January 18, 2013

हाइकु


अनहोनी  का डर
-सीमा स्मृति

1
आस- किरन
झाँकती झरोंखों से
नव मिलन।
2
आत्मा की बातें
हैं बाँचे दिन-रैन
क्यों हैं बेचैन।
3
तहों में कैद
विचारों के पिंजरे
नयन भरें।
4
बेसुध हुई
साँसों की लय-ताल
करें सवाल।
5
क्षणभंगुर
जीवन- बुलबुला
साँसें पिंजरा।
6
कभी गुस्साई,
रूठी, चहकी, हँसी
बेटी है आई।
7
घर-आँगन
पायल की खनक
ये छन-छन।
8
सुने कहानी
ये परियों की रानी
बाबा- जुबानी।
9
मेंहदी- सजे
वो नन्हें-नन्हें से हाथ
प्यारे त्योहार।
10
हवा- से हल्की
उसकी वो मुस्कान
मिटे थकान।
11
माँ की है सखी
बनी पिता की मीत,
भाई की प्रीत।
12
फूलों-सी पली
दूजे घर है चली
खिले बगिया।
13
घर की शोभा
ससुराल की शान
ये पहचान।
14
हिये में शूल
छोड़ चली अँगना
नैनों का नूर !
15
बीती ये उम्र
इस इंतजार में-
मिलेगा प्यार।
16
क्यों प्रतिपल,
अनहोनी का डर
है उम्र भर।
17
वो मनमीत
अधूरे बने गीत
कैसा संगीत।
18
खामोशी बनी
जहर- बुझा तीर
शब्द कहानी।
19
ओढ़ी बेरुखी
नाम दे मजबूरी
यही जिन्दगी।
 20
यादें पहेली
बनी कब सहेली
पूछे बावरी।
21
बादल आए
उम्मीद- डोर संग
ताकें धरती ।
22
सर्दी की शामें
संवेदना-सी जमी
ढूँढती आँच।
23
खोजते रहे
टूटा-सा आशियाना
सर्दी का आना।
24
सर्दी के दिन
वो कुनकुनी धूप
मिला खजाना।
25
अमृत लगे
इक टुकड़ा धूप
खोजें निगाहें।
26
शीत लहर
खोजें अर्थ सर्दी के-
पाँच मरे हैं।

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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