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Jul 1, 2026

कविताः पानी में बहुत नीचे तक

 -  मोती प्रसाद साहू 

जलकुंभियों का हरा वितान 

नीचे काला पड़ चुका पानी 

और निरूद्ध -सी मछलियाँ 

पहले यहाँ हुआ करता था 

साफ व स्वच्छ एक जलाशय 

स्नान- ध्यान के साथ 

तैरने वालों का मजमा 

अतिथि को छोड़ने आया करते थे 

गृहस्थ यहीं तक...।

'ओदकान्तं स्निग्धो जनोऽनुगन्तव्य:' 


पढ़ाई- लिखाई की प्रतिस्पर्धा में 

बहुत पीछे छूट गया बचपन


नयी पीढ़ी को समझाया गया 

तैरना एक जोखिम है 

और समय मूल्यवान …!

जिसे इस तरह

नष्ट नहीं किया जा सकता 


उनके पास डिग्रियाँ हैं 

कण्ठस्थ हैं 

जल के रासायनिक सूत्र 

तैरना नहीं आता उन्हें ...


बुरी ताकतों ने जमा ली जड़ें 

पानी में बहुत नीचे तक…!


सम्पर्कः अटल आवासीय विद्यालय , गुरमुरा -सोनभद्र उ. प्र.

motiPrasadSahu@gmail.com