September 23, 2009

शिक्षकों के लिए एक मंच

यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि शिक्षक हमारी शिक्षा व्यवस्था के हृदय हैं। शिक्षा को अगर बेहतर बनाना है तो शिक्षण विधियों के साथ-साथ शिक्षकों को भी इस हेतु पेशवर रूप से सक्षम तथा बौद्धिक रूप से सम्पन्न बनाए जाने की जरूरत है।
इसके लिए हर स्तर पर तरह-तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। टीचर्स आफ इंडिया पोर्टल ऐसा ही एक प्रयास है। तेजी से बदलती और विकसित होती दुनिया में कम्प्यूटर तकनॉलॉजी हमारे जीवन के हर क्षेत्र में प्रवेश कर गई है। शिक्षा का क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। पोर्टल इस तकनॉलॉजी पर ही आधारित है। इसीलिए इसे शिक्षकों के लिए ई-मंच भी कहा जा रहा है। गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की प्राप्ति के लिए कार्यरत अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन (एपीएफ) ने इसकी पहल की है। महामहिम राष्ट्रपति महोदया श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने वर्ष 2008 में शिक्षक दिवस पर इसका शुभांरभ किया था। पोर्टल राष्ट्रीय  ज्ञान आयोग द्वारा समर्थित  है। इसे आप  www.teachersofindia.org पर देख सकते हैं। यह नि:शुल्क है। अभी यह हिन्दी,कन्नड़, तमिल, तेलुगू, मराठी, उडिय़ा, गुजराती तथा अंग्रेजी भाषाओं में है। कोशिश है कि यह सभी मुख्य भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हो।   
क्या है पोर्टल !
Teachers of India शिक्षकों के लिए ऐसी जगह है जहां वे अपनी पेशेवर क्षमताओं को बढ़ा सकते हैं। पोर्टल शिक्षकों के लिए-
* एक ऐसा मंच प्रदान करता है, जहां वे विभिन्न विषयों, भाषाओं और राज्यों के शिक्षकों से संवाद कर सकते हैं। Teachers of India शिक्षकों को अपने मत अभिव्यक्त करने के लिए मंच देता है। शिक्षक अपने शैक्षणिक जीवन के किसी भी विषय पर अपने विचार पोर्टल पर रख सकते हैं। 
* ऐसे मौके उपलब्ध कराता है, जिससे वे देश भर के शिक्षकों के साथ विभिन्न शैक्षणिक विधियों और उनके विभिन्न पहुलओं पर अपने विचारों, अनुभवों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। वे पोर्टल के लिए लिख सकते हैं। यह लेखन शिक्षण विधियों, स्कूल के अनुभवों, आजमाए गए शैक्षिक नवाचारों या नए विचारों के बारे में हो सकता है।
* दुनिया भर से विभिन्न शैक्षिक नवाचार, शिक्षा से सम्बंधित जानकारियां और उनके स्रोत भारतीय भाषाओं में उन तक लाता है। विभिन्न शैक्षिक विषयों, मुद्दों पर लेख, शिक्षानीतियों से सम्बंधित दस्तावेज, शैक्षणिक निर्देशिकाएं, माडॅयूल्स आदि पोर्टल से सीधे या विभिन्न लिंक के माध्यम से प्राप्त किए जा सकते हैं। पोर्टल पर एक ऐसी डायरेक्टरी भी है जो शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही संस्थाओं की जानकारी देती है।          
* शिक्षक पोर्टल के विभिन्न स्तम्भों के माध्यम से पोर्टल पर भागीदारी कर सकते हैं। 
क्या है पोर्टल में !
पोर्टल पर शिक्षा परिप्रेक्ष्य, शिक्षानीति, कक्षा अभ्यास तथा विषय शीर्षकों के अंतर्गत सामग्री प्रस्तुत की जा रही ही। माह के शिक्षक पोर्टल का एक विशेष फीचर है। इसमें हम ऐसे शिक्षकों को सामने ला रहे हैं, जिन्होंने अपने उल्लेखनीय शैक्षणिक काम की बदौलत न केवल स्कूल को नई दिशा दी है, वरन समुदाय के बीच शिक्षक की छवि को सही मायने में स्थापित किया है। प्रश्नकाल में शिक्षक शिक्षा से संबंधित अपने सवाल पूछ सकते हैं। इस स्तम्भ की खास बात यह है कि अगर पूछे गए प्रश्न का जवाब किसी शिक्षक को आता है तो वह भी जवाब दे सकता है। स्टाफ रूम में अपने हमख्याल शिक्षकों से चर्चा की जा सकती है। फोटो एलबम शिक्षकों की गतिविधियों को दृश्य रूप में सबके सामने रखने का मौका देता है। भविष्य में पोर्टल पर कक्षा गतिविधियों के वीडियो प्रस्तुत करने की योजना भी है।         
किसके लिए है पोर्टल !     

