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Mar 1, 2026
उदंती.com, मार्च - 2026
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चित्रः डॉ. सुनीता वर्मा वर्ष- 18, अंक - 8 सुधार बूढ़े आदमी नहीं कर सकते। वे तो बहुत ही बुद्धिमान और समझदार होते हैं। सुधार तो युवाओ के परिश...
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अनकहीः विरोध प्रदर्शन की यह कैसी परंपरा?
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डॉ. रत्ना वर्मा जब हम किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर होने वाली घटना की बात करते हैं, तो बात केवल एक कार्यक्रम या कुछ लोगों की हरकत तक सीमित नहीं...
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पर्व- संस्कृतिः स्वच्छता का पर्व है होली
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- पंकज चतुर्वेदी होली भारत में किसी एक जाति, धर्म या क्षेत्र विशेष का पर्व नहीं है, इसकी पहचान देश की संस्कृति के रूप में होती है । वसंत ऋ...
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आलेखः कृषि और आहार की सनातन संस्कृति
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- प्रमोद भार्गव ॐ सह नाववतु सह नौ भुनक्तु सह वीर्यं करवावहै तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। भारतीय ज्ञान परंपरा में यह भोजन का मंत्र...
शोधः प्रतिरक्षा प्रणाली को कमज़ोर कर रहे टैटू
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एक हालिया वैज्ञानिक अध्ययन में पता चला है कि टैटू सिर्फ त्वचा पर डिज़ाइन बनाने तक सीमित नहीं रहते बल्कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर भी अ...
धरोहरः भो-रम-देव- तुझमें मेरा मन रमा रहे
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- राहुल कुमार सिंह ‘छत्तीसगढ़ का खजुराहो‘ कहे जाने वाले भोरमदेव में शब्दों के साथ भटक रहा हूँ। यह भटकना, रास्ता भूलना नहीं, रास्ते की तलाश...
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दस क्षणिकाएँ
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डॉ. कुँवर दिनेश सिंह 1. पुरानी जड़ें गहरी पुरानी जड़ें समय के साथ सुस्थिर; फलों का भार उठातीं वृक्ष का विश्वास स्थविर! 2. हवा की बात पेड़ो...
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आलेखः ऑनलाइन गेमिंग एक मकड़जाल
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- डॉ. सुरंगमा यादव अभी कुछ माह पहले की एक घटना मन को आज भी आंदोलित कर रही है, लखनऊ में ऑनलाइन गेम के जाल में फँसकर एक 13 वर्षीय किशोर ने...
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स्वास्थ्यः क्या च्यूइंग गम चबाने से तनाव कम होता है?
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- ज़ुबैर सिद्दिकी पिछले सौ साल से भी ज़्यादा समय से च्यूइंग गम सिर्फ मुखवास के तौर पर नहीं, बल्कि मन को सुकून देने वाली चीज़ के रूप में बे...
कविताः तुझसे ही तो मेरी होली
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- शशि पाधा मन के मौसम कोरे-रीते कितने सावन-भादों बीते चैती-होरी, गीत फागुनी तुम गा दो तो, हो ली होली। पीला-संदली हुआ है अम्बर धरती ओढ़े सत...
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कविताः मेरी बहनो!
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- अनिता मंडा वे तुम्हारे पंखों को अनावश्यक बोझ बताकर कतरने की कोशिश करेंगे तुम होशियार रहना मेरी बहनो! कहना उनसे- अपने सपनों का बोझ हम ...
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