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Feb 1, 2026

उदंती.com, फरवरी - 2026

वर्ष- 18, अंक - 7

अपराध करने के लिए

चाहिए कठिन दुस्साहस

साहस उससे भी अधिक चाहिए

करने के लिए प्यार

             -विजय बहादुर सिंह

अनकहीः आज के दौर में एक शादी ऐसी भी... - डॉ. रत्ना वर्मा

ललित निबंधः वसंत...वसंत...कहाँ हो तुम... - डॉ. महेश परिमल

आलेखः छाप तिलक सब छीनी... - डॉ. सुशीला ओझा 

लघु लेखः प्यार एक दिन के उत्सव का नाम नहीं - डॉ. योगिता जोशी

दोहेः ऋतु वासंती - कमल कपूर

संस्मरणः प्रेमिल पिंकी - निर्देश निधि

प्रेरकः पिंजरे का संगीत और पहाड़ की गूँज - डॉ. गिरिराजशरण अग्रवाल

कुंडलिया छंदः प्रहरी रक्षक देश के - परमजीत कौर ‘रीत’

प्रकृतिः क्या पौधे भी संगीत सुनते हैं? - डॉ. डी. बालसुब्रमण्यन

कविताः आँखों में खिलते बसंत के फूल - अंजू निगम

शख्सियतः पर्यावरणविद वैज्ञानिक माधव गाडगिल - संकेत राउत

कविताः बीते हुए बसंत की याद में - सांत्वना श्रीकान्त

कविता: ढाई आखर - विजय जोशी

आलेखः प्रभावशाली बनना है तो दूसरों को महत्त्व दीजिए - सीताराम गुप्ता

यादेंः मुझसे ईश्वर ने  बुलवाया - राजनन्दिनी राजपूत

लघुकथाः ख़ुदा ख़ैर करे - छवि निगम   

बाल डायरी के अंशः सुबह हंस रही थी - डॉ. पद्मजा शर्मा

लघुकथाः उन सुनहरे दिनों की तरह - सन्तोष सुपेकर

कहानीः कद्रदान - गंभीर सिंह पालनी

व्यंग्यः नेताओं का शृंगार हैं चमचे - रेखा शाह आरबी

किताबेंः इतिहास के हाशिये से उठती एक चेतना - डॉ. पूनम चौधरी 

कविताः कविता करने के लिए... -  डॉ. रमाकांत गुप्‍ता


5 comments:

  1. Dr.Kanak Lata02 February

    बासंती हवा की यह मधुर सुगंध अवश्य ही हमारी चेतना को सुवासित करेगी। आदरणीय काम्बोज भइया को ह्रदय से धन्यवाद जिन्होंने हमें इतनी सुन्दर रचनाओं से अवगत करवाया साथ ही उदंति को बहुत शुभकामनाएं...🙏🏻😊

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  2. Anonymous02 February

    ताज़ी हवा का झोंका बनकर आई है उफनती की पत्रिका , एक नहीं अनेक गुलों की ख़ुशबू लिए

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  3. Anonymous02 February

    ताज़ी हवा का झोंका बनकर आई है उफनती की पत्रिका , एक नहीं अनेक गुलों की ख़ुशबू लिए
    रत्ना जी हार्दिक बधाई इस अति सुंदर प्रयास के लिए
    देवी नागरानी

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  4. उदंती का यह अंक बसंत की खुशबू लिए महक रहा है। सभी रचनाएँ पठनीय और विचार करने योग्य हैं। खासकर अनकही में कही गई बात कि शादी में इन दिनों जो अनावश्यक खर्च होता है वह बिल्कुल सही है।इस पर समाज को सोचना ही होगा ।

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  5. आप सभी आदरणीय पाठकों का हृदय से आभार और धन्यवाद 🌸🙏
    आपकी शुभकामनाएँ, सराहना और संवेदनशील प्रतिक्रियाएँ उदंती के इस बासंती अंक की सार्थकता को और भी गहराई देती हैं।
    यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता होती है कि पत्रिका की रचनाएँ आपको स्पर्श कर सकीं और विचार के लिए प्रेरित कर पाईं।
    आप सबका स्नेह, समर्थन और प्रोत्साहन ही उदंती की वास्तविक शक्ति है।
    इसी विश्वास के साथ कि आगे भी यह साहित्यिक संवाद बना रहेगा— यही कामना है। 🌼✨

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