July 10, 2020

प्रेरक

कौन- सी बात हमें सबसे अधिक
 प्रेरित कर सकती है?
- निशांत
मेरी समझ से वह बात, जो किसी को भी सबसे अधिक प्रेरित कर सकती है वे केवल तीन सपाट शब्द हैं : तुम मर जाओगे
मेरा उद्देश्य आपको डराना या चौंकाना नहीं है।  मैं एक बिल्कुल व्यावहारिक बात कर रहा हूँ। आपको एक ही जीवन मिला है और इसे खुशहाल बनाने के मौके भी आपको कुछ-एक ही मिलेंगे। खाली बैठकर दुनिया से और ज़िंदगी से अपनी उम्मीदों के पूरे नहीं होने पर अफ़सोस मनाने और शिकायत करने की बजा उठिए, कुछ कीजिए।
दुनिया में ज्यादातर लोग दूसरों की खुशियों पर फ़ोकस करते हैं, जबकि उन्हें अपनी ज़िंदगी पर फ़ोकस करना चाहिए। क्या आप जानते हैं कि मैं लोगों को प्रेरित करनेवाली, अपने जीवन का उद्देश्य खोजनेवाली, और प्रेरित करनेवाली बातें क्यों लिखता हूँ? क्योंकि मैं वाकई अपनी ज़िंदगी से बहुत खुश हूँ।
यह आपको स्वार्थपरकता लग रही होगी;  लेकिन आपका उद्देश्य सबसे पहले खुद को खुश और संतुष्ट करना होना चाहिए। इसके बाद ही आप दूसरों के जीवन की फिक्र कर सकते हैं, उन्हें खुश कर सकते हैं।
मैं चाहता हूँ कि आप अपने प्रति पूरी ईमानदारी बरतें और खुद से यह पूछें कि जो कुछ भी आप कर रहे हैं,  वह आपको सफल होने में कितना सहायक होगा। मैं केवल बिजनेस के बारे में ही नहीं;  बल्कि जीवन के हर पक्ष के बारे में कह रहा हूँ। जब आप अपने जीवन से खुश होते हैं, तो आपको अहसास होता है कि पैसे की मात्रा से अधिक महत्त्व इस बात का हो जाता है आप पैसा कैसे कमाते हैं।
किशोरावस्था से ही मैंने अपना बहुत सा समय बुज़ुर्ग व्यक्तियों के साथ बिताना शुरू कर दिया था, ऐसे लोग जिनकी उम्र 80-90 साल से भी अधिक थी। मैं उनसे ज्यादातर अपनी यात्राओं के दौरान या वाइन इंडस्ट्री में काम करने के दौरान मिलता था और उनसे उनके जीवन के बारे में विस्तार से बताने के लिए कहता था। उनमें से ज्यादातर लोग ये दो शब्द काशमैं का बहुत इस्तेमाल करते थे।  इन शब्दों से उनके जीवन का अफ़सोस झलकता था। कुछ लोगों को इस बात का अफ़सोस था कि उन्होंने कड़ी मेहनत नहीं की। कुछ को इस बात का दुःख सताता था कि उन्होंने अपने प्रियजनों के साथ बेहतर वक्त नहीं गुज़ारा. और कुछ को यह ग़म सालता था कि उन्होंने अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने के लिए अपनी आकांक्षाओं को बिसरा दिया। वे पछतावे, रंज, खेद, अफ़सोस से भरे थे।
उन बुजुर्गों के साथ वक्त बिताने से जो एकमात्र सबसे महत्त्वपूर्ण बात मुझे पता चली वह यह है: यदि आपको कुछ सार्थक कुछ महत्त्वपूर्ण करना है तो इस समय से बेहतर कोई दूसरा समय नहीं है।
यदि आप कॉलेज से हाल ही में निकले हैं तो आपका समय शुरु हो चुका है। इस क्षण यह ज़रूरी है कि आप साल भर के भीतर शानदार कार खरीदने जैसा कोई लक्ष्य नहीं बना लें, जो आपको पैसे के पीछे पागलों की तरह भागने पर मजबूर कर दे। यह समय इस बात को जान लेने का है कि आपके पास लगभग पाँच साल का वक्त है, जिस दौरान आपको ज़िंदगी की जंग जीतने के लिए कमर कस लेनी है। आपको अपने कार्यस्थल पर भरपूर काम करना है ; लेकिन दोस्तों के साथ दुनिया भर घूमकर तरह-तरह के अनुभव भी प्राप्त करने हैं। अपने टैलेंट का फ़ायदा उठाने