अनकहीः देश का भविष्य और युवाओं का संघर्ष - डॉ. रत्ना वर्मा
यादेंः तीजन बाई के साथ वे दो घंटे - डॉ. रत्ना वर्मा
पर्व - संस्कृतिः हरेली तिहार आ गे - रविन्द्र गिन्नौरे
आलेखः पत्रों में लोक-संग्राम - प्रमोद भार्गव
शौर्यः सिपाही बबली सिंह - हरी राम यादव
लघुकथाः दूसरा सरोवर - रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
प्रसंगः लड़का और आयरिश टोपी - आदित्य पाधा, अनुवाद : शशि पाधा
कविताः टूट रही है डोर - कृष्णा वर्मा
दो नवगीतः 1. गाँव की पगडंडियाँ, 2. उजालों का झरना - रमेश गौतम
दो संस्मरणः 1. कपड़े सुखाना भी एक कला है, 2. बाबू मोशाय - अंजू खरबंदा
व्यंग्यः हम आजाद हैं - विनोद साव
हाइबनः अगले जनम... - प्रियंका गुप्ता
कविताः ठहरा हुआ पल - भावना सक्सैना
लघुकथाएँः 1. आखिरी तारीख, 2. खरबूजा - सुकेश साहनी
लघुकथाएँः 1. काम,2. कोशिश 3. कोटा 4. कथा चलती रहे - स्नेह गोस्वामी
चिंतनः ख्वाबों का खयाल - डॉ. महेश परिमल
विज्ञानः क्या एआई भी पूर्वाग्रह से ग्रसित हो सकता है?
किताबेंः डिटेक्टिव मिरांडा- यात्रा पुरातन से नूतन - विजय जोशी

रत्ना जी, ज्वलंत समस्या पर सम्पदकीय , संस्मरण , कविताएँ, लघुकथाओं, चिंतन, आलेख, व्यंग्य पर्व आदि विभिन्न विषयों पर स्तरीय रचनाओं से सुसज्जित उदंती के सुंदर नवीन अंक के लिए आपको तथा सभी सम्माननीय रचनाकारों को हार्दिक बधाई ।सुदर्शन रत्नाकर
ReplyDeleteWell written
ReplyDeleteबहुत ही ज्ञानवर्धक अंक। हर क्षेत्र को समेटा गया है इस अंक में। चाहे लघुकथा हो, तीजन बाई के साथ बिताए क्षण हो, पूरानी यादों को खोलते संस्मरण हो। सब उम्दा
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