November 27, 2010

रंग बिरंगी दुनिया

सबसे नाटा खगेन्द्र पत्नी के हेंडबैग में बैठकर दुनिया की सैर करना चाहता है!
दुनिया के सबसे बौने कद का पुरुष होने का गिनीज विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके नेपाली युवक की ख्वाहिश लंबी और खूबसूरत लड़की से शादी करने की है। उसका सपना है कि वह अपनी पत्नी के हैंडबैग में बैठकर दुनिया की सैर करे। नेपाल की राजधानी काठमांडू से करीब 125 किलोमीटर दूर स्थित पोखरा का रहने वाला खगेन्द्र थापा मगार आगे चलकर डाक्टर बनने का ख्वाब भी पाले हुए है। खगेन्द्र की 18वीं वर्षगांठ पर दुनिया के सबसे कम कद वाले व्यक्ति के रूप में रिकॉर्ड बुक में दर्ज किया गया है। खगेन्द्र की लम्बाई मात्र 26.4 इंच है। उसने अब तक के सबसे बौने व्यक्ति कोलम्बिया के एडवर्ड निनो हर्नाडीज से बौना होने का खिताब छीन लिया है। हर्नाडीज की लम्बाई 27 इंच है।
खगेन्द्र के पिता रूप बहादुर थापा मगार एक फल विक्रेता हैं। वे अपने पुत्र की 'उपलब्धि' पर बहुत खुश हैं। खगेन्द्र के परिवार वाले काफी पहले से खगेन्द्र को दुनिया का सबसे छोटा इंसान होने का दावा कर रहे थे लेकिन गिनीज बुक में उनका ना दर्ज करने के लिए उनका 18 साल का होना जरूरी था। गिनीज वल्र्ड रिकॉर्ड के अनुसार वैसे तो दुनिया का सबसे छोटा इंसान भारत में है जिसका नाम गुल मोहम्मद है तथा जिसकी ऊंचाई सिर्फ 22.5 इंच है। लेकिन गुल मोहम्मद सिर्फ रिकॉर्ड धारक के तौर पर अपनी पहचान नहीं बनाना चाहते इसलिए यह खिताब उनके नाम दर्ज नहीं किया गया। अब खगेन्द्र जो दुनिया में सबसे नाटे व्यक्ति के रूप में विख्यात हो गए हैं को नेपाल सरकार ने अगले वर्ष आयोजित होने वाले 'भ्रमण नेपाल वर्ष' के लिए सद्भावना राजदूत नियुक्त किया है। हो सकता है इसी दौरान खगेन्द्र को कोई लंबी और ख्रूबसूरत लड़की मिल जाए जिससे शादी करके वह उसकी जेब में बैठकर दुनिया की सैर कर सके।
अनोखे टॉयलेट्स की अनोखी सैर
क्या कोई सैलानी टॉयलेट्स की सैर करना चाहेगा? आपको कैसा टॉयलेट पसंद है? सुनने में बात कुछ अजीब तो लगती है पर है यह सच। बर्लिन घूमने आने वाले सैलानी टॉयलेट्स की भी सैर करते हैं? बर्लिन में एक यात्रा टॉयलेट्स की सैर के लिए होता है और यह खूब पसंद किया जा रहा है क्योंकि अनोखे टॉयलेट्स की सैर अनोखी है। गाइड अना हासे लोगों को अलग तरह के बर्लिन की सैर कराना चाहती हैं। वह सैलानियों को उन जगहों पर ले जाना चाहती हैं, जहां आमतौर पर लोग नहीं जाते। इसके लिए उन्होंने बर्लिन के सबसे मशहूर टॉयलेट्स को चुना है। इस सैर में दशकों पुराने टॉयलेट्स से लेकर एकदम आधुनिक और तकनीकी टॉयलेट्स शामिल हैं। एक टॉयलेट 19वीं सदी में बनाया गया है, उसकी तकनीक और उसके साफ सफाई का तरीका भी पुराना है लेकिन आज भी चल रहा है। इसी तरह जापान में बना एक ऐसा आधुनिक और ऑटोमेटिक टॉयलेट जिसकी कीमत एक छोटी कार जितनी है? आधुनिक बर्लिन की पहचान बन रहे पोट्सडैमरप्लात्स स्क्वेयर पर मौजूद टॉयलेट भी इस यात्रा का हिस्सा है, जो सबसे आधुनिक तकनीकों पर काम करता है। बर्लिन में आप यह सब देख सकते हैं।
हासे को यह आइडिया 2005 में सालाना इंटरनेशनल टूरिस्ट गाइड डे के मौके पर आया। हासे के अनुसार 'मुझे लगा कि मेरे ज्यादातर सैलानियों को पार्कों और चर्चों में लेकर जाएंगे। लेकिन मैं कुछ अलग करना चाहती हूं। मैं लोगों को बर्लिन में साफ सफाई के इतिहास और टॉयलेट संस्कृति के बारे में बताना चाहती हूं।Ó अपने इस अनोखी यात्रा के जरिए हासे सैलानियों के लिए टॉयलेट्स की कमी की ओर भी ध्यान दिलाना चाहती हैं। वह कहती हैं, 'पहले तो लोग नाक भौं सिकोड़ते हैं, लेकिन जब मैं उन्हें टॉयलेट्स से जुड़ीं अनोखी बातें बताती हूं तो वे हैरान रह जाते हैं।'
दुनिया की सबसे लंबी बिल्ली
अमेरिका के नेवादा में रेनो नाम की इस बिल्ली का नाम गिनीज बुक में दर्ज किया गया है। इस बिल्ली की मालकिन का दावा है कि मेरी रेनो सबसे लंबी घरेलू बिल्ली है। इस बिल्ली की लंबाई 48.5 इंच है।

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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