“दो घण्टे हो गये हैं चैटिंग करते!”
“तुमसे बात करता हूँ, तो किसी दूसरी ही दुनिया में चला जाता हूँ!मन करता है तुम्हें चिप बनाकर फ़िट कर लूँ अपने आप में..जब चाहूँ चिप ऑन,चैट शुरू …”
“चिप बेशक बना लो; लेकिन जैसे आज स्टाफ़ रूम में मुझे देख रहे थे सबके सामने वैसी गहरी निगाहों से मत देखा करो प्लीज़! मेरा दिल धड़कने लगता है!”“इतनी मुश्किल ज़िन्दगी में भी इतने कोमल एहसास! इसीलिए तुम सबसे अलग हो!”
“ नहीं तुम रखो”
“क्यों?”
“ तुमसे दूर होता हूँ, तो लगता है जान निकल जाएगी! टुकड़ों में नहीं अब तुम्हें पाना चाहता हूँ पूरा!”
“नही ! इट हैज़ टू बी अ प्लेटोनिक लव ओनली! पवित्र…पॉयस.. दोस्तीनुमा प्रेम !”
“इतनी इंटिमेसी में यह दूरी ठीक है?”
“ यही तो ठीक है! तुम मैरिड हो!”
“नही! देखना एक दिन मेरा चाहा ही होगा!”
“नहीं! तुम मैरिड हो!”
“तो क्या हुआ! तुम सिर्फ़ मेरे लिए बनी हो!”
“और तुम?”
“…”
“बोलो”
“क्या बोलूँ? तुम सब जानती हो।”
“तुम इतनी देर चैट करते हो, तो मिसेज़ कुछ कहती नही?”
“वो सो गई हैं।”
“क्या उन्हें हमारे बारे में सब बता दिया है?”
“नहीं तो! क्या है हमारे बीच जो किसी को बताऊँ!”
आगे कभी चैट नही हो सकी। चिप करप्ट हो गयी थी।


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