August 18, 2018

प्रेरक

खुद को भविष्य के लिए कैसे तैयार करें
-निशांत

मैं आपको डराना नहीं चाहता लेकिन आनेवाला समय बहुत जटिल और विकट होनेवाला है। ऑटोमेशन और आर्टीफ़ीशियल इंटेलीजेंस/मशीन लर्निग के कारण बहुत बड़ी संख्या में लोग बेराजगार होंगे ; क्योंकि ट्यूशन पढ़ाने से लेकर गाड़ी चलाने तक के बहुत सारे काम मशीनी तरीके से होने लगेंगे। ये परिवर्तन ग्लोबल होंगे और कोई भी सरकार या कल्याणकारी प्रोग्राम उनकी मदद नहीं कर पाएगा। ऐसे में उन लोगों की माँग बनी रहेगी जो फ़्यूचर-प्रूफ़ होंगे। फ़्यूचर-प्रूफ़ होने का मतलब है भविष्य में आनेवाले बड़े परिवर्तनों का सामना करने के लिए तैयार होना। इसके लिए आपको नई स्किल्स डेवलप करनी होंगी और अपने काम-काज व स्वभाव की आदतें बदलनी होंगी।
यदि आप कुछ ऐसे काम करना चाहते हैं या ऐसी आदतें डेवलप करना चाहते हैं जिनका लाभ आपको अगले 3 या 5 वर्षों में मिलने लगे तो यह पोस्ट आपके लिए है। ये दरअसल वे सुझाव और हिदायते हैं जो मुझे बीस साल पहले मिली होतीं (और जिनपर मैंने अमल किया होता) तो मैं और अधिक बेहतर व्यक्ति बन पाता। लेकिन अच्छी बातें सीखने की कोई उम्र नहीं होती इसलिए आप 20 के हों या 50 के हों, यदि आपके बस में है तो आप इनमें से कुछ बातों को अपने जीवन में उतारकर देखिए। हो सकता है कुछ के अच्छे परिणाम आपको फौरन ही मिलने लगें और कुछ के परिणाम देर से मिलें, लेकिन वे परिणाम दीर्घकालिक होंगे और जीवनपर्यंत आपका हित करेंगे। ये बातों आपको जीवन के हर क्षेत्र में आगे रखेंगी और आप कभी भी दूसरों पर आश्रित नहीं रहेंगेः
-आप चाहे कोई भी काम करते हों, सबसे पहले आप यह करें कि अपना काम पूरी मेहनत से करें और उसे बीच में कभी न छोड़ें। यदि आप अपने फेसबुक और सोशल मीडिया के एडिक्शन पर कंट्रोल कर लेंगे तो आप अपनी पीढ़ी के बहुसंख्यक वर्ग से बहुत आगे निकल जाएँगे।
-वीडियो गेम्स या स्मार्टफोन पर गेम्स खेलना बहुत सारा समय बर्बाद कर देता है। यदि आप एक घंटा खेलने के बाद कह सकते हों कि  बहुत मज़ा आया, लेकिन अब कुछ काम किया जाए तो आप सही राह पर हैं, अन्यथा इनसे दूर रहने में ही भलाई है।
-कोई एक एथलेटिक हॉबी चुन लें, जिसे आप साल भर कर सकते हों। यदि ऐसा नहीं करेंगे तो आपकी एकैडमिक या 9-5 जॉब की लाइफ़स्टाइल देर-सबेर आपके पेट, पीठ, आखों और मसल्स को नुकसान पहुँचाएगी।
-इंटरपर्सनल रिलेशनशिप्स में आनेवाले टकरावों को सुलझाने का कौशल सीखिए। इंटरनेट पर बहुत कठिन परिस्तिथियों में वार्तालाप करने से संबंधित प्रैक्टिस करानेवाले बहुत से रिसोर्स हैं। ये ज्यादातर अंग्रेजी में ही हैं, लेकिन इन्हें देखकर आपको समझ में आएगा कि जब बहुत कुछ दांव पर लगा हो तो हमें कैसा व्यवहार करना चाहिए।
-यदि आप प्रोग्रामिंग सीखना चाहते हों तो ज़रूर सीखें। मुझे प्रोग्रामिंग नहीं आती और अब मैं इसके बिना भी बहुत कुछ काम चला लेता हूँ, लेकिन यदि मुझे प्रोग्रामिंग की बेसिक जानकारी भी होती, तो मैं बहुत सारा समय और पैसा बचा पाता।
