July 05, 2014

गंगा -तट से बोल रहा हूँ

गंगा -तट से बोल रहा हूँ

 - अरुण तिवारी











गंगा तट पर देखा मैंने
साधना में मातृ के
सानिध्य बैठा इक संन्यासी
मृत्यु को ललकारता
सानंद समय का लेख बनकर
लिख रहा इक अमिट पन्ना
न कोई निगमानंद मरा है,
नहीं मरेगा जी डी अपना
मर जाएँगे जीते जी हम सब सिकंदर
नहीं जिएगा सुपना निर्मल गंगा जी का
प्राणवायु नहीं बचेगी
बाँधों के बंधन में बँधकर
खण्ड हो खण्ड हो जाएगा
उत्तर का आँचल
मल के दलदल में फँसकर
यू पी से बंगाल देश तक
डूब मरेंगे गौरव सारे।
तय अब हमको ही करना है,
गंगा तट से बोल रहा हूँ......

लिख जाएगा हत्यारों में नाम हमारा
पड़ जाएँगे वादे झूठे गंगाजी से
पुत जाएगी कालिख हम पर
मूँड मुँडाकर बैठे जो हम गंग किनारे।
गंगा को हम धर्म में बाँटें
या फाँसें दल के दलदल में
या माँ को बेच मुनाफा खाएँ
या अनन्य गंग की खातिर
मुट्ठी बाँध खड़े हो जाएँ
तय अब हमको ही करना है,
गंगा तट से बोल रहा हूँ....

गौ-गंगा-गायत्री गाने वालेकहाँ गए?
इस दरिया को पाक बताने वालेकहाँ गए?
कहाँ गएनदियों को जीवित करने का दम भरने वाले?
कहाँ गए,गंगा का झंडा लेकर चलने वाले?
धर्मसत्ता के शीर्ष का दंभ जो भरते हैंवे कहाँ गए?
कहाँ गएउत्तर-पूरब काशी पटना वाले?
कहाँ गए गंगा के ससुरे वालेकहाँ गये?
'साथ में खेलेंसाथ में खाएँसाथ करें हम सच्चे काम'
कहने वाले कहाँ गए?
अरुणअब उत्तर चाहे जो भी दे लो
जीवित नदियाँ  या मुर्दा तन
तय अब हमको ही करना है,
गंगा तट से बोल रहा हूँ....
हो सके ललकार बनकर
या बनें स्याही अनोखी
दे सके न गर चुनौती,
डट सकें न गंग खातिर
अश्रु बनकर ही बहें हम,
उठ खड़ा हो इक बवंडर
अश्रु बन जाएँ चुनौती,
तोड़ जाएँ बाँध-बंधन
देखते हैं कौन सत्ता
फिर रहेगी चूर मद में
लोभ के व्यापार में
कब तक करेगी
मात पर आघातगंगा
गिर गई सत्ता गिरे,
मूक बनकर हम गिरेंगे या उठेंगे
अन्याय के संग चलेंगे
या उसकी छाती मूँग दलेंगे
तय अब हमको ही करना है,                                             गंगा तट से बोल रहा हूँ......

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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