July 10, 2020

जागरूक

जागरूक
- कृष्णानंद कृष्ण
रात का सन्नाटा कुत्तों के लड़ने की आवाज से टूट जाता है। कुछ लोग धनगाँव एक्सप्रेस की प्रतीक्षा में  इधरउधर बैठे हुए हैं। रात गहरा गई है। कुछ मज़दूर ट्राफिक गोलम्बर पर सोये हुए हैं।
सिनेमा रोड से एक आदमी ट्रैफिक गोलम्बर की तरफ आता है। लड़खड़ाती चाल से पियक्कड़ तथा मैले कपड़े और अस्तव्यस्त केशों को देखकर पागल का अहसास होता है।
गोलम्बर के पास आकर वह रुकता है। सोये हुए लोगों को गौर से देखता है। फिर गिनती शुरू करता हैएक, दो, तीन .....दस....पंद्रह और अचानक रुक जाता है।
सोये हुए लोगों को एक बार फिर गिनता है। इर देखता है फिर चिल्लाने लगता है– ‘‘किसके आर्डर सोया है तुम लोग यहाँ? कौन है इस शहर का मालिक? हमको जवाब दो ,ये लोग लावारिस के माफिक यहाँ क्यों सोए हुए हैं?’’
कोई कुछ नहीं बोलता है। वह आक्रोश की मुद्रा  में मुट्ठियाँ हवा में उछालता है, ‘‘मैं पूछता हूँ ....कौन है यहाँ का मालिक...देखता क्यों नहीं....मेरे मासूम बच्चे भूखे फुटपाथ पर सोये हुए हैं।और सामने होटल के नीचे लड़ते कुत्तों को देखकर ठहाका लगाता है, बुदबुदाता है, ‘‘साले, तुम लोगों में भी भाईचारा नहीं रह गया क्या?’’
‘‘का हो काका, मस्ती बाँनू ?’’ एक रिक्शा वाला पूछता है। वह चिल्लाता है, ‘‘कमीनो, उड़ाओ मेरा मज़ाक, खूब उड़ाओ मेरा मज़ाक... लेकिन तुम लोग दो बजे रात को यहाँ किसके आर्डर से बैठे हो ? बताओ वो लोग गोलम्बर पर क्यों सोया है ? मैं जानता हूँ, तुममे से कोई कुछ नहीं बोलेगा। तुम्हारी जबान जो बंद है।’’
गोलम्बर पर सोये लोगों की ओर देखकर वह फिर चिल्लाता है, ‘‘आओ मेरे बच्चों, आओ ..... मैं तुम्हारे हक की लड़ाई लड़ूँगाकोई कुछ नहीं बोलता है। वह एक बार फिर चारों तरफ चौकन्नी नज़र से देखता है, फिर शुरू हो जाता है, ‘‘ठीक है मेरे बच्चो, तुम आराम से सोओ। मैं तुम्हारे हक की लड़ाई लड़ूँगा, अकेलेऔर सामने से आती एक काली कार के सामने खड़ा हो जाता है। हवा में मुट्ठियाँ भाँजते हुए चिल्लाता है, ‘‘तुम लोग देखता नहीं, मेरे बच्चे सोये हुए हैं....गाड़ी रोको....नहीं तो उनकी नींद टूट जायेगी।’’
गाड़ी का दरवाजा एक झटके से खुलता है। दो आदमी बाहर आते हैं और उसे पकड़कर गोलम्बर पर पटक जाते हैं।
वह गोलम्बर पर सोये लोगों के बीच में पड़ा बड़बड़ाता है
‘‘सालों.... तुम खूब नींद से सोओ... लेकिन मैं तुम्हारे हक की लड़ाई लड़ूँगा।...अकेले ....अकेले...।’’

2 Comments:

शिवजी श्रीवास्तव said...

सुंदर,सशक्त लघुकथा, हक की लड़ाई लड़ने वाले सच मे पागल ही कहे जाते हैं।बधाई कृष्णानन्द कृष्ण जी

Sudershan Ratnakar said...

सुंदर लघुकथा।जो हक़ के लिए आवाज़ उठाता है शक्तिशाली लोग यही हश्र करते हैं।

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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