-सबसे पहले अंग्रेजी का टाइपिंग करना सीख लें। फिर ज़रूरत लगे तो अपनी मातृभाषा की टाइपिंग भी सीख लें। कम-से-कम समय में बेहतरीन पॉवरपॉइंट प्रेज़ेंटेशन बनाना सीख लीजिए। वर्ड या स्प्रेडशीट प्रोग्राम पर अपनी पकड़ मजबूत कीजिए। अच्छी बिजनेस ई-मेल भेजना भी बहुत बड़ा स्किल है।
-किसी भी रिसर्च या रिपोर्ट में डेटा को पढ़ना या डिस्प्ले करना सीखिए। हमकई मामलों में सिर्फ इसीलिए धोखा खा जाते हैं; क्योंकि हमें आँकड़ों की कलाबाजी समझ नहीं आती। आँकड़ों का अध्ययन करना सीखिए और यह जानिए कि अपना हित साधने के लिए आँकड़ों में लोग किस तरह से हेर-फेर करते हैं और कंपनियाँ अपने प्रोडक्ट बेचने के लिए किस तरह सर्वे-रिपोर्ट बनवाते हैं। ऐसा करने से आपको किसी भी डिस्कशन या मीटिंग वगैरह में यह जानने में देर नहीं लगेगी  कि सामनेवाले के फ़ैक्ट्स कितने मजबूत हैं।
-यह सीखिए कि जिन लोगों को आप जानते नहीं हैं, उनसे फोन पर बात कैसे की जाती है। कुछ लोग सामनेवाले के फोन उठाते ही ठाँ-ठाँ शुरू हो जाते हैं। सिर्फ आमने-सामने के वार्तालाप में ही नहीं; बल्कि अजनबियों से फोन पर बात करने में भी मैनरिज़्म को फॉलो करने पर नए संपर्क बनते हैं, बिगड़े हुए काम बनने की संभावना बढ़ जाती है। उद्यमिता या आंत्रपेन्यूर स्किल्स सीखने के लिए कोई छोटा-मोटा साइड बिजनेस शुरु करके देखें, जैसे प्रिंटिंग-पब्लिशिंग, चीजों की रिपेयरिंग, ड्रॉप-शिपिंग, कोचिंग। इससे आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा और कभी आपने नौकरियां बदलीं तो आपको सपोर्ट मिलता रहेगा।
-आप आस्तिक हों या नास्तिक, अपने लिए एक ऐसा प्राइवेट स्पेस बनाएँ जहाँ आप अपने ईश्वर से या प्रकृति से बातें कर सकें। ब्रह्मांड से बातें कीजिए, उससे अपने विचार शेयर कीजिए। अपने विचारों को सुलझाइए, उन्हें बोल-बोलकर स्पष्ट बनाइए, और लिखकर उनके इंप्लीमेंटेशन के तरीके खोजिए. ब्रह्मांड और प्रकृति हमारे भीतर ही है और यह हमसे बहुत अधिक बुद्धिमान और जागरुक है. यदि हम इससे तालमेल मिला लेंगे तो हमें अपने लक्ष्यों तक बढ़ने में आसानी होगी।अपने खर्च की ट्रेकिंग करने के लिए कोई एप्प इस्तेमाल करें । एक मासिक बजट बनाएँ  और उसपर टिके रहें। कम-से-कम संसाधनों का प्रयोग करके जीवन जीने की कला विकसित करें, ताकि भविष्य में किसी भी संकटकाल में आपको बड़ी असुविधाओं का सामना नहीं करना पड़े। किसी भी मीडियम रिस्क फंड में हर महीने कुछ रुपए इन्वेस्ट करें और मार्केट के छोटे-मोटे उतार-चढ़ावों से विचलित हुए बिना निवेश करना जारी रखें।
यदि आपको लगता है कि किसी विदेशी भाषा का ज्ञान होने से आपको एडवांटेज मिल सकती होतो ज़रूर सीखें। किसी भी भाषा को पूरी तरह से सीखने का काम बहुत बड़ा टास्क है ;इसलिए इस काम को गंभीरता से करें अथवा न ही करें।
-नेटवर्किंग और सेलिंग करना सीखिए। बहुत से औसत लोग भी इंटरनेट पर अपने क्षेत्रों में अग्रणी माने जाते हैं क्योंकि उन्होंने नेटवर्किंग, सेलींग, और डिजिटल मार्केटिंग के फ़ॉर्मूलों को अपनाकर स्वयं को स्थापित किया। जिस व्यक्ति में प्रतिभा हो उसे यह करना आना चाहिए क्योंकि इसे नहीं करने पर लोग गुमनामी में खो जाते हैं।
