए ताली बजा- बजा कर नाचा था।
- आप को यह जानकारी कहाँ से मिली ?
- मुझे ---- जी ने बताया था। ... बॉस ने कहा।
लेकिन सर वह कर्मी तो ठीक से खड़ा भी नहीं हो सकता, वह क्या नाचेगा....
 अपने सहयोगी अधिकारी की बात सुन बॉस अवाक्रह गए और उनका मुँह खुला का खुला रह गया....
सम्पर्क: उत्तरायण, एच आई जी -1/451, न्यू बोरसी विस्तार, दुर्ग मो. -  83495 82085, 98933 09440,  lalit.mex@gmail.com

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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