के लिए आपको म्यूज़िक बैंड भी बनाना है। बिजनेस की बारीकियाँ सीखने के लिए आपको नेटवर्किंग में भी हाथ आजमाना है। ये सारे काम आपको अपने तीन दोस्तों के साथ उस घोंसलेनुमा अपार्टमेंट में रहते हुए करने हैं। चूँकि आप और आपके दोस्तों को अभी शादी और बच्चों जैसी अहम जिम्मेदारियाँ नहीं उठानी हैं इसलिए यही आपके जीवन का वह कालखंड है जब आप पूरी तरह अकेले रहकर अपने दम पर अपनी ज़िंदगी को दिशा देने वाले निर्णय ले सकते हैं।
भले ही आप 40 या 50 वर्ष के या उससे भी अधिक आयु-वर्ग के हों, जीवन को खुशहाल बनाने के विकल्प अभी खत्म नहीं हुए हैं। यदि आप खुश रहना चाहोगे तो आपको खुशी मिलेगी। जल्दी रिटायर होकर गोल्फ़ खेलने के सपने देखने से बेहतर होगा कि आप तब तक काम करने का निश्चय करो जब तक आपकी सेहत इसकी इजाज़त दे। अर्ली रिटायरमेंट एक बहुत बड़ा छलावा है। काम कभी खत्म नहीं होता और ज़िंदगी वक्त से पहले किसी को रिटायर होने का मौका नहीं देती। आज हम उस विश्व में रह रहे हैं जहाँ इंटरनेट ने अवसरों की अनेक खिड़कियाँ खोली हैं। आज हममें प्रतिभा और भीड़ को चीरकर आगे बढ़ने का हौसला हो तो हम हर क्षेत्र में लीडर-अचीवर बन सकते हैं।
इन बातों का सारांश क्या है? इस दुनिया में हमारे दिन नियत हैं। खुद आप और आपके सभी जानकारों में से लगभग सभी व्यक्ति 70-80 वर्षों के भीतर चल बसेंगे। यह एक कठोर सत्य है;  लेकिन इसे स्वीकर कर लेना चाहिए. आज आपकी उम्र कितनी भी हो, जीवन को खुशहाल बनाने के सारे मौके चूके नहीं हैं। यह मनुष्य के इतिहास का ऐसा विलक्षण समय है, जब परिवर्तन सर्वाधिक गति से हो रहे हैं और हम अपने मनचाहे जीवन के स्वरूप को पा सकते हैं।
मैं इस पोस्ट को लिखने पर मजबूर हो गया था; क्योंकि यह मेरे उन अनुभवों और अवलोकनों की प्रतिक्रिया है, जो मुझे पिछले कुछ वर्षों में मिले हैं। मैंने बहुतेरे लोगों में वह प्रवृत्ति देखी है, जिसके वशीभूत होकर वे हाथ आए अवसरों को गँवाते हैं ; क्योंकि उन्हें यह लगता रहता है कि वे उस काम को किसी और दिन कर लेंगे लोग जीवन इस तरह जी रहे हैं, जैसे उनके पास समय असीम हो। यह सब भयावह है। जीवन के अंतिम वर्षों में यह व्यक्ति को बहुत अधिक कड़वाहट से भर देता है।
यदि मैं इस पोस्ट के माध्यम से केवल एक व्यक्ति को उसके व्यवहार में परिवर्तन लाने पर विवश कर दूँ, उसके मन में कुछ करने की प्रेरणा जगा दूँ, उसे हाथ आए अवसर को मजबूती से जकड़ने का मौका दे दूँ,  तो मुझे लगेगा कि मेरा यह सब लिखना सार्थक रहा। दिन खत्म होने से पहले हमारी बैटिंग की बारी ज़रूर आएगी।
तुम मर जाओगे” जैसे कटु और अप्रिय प्रतीत होने वाले शब्द आपको सुबह उठते ही अपने उद्देश्य की पूर्ति करने में रत कर देने के लिए मंत्र के समान हैं। याद रखिए: आपके पास एक ही जीवन है और एक ही अवसर है। मनुष्य के जीवन का क्षय करने वाला असली विष उसका अपना पछतावा है, इसलिए बहानेबाजी बंद कीजिए और वह काम कीजिए जो आपको सच्ची खुशी और सफलता की ओर ले जाए। (हिन्दी ज़ेन से) 

1 Comment:

Sudershan Ratnakar said...

जीवन का सत्य। प्रेरित करता आलेख

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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