निसंदेह पोर्टल शिक्षकों का मंच है। शिक्षकों का अर्थ है- वे जो स्कूल में पढ़ा रहे हैं, वे जो भविष्य के शिक्षक हैं, वे जो शिक्षकों को तैयार कर रहें हैं- यानी शिक्षक अध्यापक। पोर्टल इन सबके लिए तो है ही । शिक्षक-शिक्षा में संलग्न संस्थाएं, शिक्षा विभाग, स्कूल शिक्षा के प्रशासक और विश्वविद्यालयों से भी पोर्टल का उतना ही सरोकार है। पोर्टल का उद्देश्य तभी पूरा हो सकता है जब अधिक-से-अधिक शिक्षक उसमें भागीदारी करें।
कैसे  जुड़ें पोर्टल से !
यह तो स्पष्ट ही है  कि पोर्टल से जुडऩे  के लिए कम्प्यूटर तकनॉलॉजी का न्यूनतम व्यवहारिक ज्ञान होना जरूरी है। साथ ही चाहिए इंटरनेट सुविधा। यह घर, स्कूल, शिक्षा संस्थाओं या सायबर कैफे कहीं भी हो सकती है।  इसके लिए व्यक्तिगत प्रयास तो करने ही होंगे, साथ ही विभिन्न संस्थाओं को भी आगे आना होगा। हम चाहते हैं कि वे सब पोर्टल के साथ एक जीवंत रिश्ता बनाएं जो शिक्षकों से किसी न किसी रूप में जुड़े हैं।
पोर्टल की योजना यह भी है कि हर राज्य और भाषा में शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही स्थानीय संस्थाओं के साथ पोर्टल का जीवंत रिश्ता बनाया जाए। संस्थाओं से निम्न न्यूनतम अपेक्षाएं होंगी-
* पोर्टल के लिए उर्जावान स्रोत शिक्षकों की पहचान करना। उनके साथ क्षेत्रीय भाषा में सामग्री तैयार करने के  लिए विभिन्न विषयों पर कार्यशाला आयोजित करना।  तैयार सामग्री की साफ्ट  कॉपी बनाना। शिक्षकों से लेख  आदि एकत्रित करना। इन लेखों को यूनिकोड में  बदलकर पोर्टल में प्रकाशन  के लिए भेजना।    
* अपने इलाके में शिक्षा में आजमाई जा रही शिक्षण विधियों, नवाचारों की पहचान करना तथा उनके बारे में इस दृष्टि से लिखना, लिखवाना कि उसका लाभ अन्य शिक्षक उठा सकें।
* शिक्षकों के लिए अपनी संस्था में भौतिक रूप से जगह तथा कम्प्यूटर आदि उपकरण उपलब्ध कराना ताकि वे पोर्टल में योगदान दे सकें।
* पोर्टल के लिए शिक्षकों का रजिस्ट्रेशन करना। कम्प्यूटर तथा इंटरनेट तकनॉलॉजी के उपयोग में शिक्षकों की सहायता करना।
यदि आप किसी भी रूप में पोर्टल से जुडऩा चाहते हैं, और पोर्टल के साथ मिलकर रचनात्मक काम करना चाहते हैं तो कृपया हमें लिखें या ईमेल करें। आपका स्वागत है। 

अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन
#134, डूड्डाकन्नेली, विप्रो कारपोरेट ऑफिस के बाजू में,         
सरजापुर रोड, बंगलौर 560 035.
Email: teachers@azimpremjifoundation.org

0 Comments:

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष