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Jun 1, 2026

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवसः योग से ही होगा कल्याण

  - जैस्मिन जोविअल

"शरीर को फिट रखने का नया ट्रेंड? रोज़ थोड़ा योग, बाकी दिन भर आलस का जोग!"

मतलब साफ है- योग नहीं करेंगे, तो शरीर बोलेगा, “अरे ज़रा सँभल भी ले!”

आज की भागती-दौड़ती जिंदगी में हम सब ‘हाइपर ऐक्टिव ज़ोंबी’ बन गए हैं- काम, मीटिंग, फोन, सोशल मीडिया, और फिर थककर गिर जाना। जब डॉक्टर की फीस जेब जलाने लगे और गूगल भी थककर कहे- “थोड़ा योग कर ले भाई”, तब समझिए- "अब योग से ही होगा!"

कुछ साल पहले, मैं भी वही करती थी, जो हम सब करते हैं- नींद पूरी न करना, खाने के समय इंस्टाग्राम स्क्रॉल करना, और हर दर्द का इलाज- ‘पेनकिलर’ समझना।

फिर एक दिन ऑफिस से लौटते हुए जब बस में बैठे-बैठे कमर ऐसे चटकी  जैसे कुरकुरे हों, तो लगा— “अब तो या तो हड्डियाँ जाएँगी या मैं कुछ बदलूँ!”

उसी रात YouTube खोला और ‘Easy yoga for lazy people’ टाइप किया।

पहली बार प्राणायाम करते हुए हँसी आई- “इसमें तो बस नाक ही चल रही है, शरीर को क्या ज़रूरत थी?”

पर धीरे-धीरे, वह नाक की हवा, दिल की दवा बन गई।

आज रोज़ सुबह योग करने का मतलब सिर्फ़ वज़न कम करना नही; बल्कि ख़ुद से मिलने का एक तरीका है। और हाँ, अब कुरकुरे बस चाय के साथ खाते हैं- कमर के साथ नहीं!

योग कोई नया ऐप नहीं, जिसे हर महीने अपडेट करना पड़े। यह हजारों साल पुराना ‘स्वदेशी हैल्थ कोड’ है।

हमारे ऋषि-मुनि तो हिमालय की गुफाओं में बैठकर योग करते थे, और हम एयरकंडीशनर चलाकर भी कहते हैं- “बड़ा कठिन है!”

महाभारत में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को समझाया- 'योगः कर्मसु कौशलम्’, मतलब अगर काम में भी स्टाइल चाहिए, तो योगी बनो!

क्यों करें योग?

आजकल बीमारियाँ भी CV लेकर घूमती हैं- डायबिटीज़, हाई बीपी, तनाव, चिंता, थकावट…

और हम? बॉडी स्प्रे से स्ट्रेस भगाने की कोशिश करते हैं।

योग कहता है- “साँसें ठीक कर, सोच अपने आप ठीक हो जाएगी।”

योग के फायदे, एकदम सीधी भाषा में:

• शरीर का जंग छूटता है

• मन की गाड़ी पटरी पर आती है

• नींद बिना Netflix के भी आती है

• पेट, पीठ और सोच- तीनों सुलझ जाते हैं

• मोबाइल से ज़्यादा खुद से कनेक्शन बनता है

योग: सिर्फ़ आसन नहीं, लाइफ़स्टाइल है

कई लोग सोचते हैं कि योग का मतलब है- “शीर्षासन में फोटो लेना।”

भाई साहब, योग का असली मतलब है- किसी भी हालत में ‘सीधा रहना’।

चाहे बॉस नाराज़ हो, चाहे वज़न बढ़ जाए, या रिश्ते उलझ जाएँ- योग सिखाता है: साँस लो, मुस्कुराओ, और डटे रहो।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: जब पूरी दुनिया ने चटाई बिछाई, 21 जून को पूरी दुनिया योग करती है।

न्यूयॉर्क की सड़कों से लेकर टोक्यो के पार्कों तक लोग ऐसे योग करते हैं, जैसे पूरी दुनिया एक योग कैम्प में बदल गई हो।

भारत ने यह दिखा दिया कि हमारी पुरानी चीजें भी आज की दुनिया में ट्रेंडिंग बन सकती हैं- बस नाम में  ‘डे’ जोड़ना आना चाहिए!

