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Feb 1, 2026

कविताः आँखों में खिलते बसंत के फूल

  - अंजू निगम

कुछ आँखों में 

कभी शाम नहीं उतरती

और कुछ आँखों से

हमेशा रात लिपटी रहती है

सुनो न ऐ जिन्दगी 

तुमने क्यों भर दिया

कुछ आँखों में आषाढ़ का महीना 

या क्यों नहीं टूटती

कुछ आँखों से पूस की रात 

मैं तुमसे बात करूँगी ज़िन्दगी

जब कभी मिलूँगी किसी नुक्कड़ पर

अच्छा लगेगा जब देखूँगी

इन आँखों में 

खिलते बसंत के फूलों को।


9 comments:

  1. Dr.Kanak Lata21 February

    अहा!
    'ज़िन्दगी, जब कभी मिलूंगी किसी नुक्कड़ पर' बहुत ही सुन्दर कविता और कविता की हरेक पंक्ति ह्रदय को स्पर्श करती हुई आगे बढ़ रही है.. 👏🏻👏🏻🙏🏻

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  2. कुछ आँखों में आशाढ़ का महीना
    अति सुन्दर

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  3. Anonymous21 February

    आँखों में आषाढ़ का महीना ,वाह..वाह.., बहुत अद्भुत बिंब , बधाई!!!
    शीला मिश्रा

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  4. Anonymous21 February

    बहुंत ही सुंदर

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  5. Anonymous21 February

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति। बधाई । सुदर्शन रत्नाकर

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  6. Anonymous21 February

    बहुत ही सुंदर

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति 👏

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  8. Anonymous21 February

    बहुत ही भावपूर्ण रचना है। जिसमें बसंत की भिन्नता है और बसंत जब सबके लिए समान होगा तब देखने की अभिलाषा है।
    अंजू दीदी की यह कविता सर्वे भवन्तु सुखिनः के भाव की सशक्त अभिव्यक्ति है।

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  9. वाह! बहुत सुन्दर कविता।

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