प्रकृति अपरिमित ज्ञान का भंडार है, पत्ते-पत्ते में शिक्षापूर्ण पाठ हैं, परंतु उससे लाभ उठाने के लिए अनुभव आवश्यक है। - हरिऔध
अनकहीः अनुभवों की छतरी और रिश्तों की बारिश - डॉ. रत्ना वर्मा
शिक्षाः आखिर क्या सीख रहे हैं ये ‘बाल विज्ञानी’? - बृजेंद्र दुबे
लघु लेखः जीवन पहले या सम्मान? - हिना श्रीवास्तव
पर्यावरणः अपशिष्ट मत सोचो। अवसर सोचो! - अपर्णा विश्वनाथ
कविताः शब्दमुक्त - आशा पाण्डेय
यात्रा वृतान्तः बारिश में भीगी अमरकंटक - डॉ. रत्ना वर्मा
शोधः क्या कृत्रिम बुद्धि बता सकती है आपकी सेहत का भविष्य?
प्रकृतिः कैलाश-मानसरोवर में भी है फूलों की घाटी - सीताराम गुप्ता
ललित निबंधः घिर घिर आये काले कजरारे मेघ - रविन्द्र गिन्नौरे
कविताः आषाढ़ के बादल - अर्चना अनुपम
व्यंग्यः प्रपंच - रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’
कविताः पानी में बहुत नीचे तक - मोती प्रसाद साहू
कहानीः लव यू मोर - डॉ. यशोधरा भटनागर
दो कविताएँः 1. उर्मिला हूँ मैं तुम्हारी, 2. अमलतास बन जाऊँगी - गुंजन अग्रवाल ‘अनहद’
दो लघुकथाएँः 1- ईश्वर की खाँसी, 2- बच्चों की आँखें - आनन्द हर्षुल
लघुकथाः उजली दुनिया - अन्तरा करवडे
किताबेंः अनादि समर : छावा के बलिदान से जाग उठा हिन्दू - डॉ. लोकेन्द्र सिंह
कविताः कुछ और... - रमेश कुमार सोनी

बेहतरीन सम्पादकीय, कहानी, कविताओं, यात्रा वृतांत , लघुकथा, व्यंग्य ललित निबंध, शिक्षा तथा पर्यावरण सम्बंधी आलेख आदि विविध विषयों से सुसज्जित उदंती के नवीन अंक के लिए सम्पादक महोदया एवं सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। सुदर्शन रत्नाकर
ReplyDeleteसराहना और शुभकामनाओं के लिए आपका हृदय से धन्यवाद, सुदर्शन जी। आपका यह स्नेह हमारे सभी रचनाकारों का उत्साहवर्धन करने वाला है। आपकी इस आत्मीय टिप्पणी ने पूरी संपादकीय टीम और लेखकों की ऊर्जा को दोगुना कर दिया है। पत्रिका के प्रति अपना यह अमूल्य जुड़ाव और मार्गदर्शन भविष्य में भी इसी तरह बनाए रखिएगा।
Deleteहर विषय को अंक में स्थान दिया गया है। प्रशंसनीय
ReplyDeleteप्रशंसा के लिए आपका आभार एवं धन्यवाद
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