दुनिया तेज़ है- खाना फ़ास्ट, इंटरनेट फ़ास्ट, रिश्ते भी फ़ास्ट-फॉरवर्ड।

पर योग कहता है- "धीरे चलो, तभी गहराई से जियो।"

हर दिन थोड़ा योग करके देखिए, शायद आपको खुद से ही फिर से प्यार हो जाए।

तो चलिए, एक चटाई हो जाए, थोड़ा मत बनिए- थोड़ा मत बनिए—बस कहिए:

“आज कुछ योग हो जाए... क्योंकि योग से ही कल्याण होगा!”

 ई -मेलः neelanjanamaggo@gmail.com

लघुकथाः तिल

 - हरि मृदुल

उसे ऑफिस में बैठे हुए पता नहीं कैसे अचानक याद आया कि बीवी के नीचे के होंठ के पास एक तिल था, जो उसकी खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देता था। क्या वह तिल अब भी वहीं है?

इधर लंबे समय से ध्यान ही नहीं गया।

घर जाकर पहले बीवी का चेहरा निहारा। बड़े गौर से। किसी जासूस की तरह।

बीवी इस अप्रत्याशित व्यवहार पर चकित थी।

पूछा– क्या देख रहे हैं ऐसे?

‘तिल कहाँ गया, जो शादी के पहले मैंने नीचे के होंठ के पास देखा था?’

‘है ना तिल। एक नहीं दो–दो। एक दाहिनी आँख के नीचे और दूसरा नाक के ऊपर।’

‘मैं उस तिल की बात कर रहा हूँ, जो नीचे के होंठ के पास था....।’

‘ये उसी तिल के तो बच्चे हैं। इन्हें मुझे सौंप कर वह तिल मिट गया है।’

उसने देखा कि वाकई बीवी की दाहिनी आँख के नीचे और नाक के ऊपर दो छोटे–छोटे तिल उभर आए हैं।

बीवी के चेहरे पर झुका हुआ वह विस्मित था।

इतने में उसके दोनों बच्चे दौड़े आए।

‘मम्मी के चेहरे को इतने गौर से क्यों देख रहे हैं पापा?’

‘देख रहा हूँ कि मेरी बीवी गुम तो नहीं हो गई...।’

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवसः शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य का उत्सव

  -  डॉ. योगिता जोशी 

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हर साल 21 जून को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य योग के महत्व और इसके लाभों के प्रति वैश्विक स्तर पर जागरूकता फैलाना है। योग दिवस एक ऐसा अवसर है जब पूरी दुनिया मिलकर इस प्राचीन भारतीय परंपरा का सम्मान करती है और इसके माध्यम से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करती है। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि भारतीय योग परंपरा को विश्व ने स्वीकार किया है और पूरी दुनिया 21 जून को योग दिवस मनाती है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत 2015 में हुई थी। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अपने भाषण के दौरान योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था। उनके इस प्रस्ताव को 177 देशों का समर्थन मिला और 11 दिसंबर 2014 को UNGA ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित किया। 21 जून का दिन इसलिए चुना गया क्योंकि यह उत्तरी गोलार्ध का सबसे लंबा दिन होता है और भारतीय संस्कृति में इसका विशेष महत्व है।