-स्वादिष्ट, सस्ता और पोषक भोजन बनाना सीखिए। यह स्किल आपको अकेले रहने के दौरान बहुत काम आएगा। आप अपने समय का बेहतरीन इस्तेमाल कर पाएँगे, आप स्वस्थ रहेंगे और आपका पैसा भी बचेगा। लोगों से नेटवर्किंग करने में भी यह बहुत काम आएगा और लोगों को आपसे अलग तरह से कनेक्ट करेगा।
-कोई म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट बजाना सीखें। यदि यह नहीं कर सकें तो ऐसा संगीत सुनेंजो आपको उमंग और उत्साह से भर दे। हर दिन की शुरुआत अपने संगीत को सुनने से करें। यह पॉज़िटिव प्रभाव रिपल इफ़ेक्ट (पानी की लहरें) की तरह आपके दिन भर के कामकाज को प्रभावित करता रहेगा।
-अपने दोस्तों के साथ सैर-सपाटे के लिए कुछ पैसे बचाकर रखें। आप नई जगहों में जाकर नए अनुभव लेंगे। ये अनुभव व्यक्ति के जीवन-दर्शन को बदलने की क्षमता रखते हैं। ये आपको नए-नए लोगों से मिलने और विचारों से परिचित होने का मौका देते हैं।
-जब कोई व्यक्ति आपको कम समय में बहुत सारा पैसा कमाने का उपाय बताने लगे तो वहाँ से फूट लीजिए। यह सब फर्जीवाड़ा होता है। इतने मेम्बर बनाओइतना सामान खरीदो/बेचो आपके नीचे जितने ज्यादा लोग जुड़ेंगे आपको उतना ज्यादा कमीशन मिलेगाये सब बकवास है। कम समय में पैसेवाला बनने की जगह यह लोगों की बचत को चूना लगा देता है।  ईज़ी मनी जैसा कुछ नहीं होता।
-हर सप्ताह कमसे-कम एक किताब ज़रूर पढ़ें। किताबों को किंडल पर भी पढ़ सकते हैं और ऑडिबल पर सुन भी सकते हैं। मैं लिटरेरी थ्योरी से लेकर न्यूरोसाइंस और क्वांटम फ़िज़िक्स से लेकर एंथ्रोपोलॉजी तक सब कुछ पढ़ता हूँ। बायोग्राफ़ीज़ पढ़ना मुझे पहुत पसंद है। फिक्शन भी। आप सब कुछ नहीं तो कुछ-कुछ पढ़िए, लेकिन पढ़िए। इससे दिमाग खुलता है। मैं आपको दो बेहतरीन लेखक सुझाता हूँ जिनका नाम है Tim Ferriss और James Altucher। इनके विचारों से आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। (हिन्दी ज़ेन से)

0 Comments:

लेखकों से... उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।
माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। माटी संस्था कई वर्षों से बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से उक्त गुरूकुल के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (U.K.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर, रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी, रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से स्कूल जाने में असमर्थ बच्चे शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होंगे ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेंगे। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ.ग.) मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष