August 18, 2018

जीवन दर्शन

भय को दूर भगाओ
-विजय जोशी
 अंतस् में भय एक जन्मजात एवं स्वाभाविक प्रवृत्ति है लेकिन जीवन में विकास हेतु इसका सीमा में रहना ही सर्वोत्तम प्रयोजन है। पर वास्तविक जीवन में कई बार ऐसा हो नहीं पाता। अच्छी घटना या प्रसंग से हमारा मनोबल उतनी मात्रा में नहीं बढ़ पाता, जितना कि विपरीत परिस्थिति या भय की दशा में गिर जाता है। हम आगत अनिष्ट के डर से कई बार शुतुरमुर्गी अवस्था अपना लेते हैं, जो आँधी आने पर सिर रेत में सिर घुसाकर सोचता है कि कोई संकट सामने नहीं है। यह प्रवृत्ति व्यक्तिगत रूप से बहुत घातक है और जीवन की गति को अवरूद्ध करती है।
एक बार बनारस में स्वामी विवेकानंद एक मंदिर से निकल रहे थे कि वहाँ मौजूद बहुत से बंदरों ने उन्हें घेर लिया और नजदीक आकर डराने लगे। स्वामीजी कुछ सोचकर पीछे हटने लगे, तो बंदर और नज़दीक आकर उनके पीछे ही पड़ गए।
वहाँ से गुजर रहे एक संन्यासी ने यह देखकर स्वामी विवेकानंद से कहा - डरो मत, रुको और उनका सामना करो।
स्वामी जी तुरंत बात का मर्म समझ गए, त्वरित पलटे और बिना एक भी क्षण नष्ट किए उन बंदरों की ओर बढऩे लगे। ऐसा करते ही बंदर भाग खड़े हुए। इसी बात से स्वामीजी को एक सीख मिली, जिसे बाद में उन्होंने अपने संबोधन में भी सदा कहा - पलटो और सामना करो।
बात का सारांश इतना मात्र है कि कई बार भय बहुत छोटा होता है, लेकिन अपने मानस में हम उसे कई गुना बड़ा आकार प्रदान कर देते हैं और यहीं से समस्या की शुरूआत होती है। भयग्रस्त मानस हमारे मनोबल को प्रभावित करते हुए अंतत: हमारी सुचारु रूप से कार्य कर पाने की प्रणाली को शिथिल कर देता है। हमारी उमंग, उत्साह  को हत्सोसाहित करते हुए हमें धीरे धीरे अवसाद की गर्त में डुबोने लगता है। भय से भय की कोई आवश्यकता नहीं । उसे तो फ्रंट फूट पर खेलकर अपने आत्म विश्वास रूपी बल्ले से आसमान में छक्का लगाइए और तब देखिए वह कैसे काफूर हो जाता है। अज्ञात भय की कल्पना कर उसे सीने से लगाकर जीने की अपेक्षा उसे उपक्षित करने की मनोवृत्ति तथा मनोबल उसे धराशायी कर देता है। साहस रूपी संकल्प ही हमें सफलता के प्रशस्ति पथ की ओर ले जाता है.
भय के आगे आग जलाओ,
कद्दावर शब्दों को लाओ
फिर देखो अपनी जमीन का
कितना बड़ा जिगर लगता है
तुमको नाहक डर लगता है
सम्पर्क: 8/सेक्टर-2, शांति निकेतन (चेतक सेतु के पास), भोपाल- 462023, मो. 09826042641,  
E-mail- v.joshi415@gmail.com

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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