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Jan 1, 2026

खलील जिब्रान की दो लघुकथाएँ

 अनुवाद: सुकेश साहनी

1. सफाई 

दार्शनिक ने गली के सफाईकर्मी से कहा, "मुझे तुम पर दया आती है, तुम्हारा काम बहुत ही गंदा है।"

मेहतर ने कहा, "शुक्रिया जनाब, लेकिन आप क्या करते हैं?"

प्रत्युत्तर में दार्शनिक ने कहा, "मैं मनुष्य के मस्तिष्क उसके कर्मो और चाहतों का अध्ययन करता हूँ।"

तब मेहतर ने गली की सफाई जारी रखते हुए मुस्कराकर कहा, "मुझे भी आप पर तरस आता है।"

2. लीडर 

पवित्र नगर की तलाश में जाते हुए मेरी मुलाकात एक दूसरे यात्री से हुई, मैंने उससे पूछ लिया, "पवित्र नगर पहुँचने का सही रास्ता यही है क्या?"

उसने कहा, "मेरे पीछे-पीछे चले आओ, चौबीस घंटों के भीतर तुम पवित्र नगर पहुँच जाओगे।"

मैं उसके पीछे चल पड़ा। हम दिन-रात चलते रहे, कई दिन बीत गए, पर हम पवित्र नगर नहीं पहुँचे।

तभी अप्रत्याशित बात हुई,  वह मुझ पर बरस पड़ा; क्योंकि मैं जान गया था कि उसे पवित्र नगर के रास्ते के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

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