यह कहने की बात नहीं कि योग एक सम्पूर्ण जीवन पद्धति है जो शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाकर संतुलन और शांति प्रदान करती है। योग के विभिन्न आसन और प्राणायाम शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं। यह शरीर का लचीलापन, मांसपेशियों की शक्ति, और सहनशक्ति को बढ़ाता है। योग मानसिक तनाव को कम करने, ध्यान केंद्रित करने और मानसिक स्पष्टता को बढ़ाने में भी मदद करता है। खेद की बात है कि लोग जानते हैं, समझते भी हैं इसके बावजूद योग के मामले में बहुत जागरूक नहीं हैं। इसे गंभीरता से नहीं लेते। हर साल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है, जो योग के विभिन्न पहलुओं पर जोर देती है। 2023 की थीम थी, "Yoga for Vasudhaiva Kutumbakam" थीम के माध्यम से स्वास्थ्य, शांति और सामंजस्य को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाता है। इसी तरह इस बार 2024 की थीम है, 'Yoga for Self and Society' है। योग स्वयं के लिए और समाज के लिए।

योग के लाभ-

1. शारीरिक स्वास्थ्य- 

योग विभिन्न शारीरिक आसनों और श्वसन तकनीकों (प्राणायाम) का संयोजन है, जो शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। नियमित योग अभ्यास से शरीर के लचीलेपन, शक्ति और सहनशक्ति में सुधार होता है। योग की विभिन्न मुद्राएँ शरीर के विभिन्न अंगों पर कार्य करती हैं, जिससे संपूर्ण शरीर का विकास होता है।

2. मानसिक स्वास्थ्य-

 योग मानसिक शांति और स्थिरता को बढ़ावा देता है। ध्यान और प्राणायाम जैसी तकनीक तनाव को कम करने में सहायक होती हैं। नियमित योग अभ्यास से मानसिक स्पष्टता, एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन में सुधार होता है। यह चिंता, अवसाद और अन्य मानसिक समस्याओं को कम करने में मदद करता है।

3. आध्यात्मिक विकास- 

योग का एक महत्वपूर्ण पहलू इसका आध्यात्मिक विकास है। योग व्यक्ति को आत्म-ज्ञान की ओर अग्रसर करता है और उसे अपनी आत्मा के साथ जुड़ने में मदद करता है। ध्यान और ध्यान की विधियाँ व्यक्ति को आत्मा की गहराई में जाकर आत्म-अन्वेषण करने का अवसर देती हैं।

4. सामाजिक और नैतिक मूल्य - 

योग न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है बल्कि समाज में नैतिक और सामाजिक मूल्यों का भी संवर्धन करता है। यम और नियम (व्यक्तिगत अनुशासन) जैसे योग के सिद्धांत व्यक्ति को एक बेहतर नागरिक बनने में मदद करते हैं। ये सिद्धांत अहिंसा, सत्य, संयम, और लालच न करना जैसे गुणों को बढ़ावा देते हैं।

5. जीवन शैली में सुधार- 

योग एक संतुलित जीवन शैली को प्रोत्साहित करता है। योग अभ्यास के साथ-साथ उचित आहार, नियमित दिनचर्या, और संतुलित जीवन जीने की आदतों को अपनाने से व्यक्ति की जीवन गुणवत्ता में सुधार होता है। यह अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह आदि जैसी जीवन शैली संबंधी बीमारियों को नियंत्रित करने में सहायक होता है।

योग एक संपूर्ण जीवन पद्धति है जो व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को समग्र रूप से सुधारता है। इसका नियमित अभ्यास व्यक्ति को स्वस्थ, संतुलित, और खुशहाल जीवन जीने में सक्षम बनाता है। आज के आधुनिक जीवन में, जहाँ तनाव और जीवन शैली संबंधी बीमारियाँ बढ़ रही हैं, योग का महत्व और भी बढ़ जाता है। योग को अपने जीवन में अपनाकर हम सभी एक स्वस्थ और समृद्ध समाज का निर्माण कर सकते हैं तो आइए आज हम सब भी नियमित योग करने का संकल्प लें।

किसी कवि ने क्या खूब कहा है कि-

प्रतिदिन हम करते रहें ,शुद्ध हृदय से योग ।

पास कभी फटके नहीं, तरह-तरह के रोग ।।


दो कविताएँः

 - सत्या शर्मा ‘कीर्ति’

