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Aug 1, 2026

लघुकथाः दूसरा सरोवर

 - रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'

एक गाँव था। उसी के पास में था स्वच्छ जल का एक सरोवर। गाँववाले उसी सरोवर का पानी पीते थे। किसी को कोई कष्ट नहीं था। सब खुशहाल थे।

एक बार उजले-उजले कपड़े पहनकर एक आदमी गाँव में आया। उसने सब लोगों को मुखिया की चौपाल में इकट्ठा करके बहुत अच्छा भाषण दिया। उसने कहा-"सरोवर आपके गाँव से एक मील की दूरी पर है। आप लोगों को पानी लाने के लिए बहुत दिक्कत होती है। मैं जादू के बल पर सरोवर को आपके गाँव के बीच में ला सकता हूँ। जिसे विश्वास न हो वह मेरी परीक्षा ले सकता है। मैं चमत्कार के बल पर अपना रूप-परिवर्तन कर सकता हूँ। गाँव के मुखिया मेरे साथ चलें। मेरा चमत्कारी डंडा इनके पास रहेगा। मैं सरोवर में जाऊँगा। ये मेरे चमत्कारी डंडे को जैसे ही जमीन पर पटकेंगे, मैं फिर आदमी का रूप धारण कर लूँगा।"

लोग उसकी बात मान गए। उजले कपड़े किनारे पर रखकर वह पानी में उतरा। मुखिया ने चमत्कारी डंडा जमीन पर पटका। वह आदमी खौफनाक मगरमच्छ बनकर किनारे की ओर बढ़ा। मुखिया सिर पर पैर रखकर भागा। डंडा भी उसके हाथ से गिर गया।

अब उस सरोवर पर कोई नहीं जाता। उजले कपड़े आज तक किनारे पर पड़े हैं। गाँववाले चार मील दूर सरोवर पर जाने लगे हैं।

6 comments:

  1. Anonymous02 August

    बहुत बढ़िया कथ है किसी पर भरोसा न करने की सीख भी मिलती है

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  2. आदरणीय
    बहुत सुंदर और सटीक। राजनीति की सच्चाई को बयान करता हास्य मिश्रित शैलीयुक्त व्यंग्य। आज़ादी उपरांत के छः दशक का इतिहास पटल पर। हार्दिक बधाई। सादर।

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  3. सफेद झक पोशाक के भीतर छुपे मगरमच्छ ने लालच दिखाकर स्वच्छ सरोवर हथिया लिया । आज की राजनीति की सच्ची तसवीर दिखा दी ।
    बहुत सुंदर भाई साहब

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  4. Anonymous03 August

    अच्छी लघुकथा के लिए बधाई हिमांशु भाई को । लोक मौकापरस्त होते हैं। किसी पर अधिक विश्वास नहीं करना चाहिए। सोच-विचार कर ही कदम बढ़ाना चाहिए।

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  5. Anonymous04 August

    राजनीति पर कटाक्ष करती बहुत सुंदर लघुकथा। समय का सच। सुदर्शन रत्नाकर

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  6. Anonymous11 August

    गहरी बात कहती बेहतरीन लघुकथा। : हरीश कुमार 'अमित'

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