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Jan 1, 2026

उदंती.com, जनवरी - 2026

वर्ष -18, अंक -6

मुदित नया साल

ओस भीगी धरा, किरनों के पाँव

उतरा है सूरज, अपने इस गाँव।

पत्तों से छनकर, आई है धूप

निखरा है प्यारा, धरती का रूप।

शरमाती कलियाँ, मुस्काते फूल

बाट में बिछाए, घास के दुकूल।

तरुवर पर पाखी, देते हैं ताल

द्वार पर खड़ा है, मुदित नया साल। 

                  - रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

इस अंक में 

अनकहीः बौद्धिक स्वतंत्रता अभी बाकी है... - डॉ. रत्ना वर्मा

आलेखः वंदे मातरम् की गौरव गाथा  - प्रमोद भार्गव

प्रकृतिः आते हैं नभ से जल के मेहमान - रविन्द्र गिन्नौरे

दोहेः सूरज आने को हुआ - हरेराम समीप

संस्मरणः अयोध्या से वाराणसी - उमंग और ऊर्जा भरते घाट - सुदर्शन रत्नाकर

यादेंः नव वर्ष - एक उत्सव वाला दिन - डॉ. जेन्नी शबनम

आलेखः शोर में डूबता जीवन : हेडफोन की आदत... - संध्या राजपुरोहित

लघुकथाः चिप - मीनू खरे

व्यंग्यः नये साल में लालबुझक्कड़ फिर मिल गए - गिरीश पंकज

व्यंग्यः शुभकामनाओं की दहशत - विनोद साव

लघुकथाएँः 1. सफाई, 2. लीडर - अनुवाद: सुकेश साहनी

लघुकथाः दुर्गंध - सुकेश साहनी

कविताः परिवार : सात कविताएँ - जयप्रकाश मानस

कहानीः बोझ - डॉ. योगिता जोशी

लघुकथाः खुशफहमी -  हसन जमाल

किताबेंः छंद विधान एवं सृजन - डॉ . कविता भट्ट

कविताः बचपन -  प्रगति गुप्ता

प्रेरकः पेंसिल का संदेश

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