February 23, 2012

माफ करना सीखें

- डॉ. सृष्टि सिसोदिया
माफ करना सीखें। वैसे ये तो सजा देने से भी कड़ा व कठिन काम है, लेकिन यह हमें खुद को तथा वातावरण को हल्का रखने के लिए संजीवनी बूटी का काम करती है।
किसी अपने की बुरी लगी पुरानी बातों व गलतियों को माफ कर नजरअंदाज करना ही उचित है। यदि हम इसे अपनी आदत में शुमार कर लें तो मन से कड़वाहट तो दूर हो जाती है साथ ही हम अपने आप से परेशान नहीं होते और सामने वाले की अप्रस्न्नता भी दूर हो जाती है। अगर हम ऐसा नहीं कर पाते तो इसका सीधा असर हमारे दिल व दिमाग पर होता है।
देने और माफ करने का ही दूसरा नाम ही जिंदगी है। आप देते और माफ सिर्फ इसलिए नहीं करते कि यह सही है, बल्कि इसलिए करते हैं क्योंकि इससे आप अच्छा महसूस करते हैं। किसी को माफ न करने पर आपका मन भी तो अशांत रहता है।
माफी मांग कर जहां हम खुद का बोझ उतारते हैं, वहीं किसी को माफ करके दोनों का मन निर्मल करते हैं। छोटी-छोटी बातों के लिए मन में बैर क्यों रखें? इंसान को गलतियों से सीखकर, प्रायश्चित कर खुद को भी माफ करना आना चाहिए। अनावश्यक आत्मग्लानि में जलते रहना समझदारी नहीं है। इसपर आप भी सोचिए और माफ करना सीखिए।

1 Comment:

sarafwise said...

very deep thinking.enjoyed reading hindi article after s.uch long time. keep up writting. kshitij,pune

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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