March 10, 2013

इस अंक में

उदंती- मार्च 2013                               महिला दिवस एवं होली पर विशेष


आज नहीं बरजेगा कोई, मनचाही कर लो।           होली है तो आज मित्र को पलकों में धर लो!

जो हो गया बिराना उसको फिर अपना कर लो।     होली है तो आज शत्रु को बाहों में भर लो!
                                -हरिवंशराय बच्चन


अनकही: एक अनुकरणीय पहल...- डॉ. ्ना वर्मा
महिला दिवस: औरत को हाशिया नहीं... -बेला गर्ग
महिला दिवस: असीमित शक्तियों का भण्डार है नारी -रीता विश्वकर्मा
महिला दिवस: समाज को नया दृष्टिकोण... - डॉ. प्रीत अरोड़ा
महिला दिवस: विशेषाधिकार नहीं समान अधिकार... -लोकेन्द्र सिंह
होलियाना व्यंग्य: सोशल मीडियाई औरगॅजेटियाई होली -रवि रतलामी
लोक पर्व: छत्तीसगढ़ में फाग की परम्परा -जी. के. अवधिया
कविता: ऐसे खेली होरी -शैली चतुर्वेदी
कविता: सखी री... बस ऐसे फाग खिला दे -वंदना गुप्ता
लोक पर्व: उठाओ चेहरे से नकाब होलीमें -प्रो. अश्विनी केशरवानी
व्यंग्य: भियाजी तो खेलेंगे होली -जवाहर चौधरी
कालजयी कहानियाँ: आँसुओं की होली -मुंशी प्रेमचंद
तीन लघुकथाएँ: जीवन-बाती, डंक, गुबार -सुधा भार्गव
हाइकु: तेरे आने की आहट -तुहिना रंजन
सेहत: हमें छींक क्यों आती है? -सुभाष लखेड़ा
प्रेरक प्रसंग: मन की शांति,पागलपन
आपके पत्र / मेल बॉक्स
पुस्तकें: एक पाती सूरज के नाम -निरूपमा कपूर 
स्वामी विवेकानंद: ये साक्षात जगदम्बा कीप्रमिमूर्ति हैं

3 Comments:

वन्दना अवस्थी दुबे said...

शानदार अंक है रत्ना जी. बधाई.

Bodhmita said...

उदन्त सारे दे दिए
उदन्य हम उदन्त के
तुमने किया हमें उदंतिका
जब उदय किया उदंती का ।।
उदन्त= समाचार
उदन्य = प्यासा
उदंतिका = संतृप्त
उदय = निकलना
~bodhmita

नमिता राकेश said...

ratna ji , aap badhai ki patra hain. mahila ank achha lga.

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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