1. दक्षिण यात्रा के पूर्व 

मैं खुद में उतारना

चाहती हूँ

अध्यात्म की बातें

आत्मा के जागृत

होने की बातें

त्राटक, साधना

उपासना की बातें

इंगला, पिंगला और

सुषुम्ना के बीच बहती

साँसों की नदी के बारे में

मेरुदंड के अवस्थित

सातों चक्र के बारे में

ध्यान की अवस्था में

शून्य मन

शून्य तन

और उस निराकार के बारे में

शरीर, जगत

को धारण करने वाले

पंच तत्त्व की

बातें

भृकुटि के बीच अवस्थित

अपने ही तीसरे नेत्र की बातें

दक्षिण दिशा की

यात्रा के पूर्व

ब्रह्मांड के शून्य

संग मिल पूर्ण हो

जाने के बारे में

2. अंतर्यात्रा

कभी तुम

खामोश हो जाओ

और बोलने दो

खामोशी को

शांत हो जाओ

और

हलचल होने दो

शून्यता में

कभी रुक जाओ

औऱ चलने दो

स्थिरता को

कानों पर हाथ रख लो

और कहने दो

खामोशी को

हमेशा एक निश्चित

सीध में चलना ही

गति नहीं  होती

कभी दिशा के विपरीत

मुँह कर रुक जाना भी

गति होती है

यह गति होती है

स्वयं खुद की

अगर किसी दिन 

तुम खुद के

बुद्ध बनना चाहो

तो

नदी के विपरीत दिशा में

तैर जाना

सारे जन्मों का तीर्थ

तुम्हारे ही उद्गम के

मुहाने पर

तुम्हारी प्रतीक्षा में

खड़ी मिलेगी।


May 1, 2026

उदंती.com, मई - 2026

वर्ष- 18, अंक- 10

जंगल में घर बहुत ही कम हैं

बोले कैसे वास करेंगे?

घर में जंगल जब उग जाएँ 

जीने की क्या आस करेंगे।

              - रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

इस अंक में

अनकहीः गर्मी से भागते हुए… क्या ‘सच’ से भी भाग रहे हैं? - डॉ. रत्ना वर्मा

आलेखः मनोरंजन के बहाने आतंक का पाठ पढ़ते बाल-गोपाल - प्रमोद भार्गव

मनोविज्ञानः बच्चों को सोशल मीडिया की ‘लत’ - स्रोत फीचर्स

कविताः वे दो प्रौढ़ स्त्रियाँ! - अंजू खरबंदा

भाषाः पाँच सौ प्रतियाँ और करोड़ों के प्रतिनिधि - जयप्रकाश मानस

चिंतनः टूटना, बिखरना, समेटना और सँवरना  - डॉ. महेश परिमल

यात्रा वृतांतः कारों धाम की यात्रा कथा - मांडवी सिंह

लघुकथाः साँझा दर्द - सुदर्शन रत्नाकर

लघुकथाः 1. कूप मण्ड़ूक,  2. बैल - सुकेश साहनी

कथाः अंतिम याचना - बसंत राघव

लघुकथाः अगोचर - भीकम सिंह

कविताः बचा रहे जो आवश्यक है - पूनम चौधरी

कहानीः राही  - भावना सक्सैना

व्यंग्यः प्लास्टर वाली टाँग  - डॉ. मुकेश 'असीमित'

कविताः खामोशी - अनिता मण्डा

किताबेंः युवा क्रांतिकारी के  बहुआयामी  व्यक्तित्व से परिचित कराती कृति - प्रो. सुरंगमा यादव

आलेखः प्रेम शब्द का घटता अर्थ और भाषा की जिम्मेदारी - हिना श्रीवास्तव

सॉनेटः इस समय - अनिमा दास

खानपानः कॉफी के स्वाद निराले - डॉ. डी. बालसुब्रमण्यन